Published On : Fri, Jun 20th, 2014

मूल : अधिकार माँगा तो नौकरी से निकाल दिया

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एडवोकेट चिपडूनकर का आरोप

19chd20कामगार कायदा के अनुसार अपने अधिकार की मांग करने पर एक कंपनी ने कामगारों को नौकरी से बेदखल कर दिया जिसकी वजह से गरीब मजदूरों के परिवार पर भूखों मरने की नौबत आ गई है. पत्रकार परिषद के दौरान विदर्भ प्रहार कामगार संघटना की अध्यक्षा एडवोकेट चिपडूनकर ने ये आरोप लगाया है और कामगारों के हित में निर्णय नहीं होने तक आंदोलन करने की चेतावनी एडवोकेट चिपडूनकर ने दिया है.

एडवोकेट चिपडूनकर ने जानकारी दी की मारीगाँव स्थित शांतिकुंज सॉल्व्हंट लिमिटेड कंपनी में कामगारों के ऊपर कंपनी व्यवस्थापकों की तरफ से होने वाले अत्याचारों के बारे में बोलते हुए एडवोकेट चिपडूनकर ने कहा की चुनाव के समय गरीबों और मजदूरों के हित की बातें करने वाले कामगारों को उनका हक़ दिलाने के लिए आगे नहीं आते. एडवोकेट चिपडूनकर ने जानकारी दी की कायदे के मुताबिक़ तनख्वाह और सुरक्षा की गारंटी साथ ही भविष्य निर्वाह निधि की मांग करने पर कंपनी व्यवस्थापन ने अपने अधिकारों की मांग करने वाले 50 से ज्यादा कामगारों को काम पर आने से मना कर दिया. पहले से ही नाममात्र मजदूरी पर काम करने वाले मजदूरों की नौकरी छिन जाने से कामगारों पर भूखों मरने की नौबत आन पड़ी है. एडवोकेट चिपडूनकर की माने तो कामगारों की समस्याओं का निवेदन विदर्भ प्रहार कामगार संघटना की ओर से सहायक कामगार आयुक्त को दिया गया लेकिन अब तक इन कामगारों के हित के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है. कामगारों को उनका हक़ नहीं दिया गया तो कंपनी के गेट के सामने अन्नत्याग आंदोलन करने की चेतावनी विदर्भ प्रहार कामगार संघटना की अध्यक्षा एडवोकेट चिपडूनकर ने दी.

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