Published On : Mon, Jan 12th, 2015

अकोला : ओलम्पिक दौड में स्वर्ण जीतते देखना है सपना – मिल्खा सिंह

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अकोला। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आई.एम.ए.), जिला क्रीडा अधिकारी कार्यालय, नेहरू युवा केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में तथा अकोला के विविध स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से आई.एम.ए. वाकथान 2015 का आयोजन आज रविवार 11 जनवरी को किया गया था. इस प्रतियोगिता में लगभग 8 हजार स्पर्धकों को सहभाग लेना था लेकिन मिल्खा सिंह से मिलने की ललक ने बेतहाशा भीड बढा दी . दौड का शुभारंभ गृह राज्यमंत्री डा. रणजीत पाटिल द्वारा हरीझंडी दिखाकर किया गया . इस अवसर पर सांसद संजय धोत्रे, विधायक गोपीकिसन बाजोरिया, विधायक रणधीर सावरकर, जिल्हाधिकारी अरूण शिंदे, जिला क्रीडा अधिकारी शेखर पाटिल, आईएमए के अध्यक्ष डा.विजय खेरडे, प्रकल्प प्रमुख डा. प्रशांत मुलावकर, इंडियन रेडक्रास सोसायटी के मानद सचिव प्रभजीतसिंग बछेर, क्रीडा परिषद के सदस्य सैय्यद जावेद अली, राज्य खेल मार्गदर्शक सतीशचंद्र भट, बुढन गाढेकर आदि उपस्थित थे.

स्पर्धा 3, 6 व 10 किलो मीटर के गुटों में आयोजित की गई. 3 किलो मीटर की प्रतियोगिता आईएमए हाल से शुरू होकर सिविल लाईन, बाराज्योतिर्लिंग मंदिर, दुर्गा चौक, अग्रवाल अस्पताल होते हुए वसंत देसाई स्टेडियम पर पहुंची. 6 किलो मीटर प्रतियोगिता की शुरूआत आई.एम.ए.हाल से शुरू होकर सातव चौक, बिर्ला रोड, रेलवे स्टेशन, माणिक टाकीज से होते हुए वसंत देसाई स्टेडियम के एन्ड प्वार्इंट पर पहुंची. उसी तरह 10 किलो मीटर प्रतियोगिता की शुरूआत भी आई.एम.ए. हाल से की गई तथा जठारपेठ, भागडे हास्पिटल, रेलवे स्टेशन, अकोट स्टॅड,सिटी कोतवाली, कलेक्टर आफिस, प्रधान डाक घर, आर.एल.टी. कालेज, एलआरटी कालेज से होते हुए अंतिम पडाव पर वसंत देसाई स्टेडियम पर पहुंची. प्रतियोगिता के बाद इस स्पर्धा में विजयी स्पर्धकों को पुरस्कार प्रदान किया गया. इस अवसर पर फ्लार्इंग सिख के अंतरराष्ट्रीय धावक पद्मश्री मिल्खासिंग व डा. रवि वानखडे उपस्थित थे. प्रतियोगिता के पुरस्कारों के अलावा आई.एम.ए. की ओर से विविध पुरस्कार प्रदान किया गए. इस प्रतियोगिता की संकल्पना अंगदान, स्वच्छ भारत अभियान तथा प्रधानमंत्री जनधन योजना थी. आयोजित वाकथान स्पर्धा के 10 किलो मीटर खुला वर्ग 18 से 45 वर्षीय आयु गट में अजय पांडे प्रथम, नसीम शाह फकीर द्वितीय माताले तृतीय स्थान पर रहे . महिला वर्ग की प्रतियोगिता में यामिनी उमेश ठाकरे ने प्रथम, अर्चना श्रीराम पाकदुने ने द्वितीय तथा किरण गौतम वानखडे ने तृतीय स्थान हासिल किया . 45 से 65 आयु वर्ग की प्रतियोगिता में मनिष शोभालाल सेठी अव्वल रहे तथा अनंता उकंडराव दुसरे तथा अरूण पंडित पाटिल तीसरे स्था पर रहे. महिला वर्ग में लता खडसे ने प्रथम, हेमा खटोड ने द्वितीय व डा. साधना लोटे ने तृतीय स्थान हासिल किया . प्रतियोगिता को सफल बनाने में स्पर्धा संयोजक डा. प्रशांत मुलावकर, डा. विजय खेरडे, डा. के.के. अग्रवाल, डा. सत्येन मंत्री, डा. राजेंद्र सोनोने, शिवाजी गावंडे समेत लगभग 50 स्वयं सेवी संस्थाओं के कर्मचारी अथक परिश्रम ले रहे हैं. प्रतियोगिता में ज्यादा से ज्यादा संख्या में हिस्सा लें ऐसा आवाहन आई.एम.ए. के पदाधिकारिओं ने अथक परिश्रम लिया .

