Published On : Thu, Dec 26th, 2019

मंत्रिमंडल विस्तार के साए में जिला परिषद् चुनाव

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– नेता,नेतपुत्रों के चुनावी जंग में कूदने से चुनाव की अहमियत बढ़ गई

नागपुर – नागपुर जिला परिषद् का चुनाव पर राज्य मंत्रिमंडल विस्तार का असर पड़ने वाला हैं.मंत्री बनने के तुरंत बाद जिप परिणाम से मंत्रियों और न बनने वाले मंत्री की अहमियत तय होने वाली हैं.इसके बावजूद ऊर्जावान को घर बैठाने की भी तैयारी भी चरम सीमा पर हैं.

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याद रहे कि जिला परिषद् में भाजपा-सेना सत्ता थी.तब राज्य में इन्हीं की सरकार थी.अब सेना-कांग्रेस-एनसीपी की सत्ता राज्य में हैं और मंत्रिमंडल का विस्तार भी ठीक से नहीं हो पाया।संभवतः अगले सप्ताह हो सकती हैं.इसी बीच जिला परिषद् का चुनाव भी होने जा रहा हैं.भाजपा व सेना अलग-अलग और एनसीपी-कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ रही हैं.मंत्रिमंडल विस्तार में जिले से कांग्रेस,सेना,एनसीपी से विधायक मंत्री बनाए जा सकते हैं.जो मंत्री बनेंगा उनकी जिप चुनाव में जिम्मेदारियां भी बढ़ जाएंगी और जो नहीं बन पाएंगे वे अपना महत्त्व भी जिप चुनाव के मार्फ़त दिखाने से नहीं चूकेंगे।

वैसे जिप चुनाव में अधिकांश वर्त्तमान जिप सदस्यों का पत्ता कट गया या फिर काट दिया गया.लगभग १ दर्जन वर्त्तमान जिप सदस्यों को पुनः उम्मीदवारी विभिन्न पक्षों ने दी तो कुछ बगावत कर मैदान में कूदे।३० दिसंबर नाम वापिस लेने का अंतिम दिन हैं,इसी दिन कौन किस पक्ष से और किसके समर्थन पर लड़ रहे,इसी दिन जिप चुनाव का चित्र साफ़ हो जाएगा।

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एनसीपी-कांग्रेस भले ही गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे लेकिन आपसी समन्वय का काफी आभाव नज़र आ रहा.जिले के इस जिप चुनाव में कई नेतापुत्र और तथाकथित दिग्गज नेता चुनावी जंग में कूद चुके हैं.अमूमन सभी करोड़पति उम्मीदवार हैं.

वलनी सर्कल से सिंह,चौधरी,प्रकाश से असमंजस
वलनी जिलापरिषद क्षेत्र से कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के बाद भी एनसीपी से किशोर चौधरी तो कांग्रेस से प्रकाश कापरे और भाजपा से ठेकेदार,होटल व्यवसायी,फिल्म निर्माता अरुण सिंह ने आवेदन भरा हैं.स्थानीय मतदाता संभ्रम में हैं कि ३० दिसंबर को एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन का अंतिम उम्मीदवार कौन होंगा,किशोर चौधरी या फिर प्रकाश कापरे। गठबंधन शर्त अनुसार पहले बी फार्म किशोर चौधरी ने भरा,इसलिए उनके अडिग रहने पर प्रकाश कापरे को घर बैठना पड़ सकता हैं.जबकि कापरे के पास बी फार्म था लेकिन उसे भरने नहीं दिया गया.अब यह दोनों पक्षों के रणनीत पर निर्भर हैं!

दूसरी ओर भाजपा ने पक्ष में अर्श पर रहने वाले तथाकथित नेता को फर्श पर उतार जिप की उम्मीदवारी दी.

क्षेत्र के मतदाताओं और उम्मीदवारों के समर्थकों का संयुक्त तर्क यह हैं कि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व ऊर्जावान की जगह डमी करें,इसलिए संयुक्त समझौते के तहत भाजपा उम्मीदवार सिंह को विजयी बनाया जाएगा।इसके लिए किशोर और प्रकाश की राजनैतिक बलि ली जाएंगी।

दूसरा तर्क यह भी लगाया गया कि ६-८ माह पूर्व कांग्रेस को किशोर चौधरी सरेंडर हो गए थे,लेकिन हैं एनसीपी में,तब उन्हें जिप उम्मीदवारी देने व् साथ देने का आश्वासन दिया गया था जो एक रणनीत के तहत पूर्ण किया जा रहा.ऐसे में प्रकाश कापरे जैसे २०-२५ वर्ष से सक्रीय कार्यकर्ता की बलि ली जा सकती हैं.

अब देखना यह हैं कि ३० दिसंबर को वलनी जिप का परिदृश्य किस करवट लेगा।

भाजपा के पास कार्यकर्ताओं का आभाव
भाजपा उम्मीदवार सिंह के पास न खुद की टीम हैं और न ही कार्यकर्ताओं की फ़ौज.जो थी भी फ़िलहाल कांग्रेसी हो गए.अर्थात शिवाय कांग्रेसी,एनसीपी व अन्य दलों के कार्यकर्ताओं के मदद से चुनावी जंग में कायम रहेंगे या फिर धनबल जिसकी कई जगह चर्चा भी कर चुके हैं कि जितना लगेंगा लगा देंगे।क्षेत्र की नब्ज फ़िलहाल बाहरी होने के कारण सिंह के साथ नज़र नहीं आ रही बल्कि फ़िलहाल स्थानीय उम्मीदवार कापरे व चौधरी के साथ दिख रही.

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