Published On : Tue, Feb 18th, 2014

देवरी की मृतदेह को सरणा पर जाने के लिए लेनी पड़ती है वनविभाग की अनुमती

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* वनविभाग शववाहिनी की व्यवस्था करे

Representation Pic

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हालही में महराष्ट्र सरकार  ने देवरी तालुके का पूरा जंगल व्याप्त भूभाग वन्य प्राणियो के लिए आरक्षित कर दिया है.  इसके परिणाम स्वरुप, अब तालुके में अंतिमसंस्कार करना मुश्किल हो गया है. अंतिमसंस्कार में इस्तमाल होनेवाले लकडियो का आवंटन  नहीं होने के वजह से नागरिको में असंतोष और रोष उभरकर आ रहा है। इस आरक्षण से वनविभाग की मनमर्जी और  मानवी जिवन मुल्य से ज्यादा वन प्राणीयों का संरक्षण महत्वपुर्ण है ऐसा नज़र आ रहा है।

गौरतलब  है की सरकार  ने १ जनवरी  २०१४ से देवरी तालुके की लगभग सभी जंगलो को वन्यप्राणियो के लिए आरक्षित किया है। इस लिए विभाग ने पुरी तरह वन की कटाई बंद कर दी है। नागरिक, वन की कटाई न करे, इस लिए एल. पी. जी. गॅस के कनेक्शन ७५ % अनुदान पर बाटे गए । इस गॅस कि वजह से रसोई के लिए लकड़िया ईस्तेमाल बंद भी कर दिया तो शववहन के लिए लकड़िया लाए तो लाए कहा से, ऐसा प्रश्न नागरिको के सामने खड़ा हो गया है । आज कि परिस्थिति में देवरी के नागरिको कों देह संस्कार के लिए लकड़ियो के लिए काफी मशक्कत करनी पड रही है। इस सभी परेशानी की तरफ किसी भी लोकप्रतिनिधी का ध्यान नही है ऐसा प्रतीत हो रहा है। इस संबंध में, ग्रामपंचायत ने लकड़िया उपलब्ध कराने के लिए वनविभाग को समय – समय पर पत्र लिखकर ध्यान आकर्षित करने कि कोशिश की. लेकिन जमनापुर मिल में जलाने के लिए लकड़िया उपलब्ध होने के बावजूद भी देवरी में शव दहन के लिए लकड़िया दूभर हो गया।

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इस संदर्भ में उप वनरक्षक रामाराव से दूरध्वनी पे संपर्क किये जाने पर जमनापुर इलाके कि लकड़िया, देवरी इलाके में भेजी जायेगी आश्वासन उन्होने दिया। लेकिन अधिनस्त कर्मचारी इस आदेश का कितना पालन करेंगे ये बताना मुश्किल है. मृतदेह की अवहेलना रोकनेके लिए कोई कड़े कदम नहीं उठाये जा रहे है ऐसा आरोप नागरिको कि और लगाया जा रह है साथ ही वही ग्रामपंचायत को शववाहिनि उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।

 

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