Published On : Thu, Mar 12th, 2015

अकोला : जिप के मिनी मार्केट की 9 दुकानें होगी सील

 

  • जूतों का ठेका देने को लेकर होगी पड़ताल
  • आंगनवाडियों के रिक्त पद भरने पर जोर
  • जिप शालाओें में घरेलू बिजली दरों से बिल देने का प्रस्ताव

Akola ZP
अकोला। अकोला जिला परिषद के राजर्षी छत्रपति शाहू महाराज सभागृह में बुधवार दोपहर 1 बजे स्थायी समिति की सभा का आयोजन किया गया, जो डेढ घंटा देरी से शुरू हुई. इस बीच जिप सदस्य चंद्रशेखर पांडे ने शिक्षा विभाग पर निशाना साधा. उन्होंने पातूर तहसील के बाभुलगांव स्थित शाला के केंद्र प्रमुख द्वारा दिए गए गलत ब्यौरे पर सवाल उठाए और इस संदर्भ क्या कार्रवाई की गई इसको लेकर संबंधित अधिकारियों को आडे हाथ लिया. इसी प्रकार पातूर समिति में सहायक शिक्षक ने अपना राज जमाकर विस्तार अधिकारी का प्रभार संभाला था. इस कारनामे को अंजाम देनेवाले संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई ऐसा सवाल भी उपस्थित किया गया. इस संदर्भ में शिक्षा विभाग के अधिकारी जवाब देने में नाकाम रहें.

जूते के ठेके में क्या है राज?
सर्वसाधारण सभा में जिप सदस्य चंद्रशेखर पांडे के कडे विरोध के बावजूद सत्तादल ने जिप शालाओं में छात्रों को जूते आपूर्ति करने के लिए विवादित ठेकेदार को ठेका देने का प्रस्ताव मंजूर करवाया था. इसके बाद  शिक्षा समिति की सभा में भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. इस प्रकार विवादित ठेकेदार को ठेका देने के पीछे क्या राज है? ऐसा सवाल जिप सदस्य पांडे ने आज उठाया. उन्होंने कहा कि संत रविदास  महाराज मंडल को जिप शालाओं के छात्रों को जूते आपूर्ति का ठेका पूर्व में दिया गया था. इस बीच संबंधित ठेकेदार पर भ्रष्टाचार के आरोप हुए, साथ ही सैम्पलों की जांच किए बिना शिक्षा विभाग ने ठेकेदार के बिल भी निकाल दिए. ऐसे विवादित ठेकेदार को ठेका देने को लेकर सत्ताधारी क्यों अडे हुए हैं यह समझ से परे हैं. इस ठेका देने के प्रस्ताव को स्थगित कर दूसरे ठेकेदार को ठेका देने की मांग भी सभागृह में जोर  पकडने लगी थी, लेकिन जिप अध्यक्ष तथा स्थायी समिति सभापति इससे सहमत होते नहीं दिख रहे थे. इस पर विरोधी दल के स्थायी समिति सदस्यों ने पूरजोर प्रस्ताव स्थगित करने की मांग की. अंतत: इस  ठेके को लेकर पडताल होने तक प्रस्ताव को स्थगित करने के निर्देश दिए गए.

घरकुल के अनुदान को लेकर चर्चा
अकोला जिला परिषद अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में सन 2012-13 के लिए कुछ घरकुलों को सन 2014 में मंजुरी दी गई, लेकिन उक्त लाभार्थियों को शासन निर्णय अनुसार बढाया गया अनुदान नहीं दिया गया. शासन ने सन 2014 में घरकुल अनुदान 70 हजार से बढाकर 1 लाख रूपए कर दिया है. इस पर सभागृह में चर्चा की गई, जिसमें अतिरिक्त सीईओ ने बताया कि उक्त घरकुल लाभार्थियों को भी 1 लाख रूपये अनुदान ही दिया जाए इसका प्रस्ताव शासन की ओर भेजा गया है.

शालाओं में घरेलू बिजली दरों से मिले बिल
अकोला जिला परिषद की शालाओं में व्यवसायी बिजली दरों से बिजली बिल आंका जाता है. इस कारण मोटी रकम का बिजली भरना संबंधित शाला प्रशासन के लिए संभव नहीं होता, जिससे कई शालाओं के बिजली कनेक्शन भी कटे हुए हैं. इस समस्या को देखते हुए  शालाओं में घरेलू बिजली दरें लागू की जाए, ऐसी मांग सभागृह में जिप सदस्या शोभा शेलके ने रखी. इस संदर्भ में प्रस्ताव लेकर शासन को भेजने का निर्णय लिया गया.

आंगनवाडी सुपरवाईजर के 49 पदों में से 22 पद रिक्त है
जिले की आंगनवाडियों में कर्मचारियों के कई पद रिक्त होने से कार्यरत कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पडता है. आंगनवाडी सुपरवाईजर के 49 पदों में से 22 पद रिक्त है. इसी प्रकार आंगनवाडी सेविका, सहायिकाओं के भी पद रिक्त है. यह पद क्यों नहीं भरे जा रहे और इसके लिए अब तक कदम क्यों नहीं उठाए गए? इसको लेकर संबंधित अधिकारी को आडे हाथों लिया गया. इस पर महिला व बाल कल्याण विभाग के उपमुख्य कार्यकारी अधिकार चंदन ने कहा कि इन पदों को भरने के लिए शासन की ओर प्रयास किए जा रहे है. इसी प्रकार आंगनवाडियों में बच्चों के लिए आपूर्ति किए जा रहे घटिया स्तर के टीएचआर पर भी सवाल उठाए गए. इस टीएचआर के बजाय बच्चों को अन्य पोषाहार उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी सभा में लिया गया.

अकोला जिला परिषद के मिनी मार्किट की दुकानों के नए करार न किए जाने से उक्त दुकानधारकों को नोटिस देने या दुकानें खाली करवा लेने को लेकर कई महिनों से केवल चर्चा ही चल रही थी. इस बीच आज चंद्रशेखर पांडे ने याद दिलाई कि मिनी मार्केट स्थित दुकानों का करार खत्म होने पर भी नया करार न करनेवाले दुकानों को सील करने की मांग की गई थी. इस संदर्भ में अब तक जिप की आय बढाने को लेकर क्या कदम उठाए गए? इस पर निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता विजय कुंभारे ने सभागृह में जानकारी दी कि जिला परिषद से करार करनेवाले 9 दुकानधारकों ने दूसरे व्यक्ति को दुकानें परस्पर किराए पर दे दी है, जो किए गए सर्वे में स्पष्ट हुआ है. यह पूरी प्रक्रिया गलत होने से सभी 9 दुकानें सील कर जिला परिषद प्रशासन उन्हें कब्जे में लेगा. जबकि 11 दुकानधारकों को नया करार करना पडेगा.