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    Published On : Fri, Feb 14th, 2020

    मुंढे के पक्ष में २ तो शेष सत्तापक्ष के साथ

    आयुक्त की कथनी-करनी में बड़ा फर्क,विवादास्पद कर्मियों को दे रहे संरक्षण

    नागपुर : मनपा में नए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने जिम्मेदारी संभालते ही कुछ न करते हुए भी सर्वत्र छाए हुए हैं.विवादों और मीडिया की सुर्खियों में नियमित बना रहना इनका छुपा एजेंडा रहा हैं.और तो और नागपुर में आते ही भ्रष्ट वाहन चालक को सहायक बना लेने से काफी चर्चित हो गए,अर्थात ‘चिराग तले अंधेरा’. दूसरी ओर इनके रूखे व्यवहार से मनपा के अधिकारी-नगरसेवक वर्ग नाराज हैं,जिसका नमूना कर विशेष सभा में देखने को मिला।विशेष सभा के दौरान अधिकांश समय अपने मोबाइल पर व्यस्त रहे या फिर अधिकारियों को निर्देश देने में या फिर अन्य कामों से सभागृह के बहार जाते रहे.

    मुंढे का नागपुर तबादला की खबर से मनपा कर्मी सह शहर की जनता-जनार्दन काफी उम्मीद लिए उनके आगमन का इंतज़ार कर रहे थे.लेकिन आने के बाद ऐसा कुछ नहीं किया जिसके लिए जनता-जनार्दन उनकी पीठ थपथपाए।
    मनपा में प्रवेश करते ही अपने रूखे तेवर से मनपा अधिकारियों को एक तरफ परिचय करवाए तो दूसरी ओर भ्रष्ट वाहन चालक को गले लगाकर अपनी दोहरी नित से परिचय करवाए।

    मनपा में कार्यरत अधिकारी-कर्मी सह नगरसेवकों को उम्मीद थी कि मुंढे अपने दमखम से राज्य सरकार के समक्ष बकाया निधि लाएंगे और मनपा में रिक्त हो रही पदों को भरने का आदेश भी लाएंगे।इतना ही नहीं कर्मियों को आशा थी कि मनपा में भी ७वां वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार वेतन लागु करवाने की क्रेडिट लेंगे।

    लेकिन ऐसा न करते हुए उन्होंने प्रशासकीय शब्दों को उलटफेर कर हल्की-फुल्की जिम्मेदारियां बदल कर खुद की पीठ थपथपाने की कोशिश की,जबकि वे अधिकारी पहले से ही दी गई जिम्मेदारी को नियम-परंपरा अनुसार निभा रहे थे.

    मुंढे ने अपनी तय निति के अनुसार मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए एक ठेका श्रमिक को अपने करीब किया और उसे मिडिया मैनेज करने की जिम्मेदारी सौंपी।सूत्र बताते हैं कि इस श्रमिक को निर्देश दिया कि वे ‘प्रिंट मिडिया के अग्रणी पन्नों पर उनका न्यूज़ प्रकाशित करवाए और उनके नियोजित दौरों पर इलेक्ट्रॉनिक मिडिया को ही साथ लें,क्यूंकि उन्हें कुछ ज्यादा पता होता नहीं और उनकी बेख़ौफ़ बातें मुंबई के गलियारों में हिचकोले खाए ! इस श्रमिक ने भी अपने सहयोगियों को पक्ष में लिए मनपा के सफेदपोशों को नज़रअंदाज कर मुंढे की सेवा में लीन हो गए.

