Published On : Sat, Sep 9th, 2017

सिविल लाइन्स में गड्ढे, युवक कॉंग्रेसियों ने लगाए पौधे

नागपुर: एक ओर जहां सिटी को स्मार्ट बनाने की मुहिम चलाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर सड़कों की हालत बदतर होती जा रही है. कहीं सड़क गड्ढों से भर गई है तो कहीं गटर के ढक्कन खुले हुए हैं. मामूली बारिश में सड़कें लबालब हो जाती हैं. इस हालत में गड्ढे जानलेवा बन जाते हैं. सिविल लाइन्स जैसे पॉश इलाके में खुले गटर के ढक्कन और गड्ढे कहर ढा रहे है. शुक्रवार को कांग्रेस की ओर से गड्ढों में पेड़ लगाकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर विरोध प्रकट किया गया. सिविल लाइन्स स्थित बोर्ड आफिस चौक के पास सड़क पर गड्ढे हो गये हैं. इस जगह पर पिछले 15 दिनों से बैरिकेट लगाए गये हैं, लेकिन सुधार की दिशा में ध्यान नहीं दिया जा रहा है. यही वजह है कि लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है. शुक्रवार की दोपहर को गटर के ढक्कन पर बाइक सवार गिर पड़ा. उसे गंभीर चोट भी आई. इस घटना के विरोध में कांग्रेस की ओर से तीव्र आंदोलन करते हुए आक्रोश जताया गया. सिविल लाइन्स परिसर में पहले से ही वाहनों की भीड़ रहती है. सुबह और शाम के वक्त सड़क पर लंबी कतारें लगी रहती हैं. इस हालत में गड्ढे और खुले ढक्कन वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा रहे हैं. आंदोलन में युगल विदावत, आनंद तिवारी, कांग्रेस प्रवक्ता धीरज पांडे, आसिफ अंसारी, आलोक मुन, सतीश पाली, निखिल पवार, तुषार ढोंबर, शुभम बक्सरे, राहुल चौधरी, दीपक शिवणकर, राकेश गुप्ता, सचिन तिवारी आदि उपस्थित थे.

सिविल लाइन्स के अलावा शहर के अन्य भागों में भी गड्ढों की भरमार हो गई है. कई जगह पर सीमेंट रोड का कार्य चल रहा है. हालांकि नागरिकों द्वारा सहयोग किया जाता रहा है लेकिन अब जनता त्रस्त हो गई है. जगह-जगह मिट्टी के ढेर बना दिये हैं. केबल लाइन के लिए एक बार खोदा गया फुटपाथ दोबारा दुरुस्त होने में महीनों लग जाते हैं. चौराहों पर भी गड्ढे मिल जाएंगे. पिछले दिनों पालकमंत्री ने गणेश विसर्जन के दौरान सड़कों पर गड्ढे बुझाने के निर्देश दिये थे. इसके बाद कुछ जगह गड्ढे बुझाने के नाम पर रेती और गिट्टी डाल कर रख दी गई. अब यह गिट्टी वाहन चालकों को लहूलुहान कर रही है. रात के वक्त स्ट्रीट लाइट बंद रहने पर गड्ढे नजर नहीं आते. प्रशासन द्वारा जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए. आखिर गड्ढों में गिरकर जख्मी होने वालों की जिम्मेदारी कौन लेगा. मनपा प्रशासन सहित अन्य संबंधित विभागों की लापरवाह कार्यप्रणाली पर लगाम कसना आवश्यक हो गया है.