Published On : Fri, Jun 13th, 2014

मूल : गांव के गांव प्यासे हैं मूल तालुका में


पीने के पानी के लिए दर-दर भटकते हैं लोग


मूल

(गुरु गुरनुले)

मूल तालुका के आधे दर्जन से अधिक गांवों में लोगों के कंठ सूखे हुए हैं. नलों ने बहना बंद कर दिया है, कुएं सूख गए हैं और बोरवेल रोज ग्रामीणों का इम्तहान ले रहे हैं. तालुका में तापमान के ज्यादा होने की वजह से सर्वसामान्य लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है. तालुका के अनेक गांव पीने के पानी के संकट से जूझ रहे हैं.

कैसे बुझाएं मवेशियों की प्यास
पंचायत समिति सदस्य संगीता पेंदाम ने जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता तथा उपअभियंता सिंदेवाही से की शिकायत में कहा है कि ताडाला, हलदी, येरगांव, पीपरीदीक्षित, चकघोसरी, दहेगांव और मनकापुर में कई दिनों से नियमित पानी आपूर्ति नहीं होने से नागरिकों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड रहा है. गांव के कुओं में, बोरवेल में पानी ज्यादा गहराई में होने से नागरिकों के सामने यह यक्षप्रश्न है कि मवेशिओं को पानी कैसे पिलाया जाए. इन गांवों में प्रादेशिक नल योजना है, परंतु पानी आपूर्ति विभाग का विनियोजन नहीं होने से नलों से गत एक माह से पानी नियमित नहीं आ रहा है.

बीस साल से नहीं पहुंचा पानी
पीपरीदीक्षित गांव की समस्या थोड़ी अलग है. गत छह माह से आधे गांव को ही पानी मिल रहा है तथा आधा गांव अभी तक पानी से वंचित है. इसी तरह चेकघोसरी गांव में तो गत 20 साल से पानी आपूर्ति विभाग का पानी नहीं पहुंचा है. गांव के लोग किसी तरह अपनी प्यास बुझा रहे हैं. प्रदेशिक पानी आपूर्ति योजना में आपसी तालमेल के अभाव में मुश्किलें दिन ब दिन बढ़ती जा रही हैं.

जरा विचार करें
सुश्री पेंदाम ने कहा है कि प्रदेशिक पानी आपूर्ति चंद्रपुर व ग्रामीण पानी आपूर्ति सिंदेवाही के उपविभागीय अभियंता को विचार करना होगा कि प्रादेशिक नल योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की जनता को नियमित जलापूर्ति कैसे की जाए. इसी तरह उन्होंने इस क्षेत्र के विधायक और सांसद से भी पीने के पानी के तरफ तुरंत ध्यान देने की मांग की है.

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