अमरावती
स्थानीय इतवारा बाजार के होलसेल फल मार्केट में बुधवार को तड़के लगभग 4 बजे अचानक लगी भीषण आग से करीब 48 दुकानें जल कर राख हो गईं. इस आग से लाखों रुपए के नुकसान का अनुमान है. यह आग तड़के लगने के कारण वहां कोई जनहानि नहीं हुई. इतवारा बाजार का यह चौथा अग्निकांड है. इससे पूर्व 1992, 1999 और 2010 में यहां ऐसा ही भीषण अग्निकांड हुआ था. 2010 में पटाखा दुकान में आग लगने से दो बच्चों सहित तीन लोगों को मौत हो गई थी.
इतवारा बाजार के मुर्गी गली में फल का होलसेल मार्केट है. इस मार्केट में बुधवार को तड़के 4 बजे के दौरान अचानक लगी आग ने कुछ ही समय में ही भीषण रूप धारण कर लिया. तेजी से चारों तरफ बढ़ती आग एक के बाद एक मार्केट की दुकानों को अपने चपेट में लेने लगी. इसकी जानकारी सुबह भ्रमण पर निकले नागरिकों ने तत्काल कोतवाली पुलिस को दी.
थानेदार विजय सालुंखे अपने दल के साथ तत्काल घटनास्थल आ पहुंचे. फायर ब्रिगेड को भी घटनास्थल पर बुलाया गया. लेकिन तब तक आग उग्र हो चुका था.
1 घंटा देरी से पहुंची फायर ब्रिगेड की गाड़ियां
व्यापारियों ने बताया कि उन्होंने तत्काल फायर ब्रिगेड को घटना की जानकारी दी थी. लेकिन इसे फायर ब्रिगेड कर्मियों ने मजाक में लिया और चालक उपलब्ध होने का कारण बता दिया. जब कुछ नाराज व्यापारी फायर ब्रिगेड के वालकट कम्पाउंड स्थित कार्यालय पहुंचे तब उनकी आंखें खुलीं और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घटनास्थल पर करीब 1 घंटा देरी से पहुंची.
अग्निकांड की जानकारी मिलते ही सारे व्यापारी भी नींद से जाग कर घटनास्थल पर इकट्ठे हो गए. सुबह के समय इतवारा बाजार परिसर में नागरिकों की भारी भीड़ जमा हो गई. फायर ब्रिगेड की 18 दमकल गाड़ियों ने तीन से चार घंटे के अथक प्रयासों के बाद आग को काबू में किया. लेकिन तब तक इस आग से मार्केट की 48 दुकानें जल कर राख हो गईं.
इतवारा बाजार का यह चौथा अग्निकांड
इतवार बाजार परिसर में भीषण आग की यह चौथी घटना है. इसके पूर्व वर्ष 1992 में लगी भीषण आग के कारण पूरा इतवारा बाजार जल कर राख हो गया था. उसी की एक तरह से पुनरावृत्ति बुधवार को देखने मिली. 1992 में दोपहर के समय आग लगी थी और उस वक्त अमरावती की तत्कालीन डीवायएसपी मेरी फर्नांडिस ने आग को काबू में करने के लिए दमकल कर्मियों के साथ अथक प्रयास किए थे.
इसके पश्चात 1999 और 2010 में भी इस बाजार में भीषण अग्निकांड हुआ था. वर्ष 2010 में पटाखा दुकान को आग लगने से दो बच्चों सहित तीन लोगों को मौत हुई थी. लेकिन बुधवार को यह भीषण आग तड़के लगने से भारी अनर्थ टल गया.
जिन 48 व्यापारियों की दुकान जल कर राख हो गईं, उनमें सैयद नवाब सैयद हसन, अब्दुल रहीम अब्दुल रशीद, शेख अकील शेख जमील, वाजाद अब्दुल सादिक, सलीम खां गफ्फार खां, अब्दुल सलीम अब्दुल करीम, मोबीन खां मजीद खां, शेख मजीद शेख बशीर, शेख रियाज मोहम्मद सिराज, नासार खां कारेम खां, कारेम खान रहीम खान, हाकेमुद्दीन समशोद्दीन, मोहम्मद यूनुस, शेख इलियास सैयद आमद, सैयद अय्याज सैयद अफसर, शाहब असलम शेख हसन, सैयद मकसूद सैयद मेहबूब, शेख जब्बार बाबखान, शेख मेहबूब शेख बाबा, अब्दुल जाकीर अब्दुल नबी, सैयद मोबीन सैयद मेहबूब, अब्दुल समीर अब्दुल जावेद, शेख रोशन शेख हसन का समावेश है.
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