Published On : Tue, May 6th, 2014

नवरगांव : सुविधाओं को तरसता, विकास से कोसों दूर नवरगांव


दो-दो बांधों के क्षेत्र में, मगर सिंचाई के लिए पानी तक नहीं


नवरगांव 

कहने को नवरगांव सिंदेवाही तालुके का सबसे बड़ा गांव है, लेकिन विकास से कोसों दूर है और मूलभूत सुविधाओँ के लिए भी तरस रहा है. गोसेखुर्द बांध की नहर और हुमन प्रकल्प का काम लंबित होने के कारण सिंचाई सुविधा से किसान वंचित हैं. न कोई उद्योग-धंधा और न कोई कारखाना. परिणाम, सुशिक्षित बेरोजगार गलत रास्तों की तरफ़ बढ़ रहे हैं. गांव में एक पुलिस चौकी भी है, मगर इतने पुलिसकर्मी नहीं है कि अवैध धंधों पर लगाम लगा सकें.

हर साल प्रकृति की मार
15 हजार की आबादी वाले नवरगांव के आसपास 20 से 25 छोटे गांव हैं. खेती मुख्य व्यवसाय है, मगर हर साल प्रकृति की मार ने किसानों को तोडकर रख दिया है. पिछले साल अच्छी बारिश के कारण धान की फसल भी अच्छी रही थी, मगर अंतिम दौर में फसलों को कीड़े लग गए, जिससे दवाइयों का खर्च बढ़ गया. एक तरफ तो सरकार धान को गारंटी मूल्य देने को तैयार नहीं है, दूसरी ओर दो फसलें लेने लायक सिंचाई क़ी सुविधा तक नहीं है.

पानी नहीं, दारू जितनी चाहो मिलेगी
गोसेखुर्द की नहर इस इलाके से गुजरती तो है, मगर उसका पानी इस क्षेत्र के किसानों को मिलेगा ही, इसकी कोई गारंटी नहीं है. कुछ किसान नहर में जमीन जाने से भूमिहीन हो गए हैं, तो अनेक को अब तक अपनी जमीन का मुआवजा तक नहीं मिला है. इस क्षेत्र की मुख्य फसल धान की है. मौसम की गड़बड़ी ने रबी की फसल के तो बारह बजा दिए. इससे किसान टूट गया है. गांव में कोई उद्योग नहीं है. बेरोजगारी बढ़ रही है. कुछ युवा शहरों में पलायन कर चुके हैं तो कुछ गलत रास्तों पर चल निकले हैं. गांव में दो देशी दारू क़ी दुकन, 5 वाइन बार, 2 बियर शॉपी हैं. इसके अलावा अवैध धंधे अलग हैं. गांव में एक पुलिस चौकी भी है. 18 गांवों का जिम्मा है. ऐसे में पुलिसकर्मी क्या अवैध धंधों को देेखें और क्या कानून-व्यवस्था को संभालें.

तालुका बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी
नवरगांव को तालुका का दर्जा देने की मांग बहुत पुरानी है. तालुका मुख्यालय की दूरी यहां से 20-25 किलोमीटर है. छोटे-मोटे काम के लिए भी वहां जाना पड़ता है. इससे पैसा, समय और ऊर्जा का अपव्यय होता है. नवरगांव को तालुका बनाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है. जब हर क्षेत्र में हालत ख़राब हो तो एसटी बस के मामले में कैसे अच्छी हो सकती है. नागभीड़ – ब्रम्हपुरी मार्ग पर बसों की कमी का ख़ामियाजा 40 से 50 हजार ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है. समस्याओं के भंवर में फंसे नवरगांव की तरफ जनप्रतिनिधियों की नजर कब पड़ेगी ? ग्रामीण इसी सोच में डूबे हैं.

File Pic

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