सचिन के कारण भारतरत्न का खुला रास्ता
देश के किसी नागरिक ने भारतरत्न किसी से मांगना नहीं चाहीए, यह गलत है. बल्कि उसकी उपलब्धि पर वह उसे प्रदान किया जाना चाहिए. देश के इस सर्वोच्च सम्मान के लिए क्रीडा क्षेत्र में हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का हक सबसे अधिक है, लेकिन अच्छा हुआ यह पुरस्कार सचिन को दिया गया . कम से कम क्रीडा के लिए सरकार की झोली से एक रत्न तो निकला. सचिन तेंडुलकर को भारतरत्न देने से क्रीडा क्षेत्र में इस सम्मान का रास्ता खुल गया है. इन शब्दों में खेल की आस्था के प्रति पद्मश्री मिल्खासिंग ने अपने विचार व्यक्त किए. शिवनी हवाई अड्डे पर वे पत्रकारों से बात करते हुए बोल रहे थे . भारत की बैडमिंटन खिलाडी सायना नेहवाल को पद्ममभूषण दिए जाने की सिफारिश की गई है. इस सवाल परमिल्खासिंग ने कहां कि भारतरत्न किसी से मांगना नहीं चाहिए. प्रदेश में मौसम खराब होने के कारण वाकथान के उद्घाटन पर वे नहीं पहुंच पाए. अलबता देर से आने के बावजूद पुरस्कार वितरण के पूर्व वे अकोलावासियों के बीच पहुंच गए . वहां से वे तुरंत नादंड स्थित गुरूद्वारा में मथ्था टेकने के लिए रवाना हुए .

हमारे देश में प्रतिभाएं तो बहुत हैं बस जरूरत है उन्हैं निखारने की. आज हर कोई खेलों की ओर ध्यान केंद्रित करता है हमें जरूरत है खिलाडियों पर ध्यान केंद्रित करता है हमें जरूरत है खिलाडियों पर ध्यान देने की. मरा बस एक ही सपना है कि मैं अपने देश के किसी धावक को ओलम्पिक में स्वर्ण पदक हासिल करता देखूं. मुझे आशा है कि एक दिन हमारे देश के धावक ओमम्पिक में स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रोशन करेंगे. खेल महज एक स्पर्धा का हिस्सा नही होता बल्कि खेल के माध्यम से सभी खिलाडी एक जगह जमा होते हैं. चाहे वह किसी भी धर्म के हों, चाहे ओमम्पिक हो या कामनवेल्थ खेल पूरे विश्व के खिलाडी इस दौरान एकट्टा होते हैं. इसीलिए खेल विश्व एकात्मता का प्रतीक है, यह प्रतिपादन फ्लार्इंग सिख के नाम से ख्याति प्राप्त अंतरराष्ट्रीय धावक पद्मश्री मिल्खासिंह ने आईएमए वाकथान के पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान किया.

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और जब पहुंचे मिल्खासिंह
आई एमए वाकथान में मिल्खासिंह के पहुंचने को लेकर संदेह बना हुआ था .साथ ही अकोलावासी इस बार मिल्खासिंह को नहीं मिल पाएंगे जैसी खबरों को लेकर नागरिकों में चर्चाए चल रही थीं . इन सभी चर्चाओं को विराम लगाते हुए मिल्खासिंग आखिर पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान पहुंचे. उनकी एक झलक पाने को हर कोई बेकरार था. इस दौरान मिल्खासिंह के सुरक्षा इंतेजामों को लेकर काफी कोताही बरती गई . जिस कारण उन्हें नागरिकों के बीच गुजरने में काफी दिक्क तों का सामना करना पडा.

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