Published On : Tue, Sep 10th, 2019

सकारात्मक सोच व आत्मविश्वास के साथ जिंदादिली से जिये- प्रो. डॉ. प्रितम गेडाम

विश्व आत्महत्या निवारण दिवस विशेष

नागपुर: आत्महत्या किसी समस्या का हल नही होता, डरकर या खुद को कमजोर समझकर जीवनलीला समाप्त करना अपराध है। किसके जीवन मे परेशानीयाॅं नही होती? बस कीसी को कम तो किसी को ज्यादा होती है और समय हमेशा एक-सा नही रहता। समय परीवर्तनशील होता है वो हमेशा बदलता है और बदलता ही रहेगा, जीवन मौका सबको देती है किसी को जल्दी तो किसी को देर से, बस मेहनत हमारा काम है।
आत्महत्या का प्रमाण दिन-प्रतिदिन बढता ही जा रहा है हर वर्ष दस लाख से ज्यादा लोग अपना जीवन खुद खत्म कर देते है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक रोजाना करीब 3000 लोग आत्महत्या की वजह से मर जाते हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार देश में हर रोज करीब चार सौ लोग अवसाद से पीड़ित होकर खुदकुशी करते हैं। भारत की गिनती उन देशों में की जाती है जहां खुदकुशी की दर सबसे ज्यादा है। 78 प्रतिशत वैश्विक आत्महत्याएं निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं।

”विश्व आत्महत्या निवारण दिवस“ आत्महत्या और आत्महत्या रोकथाम के बारे में जागरूकता फैलाने के संबंध में संयुक्त प्रयासों के लिए देशों, संगठनों, समुदायों और व्यक्तियों द्वारा कदम उठाने का आह्वान है। विश्व आत्महत्या निवारण दिवस विश्व में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोकथाम लगाने एवं इस समस्या के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के उद्देश्य से शुरु किया गया था। इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन ने विश्व आत्महत्या निवारण दिवस मनाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और विश्व मानसिक स्वास्थ्य महासंघ के साथ समझौता किया। वर्ष 2003 से प्रतिवर्ष 10 सितंबर को ”विश्व आत्महत्या निवारण दिवस“ मनाया जाता है।

आधुनिक जीवनशैली मे आत्महत्या का प्रमाण बढाः-
आज के आधुनिक युग मे मनुष्य भागमभाग के रेस मे लगा है और अपने आदर्शो, संस्कृती, प्रकृती से दूर होता जा रहा है हर तरफ स्वार्थीप्रवृत्ती, चिडचिडापन, प्रदूषण, शोर, अहंकार, शार्टकट तरीके से जल्द पैसा कमाना, नशाखोरी, भेदभाव, मिलावटखोरी, हीनभावना, भ्रष्टाचार, ताणतणाव, अवसाद जैसे कारणो से मनुष्य की मानसीकता खराब हो रही है मानसिक रोग बडी मात्रा मे बढ रहे है जिस कारण वर्तमान मे मनुष्य के अंदर सहनशक्ती कमजोर हो रही है और जल्दी गुस्सा आता है मनुष्य पर बुरी परिस्थिती आने का जिम्मेदार कुछ हद तक खुद मनुष्य भी होता है जैसे कोई अवैध घृणित कार्य या गुनाह करने पर, नशा करने पर, अपनी आपराधीक छवी जमाने से बचाने के चक्कर मे, किसी लत मे आकर आत्महत्या का गुनाह करता है।

आज मनुष्य किसी की खुशी मे खुश होने के बजाय ईष्र्याभाव से दुखी होता है और यह वृत्ती बढती ही जा रही है। मनुष्य का जीवन अनमोल है किसी भी किंमत पर इसका मोल नही लगाया जा सकता है ये जीवन फिर नही मिलनेवाला इसलिए इसका महत्व समझे। मनुष्य के जाने के बाद उसके परीवार मे उसका स्थान सदैव के लिए रिक्त रह जाता है व परीवार के लोगो पर जो दुखो का सैलाब उमडता है उसको शब्दो मे पिरोना मुश्कील है।

भारत देश मे साल के एक लाख से ज्यादा लोग आत्महत्या करते है तथा विश्व मे हर चालीस सेकंद मे एक आत्महत्या होती है। आर्थीक संकट द्वारा किसान आत्महत्या, घरेलू महिलाओ द्वारा आत्महत्या, परीक्षाओ मे असफल होने पर आत्महत्या, बेरोजगारी के कारण, प्रेम-संबंधो मे विफल होने पर, गंभीर बिमारी से त्रस्त, दृव्र्यवहार, दहेज विवाद, संघर्ष, अत्याचार, पारीवारीक कलह जैसी समस्या आत्महत्या के संख्याओ को बढाती है। आज के समय मे सबसे ज्यादा आत्महत्या का प्रमाण युवाओ मे है और अब तो नाबालिगो मे भी आत्महत्या के प्रमाण मे अत्याधिक वृद्धी हुई है। छोटी-छोटी बातो पर उग्र हो जाना, नासमझी, नाराज होना, किसी अपयश पर खुद को कमजोर या ठगा सा महसूस करना, हट या अभीमान के लिए, इंटरनेट की लत भी इसके लिए दोषी है जिससे आत्महत्या बढ रही है। देश मे वृद्धाश्रम समय के साथ बढ रहे है और खुद के लिए स्पेस ढूंढने के चक्कर मे लोग अपनो से विभक्त होकर छोटे-छोटे घरो मे शिफ्ट हो रहे है वैसे ही उनके मन व सोच भी छोटी हो रही है।

आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीः-
परेशानी किसे नही होती, बडे-बडे व्यापारी, नौकरीपेशा लोग भी परेशान है अंतर इतना है की कोई बताता है तो कोई मन मे रखता है। जब भी खुद को कमजोर समझो तो एक बात ध्यान मे रखना की दुनिया मे हमसे भी ज्यादा लोग दुखी है जिनके आगे हमारा दुख कुछ भी नही। दुनिया मे एक बहुत बडा तबका भूखे पेट सोता है, रहने के लिए छत नही होने से फुटपाथ पर जींदगी गुजर-बसर करते है, लाखो बच्चे लावारीस की जिंदगी जी रहे है, दो वक्त की रोटी के बंदोबस्त के लिए माॅं-बाप अपने नवजात बच्चे तक को झोपडी मे अकेला छोडकर मजदूरी करने जाते है, एक मटके पानी के लिए महिलाएॅं कोसो दूर तक तपती धूप मे रोज चलती है, आज भी दूर-दराज के गाॅंव मे छोटे-छोटे बच्चे स्कूली शिक्षा के लिए कई किलोमीटर उबड-खाबड रास्तो, नदी, नालो से चलते है। हर साल विश्व मे लाखो गांव पानी मे डुब जाते है, आज भी कई ऐसे क्षेत्र है दुनिया मे जहा पर बच्चे भूख-भूख कर रोते बिलगते नजर आते है ये भी जीवन है ये लोग भी संघर्ष करते ही है जीवन से हारकर रूकते नही है। आज विश्व मे दिव्यांगो ने खेल विज्ञान शिक्षा जैसे हर क्षेत्र मे नाम रोशन किया है इनसे हमने आत्मविश्वास और जिंदादीली सिखनी चाहिए क्योकी वे शारीरीक अपुर्ण होकर भी एक सामान्य पुर्ण इंसान से ज्यादा कामयाबी से जीते है और अपना काम बखुबी खुद करते है। आज के युग मे हमारे साथ कोई अप्रिय घटना घटीत होती है तो हम जल्दी टूट जाते है और फिर प्रयास करने की हिम्मत नही जुटा पाते, यह गलत है। जीवन मे हर छोटी-छोटी बाते हमे मार्गदर्शन करती है नन्ही सी चिंटी बार-बार असफल होने पर भी अपने प्रयास नही छोडती है जब तक वह कामीयाब ना हो जाएॅ फिर तो हम इंसान है हम क्यू हिम्मत हारे, परेशानीयो को चैलेंज समझकर स्विकार करे और समस्याओ से दूर भागने की जगह उसका डटकर मुकाबला करे। इतिहास गवाह है की दुनिया मे हजारो ऐसी शख्सियत हुए जिन्होने लाखो मुसीबतो और असफलताओ को मात करते हुए विश्व किर्तीमान रचा है ऐसे लोगो का आदर्श हमेशा अपने नजरो मे रखना चाहीए।

आत्महत्या नियंत्रण के कुछ उपायः-
@ कितनी भी बिकट परीस्थिती हो लेकिन गुस्से व तनाव मे नकारात्मक निर्णय ना ले क्योकी उस समय हम सही-गलत को ठिक से नही समझते है, बहुत बार हम आवेश मे आकर गलत निर्णय लेते है बाद मे जब हमारा मन शांत होता है तब अपनी गलती समझ मे आती है तब पछतावे के अलावा कुछ नही बचता और समय कभी लौटकर नही आता।

@ बुरी आदतो व नकारात्मक लोगो से दुरी बनाना, हंॅसी-खुशी के माहौल मे रहना, खुलकर हंसे, खुलकर मुस्कुराएंॅ और अपनी बातों को शेयर करें। अवसाद या किसी मानसीक शारीरीक समस्या पर डाॅक्टरो से खुलकर बाते करना, मन मे उत्पन्न सवालो का तज्ञो द्वारा निराकरण करना।

@ अपनी गलतियों से सीखें, अकेलेपन मे ना रहे, दुसरो से अपने मन की बात करे, संभव हो तो हमेशा परिवार के बिच मे रहे।

@ खुद की देखभाल करना, निव्र्यसनी लोगो से संपर्क, ध्यानसाधना करना, अपने लिए खेलकूद, योग, व्यायाम व नये हेल्दी शौक विकसीत करना, पुरी निंद लेना, तनाव को हेल्दी तरीके से निपटाएॅं, पर्यावरण व पालतु पशुओ के साथ समय बिताना भी तनावमुक्त जीवन प्रदान करता है।

@ विशेष रूप मे पालको ने अपने बच्चो से एक दोस्त के रूप मे व्यवहार करना, उस पर नियंत्रण रखना, बचपन से ही बच्चो को उचीत अनुचीत बातो की समझ देना, सोशल मिडीया से बच्चो की दूरी बनवाकर रखना, बच्चो को बुजुर्गो महिलाओ को सन्मान देना व असहाय को मदत करना सीखाना, अच्छे संस्कार व उचित वातावरण का निर्माण कर देना।

@ हमेशा सकारात्मक सोच ही रखना और अपने परिवार के लोगो को, उनकी खुशीयो को, अपने कर्तव्यो, जिम्मेदारीयो को, जो पुरा करना है उस लक्ष्य को याद करना।

@ तनावमुक्ती के लिए प्रेरित करनेवाले व्यक्तीयो, समूहो, दोस्तो से संपर्क मे रहना और खुद को हमेशा व्यस्थ रखना।

@ पारिवारीक, सामाजिक, आर्थिक दायित्वो को समझना व अपने कर्तव्यो को पुरा करना व साथ मे मनुष्य मे परोपकार की भावना होना बहुत आवश्यक है अर्थात बिना किसी स्वार्थप्रवृत्ती के लोगो के चेहरे पर हॅंसी लाना अपने मन को बहुत बडी सांत्वना दे जाती है।