विहिरगांव का तालाब हुआ अतिक्रमण का शिकार
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अंग्रेजों के जमाने में किसानों के लिए सिंचाई सुविधा की दृष्टि से विहिरगांव में बनाया गया तालाब अतिक्रमण का शिकार हो गया है, जिससे पानी का क्षेत्र निरंतर कम होता जा रहा है. बावजूद इसके सिंचाई विभाग का ध्यान इस तरफ नहीं है.
वर्ष 1920 के दौरान 52.39 एकड़ क्षेत्र में फैले तालाब के कालांतर में दो भाग कर दिए गए थे. इनके सर्वे क्रमांक 53़/1 और 53/2 थे. इसमें से एक भाग को झुड़पी-जंगल के रूप में दर्ज किया गया. बाद में इसका फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने इस जमीन पर खेती भी शुरू कर दी. इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने यह जमीन भी बेच दी. भूमाफिया ने इस जमीन को अपनी जमीन मानते हुए उस पर लेआउट बनाकर बेच दिया. इस तरह तालाब का क्षेत्रफल घटकर 50 एकड़ रह गया है. तालाब छोटा हो गया है तो उसका पानी भी कम हो गया है. इसका सीधा असर सिंचाई पर पड़ रहा है. किसानों की आय पर पड़ रहा है. लेकिन सिंचाई विभाग आंखें मूंदे बैठा हुआ है. इलाके में सिंचाई की सुविधा नहीं है. और तालाब अतिक्रमण का शिकार हो गया है. प्रशासन भी तालाब की जगह पर मकान बनाने की अनुमति दे रहा है. बारिश के मौसम में तालाब के किनारे बनाए गए झोपड़ों को नुकसान भी हो सकता है. किसाानों ने तालाब को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराने और तालाब को किसानों के लिए फिर से मुहैया कराने की मांग की है.
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