    मुंढे की खासियत यह हैं कि वे न तो प्रोटोकॉल को समझना चाहते और न ही निभाना।इसलिए १४ दिन बाद महापौर से मिले और बिना समझे-बुझे लव-कुश को गले लगा लिए.मुंढे का ठेका श्रमिक दरअसल स्मार्ट सिटी का बेरोजगार कर्मी हैं,जिसे मनपा के ही सफेदपोशों ने मनपा जनसंपर्क विभाग का प्रभारी मुखिया बना दिया।इन्होंने नए आयुक्त मुंढे से मनपा जनसंपर्क से जुड़े कर्मी,एजेंसी आदि का परिचय करवाने की बजाय खुद की ‘टीआरपी’ बढ़ाने में लीन हैं.जबकि मनपा का समाचार संकलन का पूर्ण दायित्व ठेके पर तैनात की गई एजेंसी निभा रही और उनके कंधों पर बन्दुक रख उक्त श्रमिक अपनी रोटी सेक रहा.इस अनोखे षड्यंत्र से मनपा के सफेदपोश अच्छे-खासे नाराज हैं.उक्त श्रमिक को इसके लिए फटकार भी मिली।अर्थात मुंढे और मनपा के सफेदपोशों के मध्य पनप रही दरार रूपी आग में उक्त श्रमिक घी डालने का काम कर रहे.ऐसे ठेका श्रमिक मुंढे के लिए भी घातक साबित हो सकते हैं ,क्यूंकि उन्होंने अपनी कालर बचाने के लिए मुंढे की आड़ लेने की जानकारी मिली हैं.

    दूसरी ओर मुंढे किसी भी मनपा में टिके नहीं इसलिए उन्हें मनपाओं का प्रोटोकॉल पता नहीं होता और अनावश्यक सवाल अपने सहयोगियों से कर बैठते।हुआ यूं कि आयुक्त महापौर से मिलकर उनके कक्ष से बाहर निकल अपने कक्ष की ओर जाते वक़्त उनकी नज़र महापौर की वाहन पर पड़ी तो उन्होंने अपने सहयोगियों से सवाल किया कि महापौर की वाहन पोर्च में कैसे खड़ी की गई तो सहायक ने जवाब दिया कि यह प्रोटोकॉल के तहत वहां खड़ी रहती हैं.

    ठेकेदार-नगरसेवक कक्ष में दिखे तो बर्दास्त नहीं
    मनपा में मुख्य लेखा व वित्त अधिकारी का पद रिक्त होने पर आयुक्त ने ठाकुर को मनपा में सशर्त मनपा में लाया।ठाकुर को मनपा का अच्छा खासा अनुभव हैं,इसलिए उन्होंने आयुक्त से साफ़-साफ़ कह दिया कि उनके कक्ष में कोई ठेकेदार या नगरसेवक कोई दबाव बनाने के उद्देश्य से आएगा तो वे बर्दास्त नहीं करेंगी।इस पर आयुक्त ने उन्हें पूर्ण सहयोग करने का आश्वासन दिया।अर्थात अब कोई भी ठेकेदार या नगरसेवक अपने या अपने सहयोगियों के भुगतान संबंधी मांग को लेकर ‘कैफो ठाकुर’ के कक्ष में गए तो उनकी खैर नहीं।

    व्यवस्था पटरी पर लाना हो तो सभी को मूल विभाग में भेजो
    मनपायुक्त मुंढे को मनपा में सुधार ही लाने की इच्छा हैं तो मनपा के विभिन्न विभागों के मूल कर्मी जो अन्य मनचाहे विभागों में मजे काट रहे,उन्हें मूल विभाग में भेजने आदेश दे.मनपा की आय की मुख्य स्त्रोत वाली सभी विभागों में रिक्त पदों की अविलंब भर्ती सीधी प्रक्रिया से करवाए या फिर ठेकेदारी पद्धति से.मनपा से दोगुने वेतन उठाने वाले स्मार्ट सिटी के बेरोजगार अधिकारियों से मनपा की रोजमर्रा की काम लें.और खुद की छवि पर दाग न लगे इसलिए भ्रस्ट कर्मियों को अपने साये से दूर रखें।

    यह भी कड़वा सत्य हैं कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला।दरअसल नागपुर में इन्हें टिकना नहीं हैं इसलिए वातावरण ऐसा तैयार करो कि सरकार कुछ मुंबई बुला ले या फिर मनपा के सफेदपोश मुंबई भिजवाने की व्यवस्था आसान कर दे.

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