Published On : Fri, Aug 8th, 2014

चिमुर : अंतत: मुख्याध्यापिका को न्याय मिला


महाराष्ट्र पुरोगामी शिक्षक समिति के प्रयास हुए सफल


चिमुर

पंचायत समिति चिमुर के अंतर्गत कार्यरत जिला परिषद उच्च प्राथमिक शाला खांबाडा की मुख्याध्यापिका के साथ हुए अन्याय को दूर करने में महाराष्ट्र पुरोगामी शिक्षक समिति को अंतत: सफलता मिल गई है. इस तरह मुख्याध्यापिका सुनंदा मोहोड को भी न्याय मिल गया है.

जि.प. सदस्य की दादागीरी
दरअसल, स्कूल में किचन शेड का काम मंजूर होने के बाद उक्त काम गांव के ही एक ठेकेदार को दिया गया था. मगर एक जिला परिषद सदस्य को यह पसंद नहीं आया और वह उसे परेशान करने लगा. इसमें स्कूल के कुछ शिक्षकों ने भी उस सदस्य का साथ दिया. सदस्य को स्कूल की गोपनीय जानकारी दी जाने लगी. मगर जि. प. सदस्य का उद्देश्य सफल नहीं होने के कारण तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी पर दबाव डालकर स्कूल की उच्चश्रेणी मुख्याध्यापिका सुनंदा मोहोड का तबादला करवा दिया गया.

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अपील से कोर्ट तक का सफर
तबादला नियमों के विरुद्ध होने के कारण मुख्याध्यापिका ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी से अपील कर तबादला रद्द करने की मांग की. परंतु मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अपील को खारिज कर दिया. मुख्याध्यापिका सुनंदा मोहोड ने इस आदेश के खिलाफ अदालत पहुंच गर्इं और वहां से स्टे ले लिया. मगर इस स्टे को वरिष्ठ अधिकारियों ने कचरे की टोकरी दिखा दी. इस पर सुनंदा मोहोड ने कोर्ट की अवमानना याचिका दाखिल की. इसमें 15 दिनों की अवधि दी गई थी. कोर्ट ने तबादला आदेश रद्द मोहोड़ को दोबारा काम पर लौटने का आदेश दिया.

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जांच-पड़ताल के बाद आरोपमुक्त
इस आदेश से गुस्साए अधिकारियों ने सुनंदा मोहोड को निलंबित कर दिया. उनके खिलाफ विभागीय कार्यालय नागपुर में जांच-पड़ताल शुरू हुई. मगर उन पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हो पाए और जांच समिति ने उन्हें आरोपमुक्त कर दिया. मुख्याध्यापिका मोहोड को महाराष्ट्र पुरोगामी शिक्षक समिति के पदाधिकारी एन.जी. तुरके, एन. आर. कांबले, बी.जी. भोगेकर, दीपक वर्हेकर, ता. रा. दडमल, वी. एन. मुरकुटे ने सहयोग दिया. समिति का सर्वत्र अभिनंदन किया जा रहा है.

Representational Pic

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