Published On : Wed, Nov 22nd, 2017

मोदी सरकार ने क्यों रोका जीडीपी का ताजा आंकड़ा?

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नई दिल्ली: गुजरात में जारी विधानसभा चुनाव अब केन्द्र सरकार के लिए कड़ी चुनौती बन चुका है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के होम स्टेट में बीजेपी की साख बचाना और विपक्ष में बैठे राहुल गांधी की कांग्रेस को फ्रंट पर लाने की कवायद के बीच केन्द्र में मोदी सरकार ऐसा कोई रिस्क लेना नहीं चाहती जिससे गुजरात के चुनावों में बाजी उल्टी पड़ जाए. यही वजह है कि राज्य में चुनावों के मद्देनजर केन्द्र सरकार डरी हुई है. केन्द्र सरकार पर सवाल यूं ही नहीं उठ रहे. राजनीतिक गलियारों में उठे इन सवालों के पीछे राजनीतिक वजहें भी बताई जा रही हैं.

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अपने रिसर्च में दावा कर चुकी है कि वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 6 फीसदी से नीचे रहने के आसार हैं. चालू वित्त की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान जीडीपी आंकड़े तीन साल के न्यूनतम स्तर 5.7 फीसदी पर पहुंच गई थी. इस गिरावट के लिए केन्द्र सरकार द्वारा देश की अर्थव्यवस्था को पहले नोटबंदी का झटका और फिर 1 जुलाई से घरेलू कारोबार को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) का झटका दिया जाना जिम्मेदार है.

हालांकि एसबीआई रिसर्च के मुताबिक गिरावट का यह सिलसिला चालू वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही के दौरान 6.5 फीसदी पर आकर थम जाएगा. लेकिन दूसरी तिमाही के आंकड़ों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुजरात में वोटिंग की है.

राहुल गांधी ने नरेन्द्र मोदी के गढ़ में बीजेपी को हिलाने के लिए अर्थव्यवस्था के साथ केन्द्र सरकार के छेड़छाड़ को मुद्दा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. अपनी बात को गुजरात की जनता के बीच रखने के लिए कांग्रेस ने पूर्व- वित्त मंत्री पी चिदंबरम और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत पार्टी से जुड़े सभी छोड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों की मदद ली है.

वहीं राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की पहल के बाद सवाल उठ रहा है कि केन्द्र सरकार चुनावों के मद्देनजर आर्थिक आंकड़ों के साथ खिलवाड़ कर रही है. उसे डर है कि कहीं दूसरी तिमाही के आने वाले आंकड़ें कांग्रेस के हमले को बल न दे दें और उन्हें चुनावों में मुंह की खानी पड़े. गौरतलब है कि आमतौर पर दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ें 1 नवंबर तक जारी हो जाने चाहिए थे.