Published On : Mon, Jul 7th, 2014

उमरखेड़ : नए नगराध्यक्ष का चयन बना कांग्रेस के लिए मुसीबत

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पद इस बार सर्वसाधारण महिला के लिए आरक्षित

उमरखेड़

उमरखेड़ नगर परिषद के अध्यक्ष के चुनाव की गतिविधियां तेज हो गई हैं. नगराध्यक्ष के चयन के लिए निर्धारित सीमा खत्म हो गई है और अब नगराध्यक्ष का कार्यभार तहसीलदार के पास आ गया है. नगर परिषद पर कांग्रेस का वर्चस्व होने के बावजूद नगराध्यक्ष चुनना उसके लिए आसान नहीं होगा. नए नेता का नाम सर्वसम्मति से चुनने का अधिकार कांग्रेस के गुट नेता नंदकिशोर अग्रवाल को दिया गया है. अनेक नेता अपनी उम्मीदवार को नगराध्यक्ष बनाने के लिए जुगत भिड़ाने में लगे हैं.

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उमरखेड़ नगर परिषद पर कांग्रेस का वर्चस्व
उमरखेड़ नगर परिषद के अध्यक्ष का पद इस बार सर्वसाधारण महिला के लिए आरक्षित है. 21 सदस्यीय नगर परिषद में महिलाओं की संख्या 11 है. इसमें सत्तारूढ़ दल की 7 और विपक्ष की 4 महिलाएं हैं. कांग्रेस के कुल सदस्य 12 हैं. पिछली बार नगराध्यक्ष का पद अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) के लिए था और कांग्रेस ने श्रीमती अर्चना नाईक को नगराध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया था. श्रीमती नाईक ढाई साल तक इस कुर्सी पर विराजमान रहीं.

नजर होगी विधानसभा चुनाव पर
इस दफा नगराध्यक्ष का पद सर्वसाधारण महिला के लिए आरक्षित होना ही कांग्रेस के लिए मुसीबत बन गया है. इससे गुट नेता का सिरदर्द बढ़ गया है. कांग्रेस की महिला सदस्यों में बंजारा समाज की 2, मुस्लिम 1, मराठा 2, अनुसूचित जाति 1 और धनगर-हटकर की 1 सदस्य है. विपक्ष के पास 1 मराठा, 2 मुस्लिम और अनुसूचित जाति की 1 सदस्य है. कांग्रेस को जो भी निर्णय लेना होगा वह आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ही लेना होगा. नगराध्यक्ष की कुर्सी पर बिठाने का दायित्व गुट नेता नंदकिशोर अग्रवाल पर है. नागरिकों की नजर इसी पर टिकी हैं कि उमरखेड़ नगर परिषद का नया अध्यक्ष कौन बनता है.

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