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    Published On : Thu, May 29th, 2014
    Vidarbha Today | By Nagpur Today Vidarbha Today

    राजुरा : तेंदूपत्ता संकलन करने वाले मजदूरो की हालत दयनीय ; उद्योगपति हो रहे आमिर


    राजुरा

    Tendupatta
    विदर्भ में तेंदूपत्ता संकलन करनेवाले हजारों मजूरों का शोषण करके बीड़ी व्यापारियों ने अपने बड़े बड़े बंगले बनाए है. लेकिन खून पसीना एक करनेवाले आज भी गरीबी का जीवन जीने को मजबूर है. विदर्भ में गोंदिया, भंडारा, चंद्रपूर, गडचिरोली जिले में और आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने में बिड़ी बनाने के लिए लगनेवाला तेंदूपत्ता संकलन का काम हजारों मजूर करते है.

    तेंदूपत्ता व्यवसाय में उद्योगपति करोड़पति हो गए है. वही तेंदू संकलन का काम करनेवाले तेंदूपत्ता मजदूर आज भी भूखे रह रहे है. यह तेंदूपत्ता मजदूरों पर अन्याय है, अन्याय से लड़ने के लिए एकभी नेतृत्व आगे आते नहीं दिख रहे. गडचिरोली, चंद्रपुर, गोंदिया जिले में तेंदूपत्ता मजदूरों पर होनेवाले अन्याय के खिलाफ लडाई आक्रमक करने पर उनके काम का मुआवजा नहीं मिलने की बात पता चली है. वन में रहने वाला आदिवासी, वन अधिकारीयों की उपेक्षा का शिकार है. चंद्रपूर जिले में तेंदूपत्ता ठेकेदारों को ध्यान में रखते हुए आदिवासियों को न्याय देने का प्रयत्न करनेवाली अनेक संघटनाए आदिवासीबहुल क्षेत्र में लोकप्रिय हुई. आज भी बीडी उत्पादन कर्मियों को मिलनेवाली मजदूरी की तुलना में तेंदुपत्ता जमा करनेवाले मजदूरों को मिलनेवाली मजदूरी बहुत कम है.

    तेंदूपत्ता ठेकेदार व बीडी उद्योगपति कई सालों से तेंदुपत्तो की ख़रीद कर रहे है. विदर्भ के भरोसे पर बीड़ी उद्योग बड़ा हुआ है. परंतु मजूरों की आर्थिक स्थिति ख़राब हुई है. विदर्भ में कच्चा माल बेचा जा रहा है. इस वजह से विदर्भ में ही बीड़ी उद्योग शुरू होने से बड़े रोजगार केंद्र बन सकते है. परंतु अभी तक ऐसा नहीं हुआ है. तेंदूपत्ते की वजह से सरकार व ठेकदारों को बड़ा फायदा हो रहा है फिर भी मजदूरों की हालत दयनीय है. नक्सलग्रस्त विभाग के तेंदूपत्ता मजदूर रोटी के लिए दरदर भटक रहे है. पूरे घटकों की बिक्री न होने से घटक बिक्री किये ठेकेदार को 50 प्रतिशत तेंदूपत्ता खरेदी करने की सहुलियत जाहिर की है. गत दस साल में विदर्भ के तेंदूपत्ता घटक खरेदी करनेवाला ठेकेदार और मजदूरों की हालत के बारे में विचार किए जानेपर मजदूरों की आर्थिक स्थिति नहीं बदली. लेकिन ठेकेदार करोड़पति हो गए है. भूखे रहकर तेंदूपत्ता संकलन करनेवाले मजूरों के नसीब में पूरी रोटी कब मिलेगी, इसकी प्रतीक्षा है.

     

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