Published On : Thu, Dec 21st, 2017

बहुत दुर्लभ हृदय शल्यक्रिया वोक्‌हर्ट हॉस्पिटल मे

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नागपुर: नागपुर के एक ४५ वर्ष आयु के आदमी को जो स्थानीय अस्पताल मे थे, छाती मे अविशिष्ट दर्द और सांस लेने मे तकलिफ के लक्षण विकसित हुए। इसके लिए उनकी संपूर्ण जांच की गयी और आरोही महाधमनी (असेंडिंग अ‍ॅओर्टा) से ‘लार्ज स्युडो अन्युरिझम’ (असामान्य सूजन) का निदान हुआ। इस निदान के साथ उन्हे उपचा तथा प्रबंधन हेतु नागपुर के वोक्‍हार्ट हॉस्पिटल के डॉ. समीत पाठक (कार्डियो थोरॅसिक सर्जन व व्हॅस्क्युलर सर्जन) के पास भेजा गया। संपूर्ण चिकित्सा जांच के बाद सभी आवश्यक परीक्षण किए गए। इस स्युडो अन्युरिझम का आकार —- और वह उरोस्थि (स्टर्नम) के नीचे से बाहर आ रहा था। यह आंशिक रूप से संगठित थ्रोम्बस से भरा था और इसकी दीवार को स्थानों पर भी कैल्सिकरण (कैल्शियम संग्रहण) हुआ था। उरोस्थि पर महाधमनी से स्पंदन महसूस किया जा सकता था।

डॉ। पाठक और टीम द्वारा तत्काल शल्यक्रिया की की योजना बनाई गई थी क्योंकि इस एन्यूरिज्म के अचानक टूटना हमेशा घातक होता है। इसलिए रोगी और रिश्तेदार को शल्य चिकित्सा की आवश्यकता और उसके संभावित जटिलताओं के बारे में सलाह दी गई थी। रोगी को सर्जरी के लिए लिया गया था तथा उरोस्थि को खोलना आमतौर पर कार्डियाक सर्जिकल प्रक्रियाओं में पहला कदम है। लेकिन इस रोगी में यह संभव नहीं था क्योंकि स्युडो न्यूरिज़म नीचे की छाती को छू रहा था और स्टर्नोटमी (उरोस्थि को खोलने) पर तुरन्त फूट सकता था।

इसलिए इस सर्जरी को डीप हायपोथर्मिक सर्क्युलेटरी अरेस्ट नामक एक विशेष तकनीक द्वारा किया गया। इस प्रक्रिया में रोगी की दायीं जांघ के माध्यम से ऊर्विका धमनी और नस दोनों को कैन्युला डाला गया और रोगी को कार्डियो पल्मोनरी बाईपास मशीन पर रखा गया था। शीतलन के लिए मुख्य तापमान धीरे-धीरे 36 डिग्री से 18 डिग्री सेल्सियस तक करना शुरू किया गया। इस तापमान पर दिल की धड़कन बंद हो जाती है और आकुंचन होता है।

18 डिग्री शरीर का तापमान प्राप्त होने के बाद संचलन पूरी तरह से रोका गया और रोगी के शरीर से पूरे रक्त को हार्ट लंग मशीन के व्हिनस रिझर्वायर में रख गया। रक्त की आपूर्ति की कमी के कारण मस्तिष्क की क्षति को रोकने के लिए आवश्यक सभी उपाय किए गए। इसलिए रोगी के शरीर में व्यावहारिक रूप से रक्त नहीं बह रहा है। आम तौर पर कुल परिसंचरण बंद करने का गोल्डन अवधि 30 मिनट है।

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इसे ध्यान में रखते हुए, जैसे ही संचलन बंद कर दिया गया था, उरोस्थि खोली गयी और सभी संगठित थ्रोम्बस हटा दिए गए, स्युडो न्यूरिज्म की नेक की पहचान की गई और फॉलेज़ कैथेटर को महाधमनी के चाप में डाला गया ताकि कुछ भी अवरोही महाधमनी में न गिरे। डैक्रॉन पैच और प्रोलिन सुचर के माध्यम से आरोही महाधमनी तुरंत ठिक की गयी। आखिरी टाके को कड़ा करने के पहले ही संचरण को उदरदार धमनी से पुनरारंभ किया गया था और पूरे महाधमनी को वायु आंतभंग (रक्त वाहिका में तैरता हुआ हवाई बुलबुला) से बचने के लिए खाली किया गया था। मरीज की रिवार्मिंग शुरू हुई और धीरे-धीरे इष्टतम शरीर तापमान हासिल किया गया औरहृदय स्पंदन फिर से शुरू हुआ। संचरण बंद रहने आ समय 44 मिनट था।

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रोगी को रातभर वैकल्पिक रूप से व्हंटिलेशन दिया गया था और डॉ केतन चतुर्वेदी (न्यूरोलॉजिस्ट) ने अगली सुबह न्यूरोलॉजिकल मूल्यांकन किया, जिसमें पता चला कि उनके बाएं ऊपरी अंग में कमजोरी थी। हेमोडायनामिक रूप से वह किसी भी रक्तस्राव या अनुचित घटना बिना ठिक हुए। धीरे-धीरे न्यूरोलॉजिकल रूप से सुधार हो कर स्थिर स्थिति में उन्हे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस घटना को एक वर्ष हो रहा है और वह अभी भी नियमित अनुवर्ती के लिए आते है और स्वस्थ है।

डॉ. पाठक ने कहा कि इस तरह के बहुत कम मामलों में साहित्य में अब तक ्दर्ज है और डीप हायपोथर्मिक सर्क्युलेटरी अरेस्ट ही एकमात्र तकनीक है जिसके द्वारा यह विशिष्ट शल्यक्रिया सफलतापूर्वक हो सकती है।

टीम: डॉ. समीर पाठक (सीटीव्हीएस), डॉ. अवंतिका जयस्वाल (भूलतज्ज्ञ), डॉ. केतन चतुर्वेदी (न्युरॉलॉजिस्ट)

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