Published On : Fri, Jul 4th, 2014

नागपुर : अब आखरी दम तक नहीं छोड़ुंगा भाजपा का दामन

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विदर्भ के वरिष्ठ नेता दत्ता मेघे से खास बातचीत

नागपुर

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विदर्भ के वरिष्ठ नेता दत्ता मेघे 5 जुलाई को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो रहे हैं. उनके दोनों पुत्र सागर और समीर के साथ ही उनके हजारों कार्यकर्ता भी उन्हीं के साथ भाजपावासी होंगे. आखिर क्या कारण था कि उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का फैसला किया? और छोड़ा भी तो भाजपा में ही शामिल होने का फैसला क्यों ? ऐसे अनेक सवाल थे जिनके जवाब इस खास बातचीत में आपको मिलेंगे.

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प्रश्न : आपने अचानक कांग्रेस छोड़ने का फैसला आखिर क्यों किया?
उत्तर : देखिए, पिछले 35 सालों से मैं राजनीति में हूं. इस बीच मैंने विभिन्न पदों को विभूषित किया है. परंतु पिछले 5 सालों के दौरान सांसद होने के बावजूद कांग्रेस में मुझे जो अपमान झेलना पड़ा, वैसा अब तक कहीं नहीं हुआ था. मेरी ही पार्टी में मुझे बोलने का मौका नहीं दिया जाता था. मैं एक जननेता हूं. लोगों की मुश्किलों को, उनकी कठिनाइयों को दूर करना, उनकी समस्याओं को हल करना मुझे अच्छा लगता है. नागरिकों की मदद के लिए दौड़कर जाना मुझे अच्छा लगता है. लेकिन, हालत यह थी कि सांसद होने के बावजूद मैं लोगों की समस्याओं को हल नहीं कर सकता था. जनप्रतिनिधि होने के नाते मुझे जो विकास-कार्य करने चाहिए थे वह भी मैं नहीं कर सका. इसका एकमात्र कारण यह था कि मुझे स्थानीय और प्रदेश स्तर पर भी नेताओं का सहयोग नहीं मिलता था. पार्टी के नेता ही मुझे रोकते थे. मेरे काम में बाधा डालते थे. गरीब, मेहनतकश जनता की समस्याएं लेकर सरकार के पास गया. पार्टी के पास गया. बार-बार अपील की, आवेदन किया, मगर मेरी मांगों पर किसी प्रकार की कोई सुनवाई नहीं हुई. कांग्रेस में कार्यकर्ताओं का मान-सन्मान होता नहीं दिख रहा था. इन सारी बातों से परेशान होकर ही मैंने कांग्रेस पार्टी को छोड़ने का निर्णय लिया. अचानक नहीं, बल्कि सारी बातों पर विचार करने के बाद लिया गया यह निर्णय है.

प्रश्न : लेकिन, भाजपा में ही शामिल होने का फैसला क्यों ?
उत्तर : देखिए, आज देश की राजनीतिक स्थिति बदल चुकी है. आम जनता को भरोसा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का सर्वांगीण विकास होगा. लोगों को विश्वास है कि गरीबों के हितों में काम होंगे और निचले तबके के लोगों तक विकास की गंगा पहुंचेगी. मैं भी तो लोगों से अलग नहीं हूं. मुझे भी लगता है कि मोदी साहब के नेतृत्व में देश के सुजलाम सुफलाम होने का सपना पूरा होगा. उसी तरह मैं मानता  हूं कि पृथक विदर्भ राज्य बनना चाहिए. और मुझे पूरा विश्वास है कि भारतीय जनता पार्टी अलग विदर्भ राज्य का निर्णय लेगी. इसीलिए मैंने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का फैसला किया.

