
नागपुर टुडे: महाराष्ट्र में वर्ष 2026 के खरीफ सीजन के दौरान कम बारिश और लंबे समय तक बारिश नहीं होने से उत्पन्न सूखे की स्थिति को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता संजय अग्रवाल ने राज्य सरकार से किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर सूखा प्रभावित किसानों को ₹1 लाख प्रति हेक्टेयर मुआवजा देने और उनके बच्चों की एक शैक्षणिक वर्ष की स्कूल एवं कॉलेज फीस पूरी तरह माफ करने की अपील की है।
महाराष्ट्र के 300 से अधिक तालुकों में सूखे का संकट
संजय अग्रवाल के अनुसार, उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और सरकारी घोषणाओं का हवाला देते हुए सितंबर 2026 के अंत तक महाराष्ट्र के 358 तालुकों में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित बताया गया था। अक्टूबर के मध्य तक यह संख्या बढ़कर लगभग 304 से 305 तालुकों तक पहुंचने की खबरें सामने आईं। कम बारिश के कारण राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों, खेतिहर मजदूरों और कृषि पर निर्भर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति गंभीर हो गई है।
उन्होंने कहा कि जून से 18 सितंबर 2026 के बीच राज्य में सामान्य से लगभग 18.8 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। मराठवाड़ा, विदर्भ, नासिक क्षेत्र और अन्य वर्षा-अभाव वाले इलाकों में सोयाबीन, कपास, धान, मक्का सहित विभिन्न खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है। कोंकण क्षेत्र में भी धान की खेती प्रभावित होने की बात कही गई है।
कम बारिश के कारण भूजल स्तर में गिरावट, पेयजल संकट और पशुओं के लिए चारे-पानी की कमी जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
₹1 लाख प्रति हेक्टेयर की विशेष सहायता देने की मांग
अग्रवाल ने मांग की है कि सूखा प्रभावित और फसल नुकसान प्रमाणित किसानों को ₹1,00,000 प्रति हेक्टेयर की विशेष आर्थिक सहायता दी जाए। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में समयबद्ध तरीके से जमा की जानी चाहिए।
उन्होंने फसल क्षति के पंचनामे जल्द पूरे करने और राहत वितरण में प्रशासनिक देरी रोकने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, छोटे एवं सीमांत किसानों, बटाईदारों और अन्य पात्र खेती करने वाले परिवारों को भी राहत योजना में शामिल किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, जिन गांवों और राजस्व मंडलों में फसलों को गंभीर नुकसान हुआ है, लेकिन जो शुरुआती सरकारी सूची में शामिल नहीं हो सके, उन्हें भी राहत का लाभ देने की मांग की गई है।
किसानों के बच्चों की एक साल की फीस हो माफ
संजय अग्रवाल ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों के पात्र किसानों के बच्चों की स्कूल और कॉलेज की एक शैक्षणिक वर्ष की फीस 100 प्रतिशत माफ करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट के कारण किसानों के लिए बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। फीस के बोझ से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
इस मांग के तहत सरकारी, सहायता प्राप्त और नियमानुसार पात्र निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को शामिल करने की अपील की गई है। ट्यूशन फीस, अनिवार्य शैक्षणिक शुल्क और परीक्षा शुल्क के साथ आईटीआई, पॉलिटेक्निक, स्नातक, स्नातकोत्तर तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के पात्र विद्यार्थियों को भी राहत देने की मांग की गई है।
जिन परिवारों ने पहले ही फीस जमा कर दी है, उनके लिए राशि की प्रतिपूर्ति या अगली फीस में समायोजन की व्यवस्था करने का सुझाव भी दिया गया है।
मौजूदा राहत उपायों के साथ अतिरिक्त सहायता जरूरी
अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से घोषित राहत उपायों में दिवाली से पहले ₹5,000 की अग्रिम सहायता, कृषि ऋणों का पुनर्गठन, ऋण वसूली स्थगित करना, भूमि राजस्व में छूट, कृषि पंपों के बिजली बिलों में राहत, विद्यार्थियों के परीक्षा शुल्क में छूट तथा पेयजल टैंकरों और पशुचारे की व्यवस्था जैसे कदम शामिल हैं।
उन्होंने इन उपायों का स्वागत करते हुए कहा कि किसानों की वास्तविक जरूरतों को देखते हुए पर्याप्त प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता भी आवश्यक है। ऋण पुनर्गठन और वसूली स्थगित करने से किसानों की तत्काल नकदी संबंधी समस्याएं पूरी तरह हल नहीं होतीं। अगली फसल के लिए बीज, खाद, मजदूरी और अन्य कृषि खर्चों की व्यवस्था करना भी किसानों के सामने बड़ी चुनौती है।
फसल बीमा, रबी की बुवाई और रोजगार पर भी जोर
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अग्रवाल ने फसल बीमा दावों का शीघ्र निपटारा, कृषि ऋणों पर ब्याज राहत और पारदर्शी फसल क्षति सर्वेक्षण की मांग भी की है।
इसके साथ ही सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल और पशुचारे की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने, रोजगार गारंटी के कार्यों को प्राथमिकता देने तथा रबी की बुवाई के लिए बीज और खाद पर अतिरिक्त सहायता देने की अपील की गई है।
मुख्यमंत्री से शीघ्र निर्णय लेने की अपील
संजय अग्रवाल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से किसानों और ग्रामीण विद्यार्थियों के हित में जल्द निर्णय लेने की अपील की है। उन्होंने राहत पैकेज के लिए स्पष्ट समयसीमा घोषित करने तथा मुआवजा वितरण, फसल बीमा भुगतान, पेयजल व्यवस्था, पशुचारे की उपलब्धता और शिक्षा शुल्क माफी की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
उनका कहना है कि समय पर आर्थिक सहायता मिलने से किसानों को निजी कर्ज के बढ़ते बोझ से बचाने और ग्रामीण परिवारों के बच्चों की शिक्षा जारी रखने में मदद मिल सकती है।



