Published On : Thu, Mar 15th, 2018

वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट: भारत में जीएसटी का सबसे जटिल फॉर्म, दुनिया में दूसरा सबसे ऊंचा टैक्स रेट

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नई दिल्ली: वर्ल्ड बैंक (विश्व बैंक) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी कर सुधार प्रणाली (टैक्स रिफॉर्म सिस्टम) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वैश्विक संस्था ने भारत में लागू जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) को सबसे ज्यादा जटिल करार दिया है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, 115 देशों में भारत में टैक्स रेट दूसरा सबसे ऊंचा है। ‘लाइव मिंट’ के मुताबिक, रिपोर्ट में शामिल देशों में भारत की तरह ही अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू है। मोदी सरकार द्वारा 1 जुलाई, 2017 को अमल में लाए गए GST के ढांचे में पांच स्लैब (0, 5, 12, 18 और 28 फीसद) बनाए गए हैं। सभी वस्तुओं और सेवाओं को इसी दायरे में रखा गया है। सरकार ने कई वस्तुओं और सेवाओं को GST के दायरे से बाहर भी रखा है और कुछ पर काफी कम टैक्स लगाए गए हैं। जैसे सोने पर 3 तो कीमती पत्थरों पर 0.25 फीसद की दर से कर लगाया गया है। वहीं, अल्कोहल, पेट्रोलियम उत्पाद, रियल एस्टेट पर लगने वाला स्टाम्प ड्यूटी और बिजली बिल को GST के दायरे से बाहर रखा गया है। विश्व बैंक ने बुधवार (14 मार्च) को ‘इंडिया डेवलपमेंट अपडेट’ की छमाही रिपोर्ट जारी की थी।

पाकिस्तान और घाना की श्रेणी में भारत: दुनिया के 49 देशों में GST के तहत एक और 28 देशों में दो स्लैब हैं। भारत समेत पांच देशों में इसके अंतर्गत पांच स्लैब बनाए गए हैं। भारत के अलावा इनमें इटली, लक्जेम्बर्ग, पाकिस्तान और घाना जैसे देश शामिल हैं। बता दें कि चारों देशों की अर्थव्यवस्था डांवाडोल है। ऐसे में भारत GST के तहत सबसे ज्यादा स्लैब वाला देश भी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 12 और 18 फीसद वाले स्लैब को एक करने का वादा किया है। लेकिन, कर अदा करने में सुधार और राजस्व में वृद्धि के बाद ही यह कदम उठाया जाएगा। पिछले साल नवंबर में GST काउंसिल की गुवाहाटी बैठक में 28 फीसद के स्लैब को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया गया था। पहले इसके दायरे में 228 वस्तुओं एवं सेवाओं को रखा गया था, जिसे 50 तक सीमित कर दिया गया।

टैक्स रिफंड की धीमी रफ्तार पर चिंता: वर्ल्ड बैंक ने टैक्स रिफंड की धीमी रफ्तार पर भी चिंता जताई है। इसका असर पूंजी की उपलब्धता पर पड़ने की बात कही गई है। रिपोर्ट में कर प्रणाली के प्रावधानों को अमल में लाने पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विश्व बैंक ने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों के आधार पर भविष्य में स्थिति में सुधार आने की उम्मीद जताई है। रिपोर्ट में टैक्स रेट की संख्या कम करने, कानूनी प्रावधान और प्रक्रियाओं को सरल बनाने की वकालत की गई है।

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