प्रश्न : क्या भाजपा में आप नेतृत्व स्वीकार करेंगे ?
उत्तर : दरअसल, भाजपा में मैं किसी अपेक्षा अथवा किसी पद की लालसा से शामिल नहीं हो रहा हूं. बल्कि चाहता हूं कि जनहित के काम किए जा सकें. बस, इसीलिए बिना किसी शर्त अथवा बिना किसी मांग के भाजपा से जुड रहा हूं. मैं एक कार्यकर्ता के रूप में भाजपा का हिस्सा बन रहा हूं. मुझे भविष्य में पार्टी जो भी काम सौंपेगी, वह पूर्ण करूंगा.
उसी तरह मैंने अब अंत तक भाजपा में ही रहने का निर्णय लिया है. मैं पार्टी के अनुशासन में रहकर काम करूंगा. अब वर्धा जिले की राजनीति में सक्रिय नहीं रहूंगा, लेकिन वर्धा जिले में जनहित के जो काम चल रहे हैं, वे वैसे ही चलेंगे. मैंने तय किया है कि अब मैं राजनीति नागपुर शहर में रहकर ही करूंगा.

प्रश्न : भाजपा नेतृत्व के बारे में क्या विचार है?
उत्तर : वर्तमान केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी मेरे अच्छे मित्र हैं. उनका और मेरा बरसों पुराना करीबी संबंध है. वे अपनी बात के बड़े पक्के हैं. मित्रता निभाने वाले हैं. गंभीर प्रशासक होने के बावजूद गरीब व्यक्ति का दु:ख वे समझते हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि उनके नेतृत्व में भाजपा में मेरे साथ और मेरे कार्यकर्ताओं के साथ भी सम्मानजनक व्यवहार होगा. मैं उन्हें ‘विकास-पुरुष’ के रूप में भी जानता हूं. उन्होंने जो विकास-कार्य किए हैं उसका फल आज तक विदर्भ की जनता चख रही है. इसलिए उनके नेतृत्व पर मुझे पूरा विश्वास है. विश्वास यह भी है कि कांग्रेस नेतृत्व ने मेरे साथ जो खराब व्यवहार किया, वैसा व्यवहार तो मुझे इस पार्टी में नहीं मिलेगा.

प्रश्न : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में क्या सोचते हैं?
उत्तर : देखिए, हमारे देश में इतना लोकाभिमुख प्रधानमंत्री इसके पहले कभी नहीं हुआ है. उन्होंने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए जो निर्णय लिए हैं वे विकासात्मक रहे हैं. वे नए आयुधों का इस्तेमाल करते हैं. युवा वर्ग में वे खासे लोकप्रिय हैं. चाहे कोई भी उन्हें ई-मेल करे, उसका जवाब देते हैं. उन पर देश के सभी राज्यों की जनता ने भरोसा जताया है. देश में खिचड़ी सरकार होने के बावजूद उनके नेतृत्व में भाजपा को इतनी बड़ी सफलता मिली है. इसलिए लगता है कि देश में उनके नेतृत्व में बेहतर विकास होगा.

प्रश्न : आप पहले कांग्रेस में थे. फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस में और बाद में दोबारा कांग्रेस में आए. यह सफर कैसा रहा?
उत्तर : सच कहूं तो मैं इस सफर से संतुष्ट नहीं हूं. शरद पवार के साथ अनेक वर्ष मैंने राजनीति की. उनका मुझ पर बहुत अधिक विश्वास भी था. लेकिन, राजनीति के ही मेरे कुछ करीबी लोगों ने उनके मन में मेरे बारे में गलत जानकारियां पहुंचार्इं. लोगों ने मुझ में राजनीतिक दोष निकालना शुरू कर दिया, जो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा. यह मुझे पसंद नहीं था. इसलिए मैंने उस समय राकांपा छोड़ने का निर्णय लिया था. कांग्रेस में मेरा प्रवेश सोनिया गांधी के नेतृत्व में हुआ था. उन्होंने पार्टी में मेरे साथ अच्छा व्यवहार भी किया. लेकिन, स्थानीय नेताओं और प्रदेश स्तर पर मुझे अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा. मैं राष्ट्रवादी कांग्रेस से आया था. नितीन गडकरी से मेरी मित्रता थी. इसलिए कांग्रेस में मेरी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया. मुझे साधारण बैठक में भी नहीं बोलने दिया जाता था. इसी कारण मैंने कांग्रेस छोड़ने का निर्णय लिया. अब आगे भाजपा में ही रहकर बेहतर काम करने का फैसला मैंने किया है.

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