- स्वच्छ भारत अभियान की अनदेखी
- 1 की हालत दयनीय, अतिरिक्त शौचालयों की आवश्यकता
- निधि के अभाव में नगर पालिका लाचार
सवांदाता / भोजराज गोवर्धन
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मूल (चंद्रपुर)। खुले में शौच न कर महाराष्ट्र को शौच मुक्त करने की दिशा में भारी प्रयासों से अनेक उपक्रम संचालित किए जा रहे हैं, मगर मूल नगर पालिका इस अभियान से इतर कहीं और खोयी हुई नजर आ रही है. 25 हजार की जनसंख्या वाले मूल नप में पिछले कई वर्षों से सिर्फ 4 सार्वजनिक शौचालयों का प्रावधान किया गया है, जिनमें से एक अनुपयोगी है. जिसकी मरम्मत नगर पालिका द्वारा न होते देख नगर पालिका के पदाधिकारी व नगरसेवकों में तीव्र नाराजगी देखी जा रही है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सन् 2011 में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार मूल नगर पालिका क्षेत्र की जनसंख्या 24,407 थी. पिछले 3 वर्षों में नागरिकों की संख्या निश्चित रूप से बढ़ कर 25 हजार के करीब पहुँच चुकी है. बावजूद इसके मूल नप से आपेक्षित विकास की दिशा में कोई हलचल नहीं देखी जा रही है. जनसंख्या के मुताबिक अतिरिक्त शौचालयों के निर्माण करने के लिए नप ने सरकार से निधि की माँग की थी. अब 5 वर्षों से निधि के अभाव में अतिरिक्त शौचालयों का निर्माण नहीं किए जा सक रहे हैं. बताया जाता है कि नगर पालिका के पास अन्य कार्यों के लिए निधि है, पर तत्कालीन नगराध्यक्ष उषा शेंडे विकास कार्य का नियोजन कर नहीं पायी.
अब 2 महीने पूर्व चुन कर आयी निर्दलीय उम्मीदवार रीना थेरकर नगराध्यक्ष पद पर आसीन हैं. उन्हें नगर पालिका के कार्य सीखने में वक्त लगने के बावजूद बड़े पैमाने पर विकास कार्य करने में बिजी दिख रही हैं, लेकिन सार्वजनिक शौचालयों की ओर उन्हें ध्यान देना होगा, वरना स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य धरा रह जाएगा.
अब देखना यह है कि निकट भविष्य में इसकी सुध लेकर नई नगराध्यक्ष शौचालयों की समस्या पर ध्यान देंगी अथवा लोगों को मजबूरन खुले में शौच के लिए जाना पड़ेगा?









