Published On : Sat, Feb 18th, 2023
By Nagpur Today Nagpur News

१२ वी की परीक्षा से पहले आखिर क्यों कॉलेजेस कर रहे है टारगेट पब्लिकेशन का प्रमोशन?

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नागपूर: पूरे साल 12वीं के बच्चों ने एक पार्टिकुलर सिलेबस को फॉलो किया और बच्चों को एकदम से स्कूल की तरफ से मैसेज आया की आपको फलाना फलाना सिलेबस को पढ़ना है ।जब पालक ने स्कूल की टीचर से बात की तो पता चला कि स्कूल को भी बोर्ड ऑफिस से अभी-अभी यह जानकारी दी गई है कि बच्चों को अभी नए सिलेबस के हिसाब से पढ़ाई करनी है ।चिंता का विषय यह है कि अधिकांश बच्चों ने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है क्योंकि 21 तारीख से उनकी महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड की 12वीं की परीक्षा शुरू हो रही है, तो जाहिर सी बात है कि बच्चा अपनी तैयारी पूरी कर चुका है और यह अचानक किया गया सिलेबस का बदलाव बच्चे की तैयारी को और मानसिक स्थिति को धक्का देने के लिए पर्याप्त है क्योंकि अब उसको फिर से कुछ ही दिनों में स्कूलों द्वारा बताया गया सिलेबस तैयार करना होगा और नहीं करेगा तो बहुत मुमकिन है की उसके पेपर खराब हो जाएंगे, शाहिद शरीफ़, चेयरमैन, RTE एक्शन कमिटी ने बताया।

शाहिद शरीफ़ आगे कहते है, चौंकाने वाली बात यह है कि एक पालक ने 4 दिन पहले टारगेट पब्लिकेशन के वेबसाइट पर 12वीं में आने वाले संभावित प्रश्न बैंक में आने वाले सवालों को देखा और आज उसी पालक के पास स्कूल द्वारा भेजा हुआ सिलेबस हूबहू वैसा ही था जो 4 दिन पहले उस ने एक प्राइवेट पब्लिकेशन ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया था। ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई टेक्स्ट बुक बेचने वाली कंपनी का बताया हुआ सिलेबस हूबहू वैसा ही महाराष्ट्र बोर्ड भी तैयार करने को बोल रही है? गौर करने वाली बात यह है जब महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड के क्वेश्चन बैंक को चेक किया गया तो उसमें टारगेट पब्लिकेशन द्वारा अपनी वेबसाइट पर डाले गए सभी प्रश्नों को पाया गया और यह भी देखा गया की टारगेट पब्लिकेशन को उन क्वेश्चंस की छापने की स्वीकृति भी दी गई है क्योंकि उस दस्तावेज पर महाराष्ट्र बोर्ड द्वारा स्वीकृति के मोहर लगी हुई है।

मजेदार बात यह है टारगेट पब्लिकेशन की बुक पर यह भी लिखा गया है की इस किताब को महाराष्ट्र स्टेट ब्यूरो आफ टेक्सबुक प्रोडक्शन एंड करिकुलम रिसर्च द्वारा प्रिसक्राइब किए हुए पैटर्न पर प्रकाशित किया गया है ।सवाल यह उठता है कि अगर महाराष्ट्र बोर्ड ने इस किताब को प्रकाशित करने की अनुमति दी है तो यही किताब को पूरे साल क्यों नहीं पढ़ाया गया और आखिरी समय में यह क्यों बोला जा रहा है कि इस किताब या इस सिलेबस को फॉलो करो जो कि इस किताब में ही लिखा गया है उन्होंने यानी कि महाराष्ट्र बोर्ड ने टारगेट पब्लिकेशन का नाम नहीं लिया है पर जो भी उन्होंने नया सिलेबस भेजा है वह हूबहू टारगेट पब्लिकेशन द्वारा छापी गई किताबों में से लिया गया है तो इसका मतलब क्या निकाला जा सकता है? शरीफ़ ने पूछा।

इसमें मिलीभगत समझ में आ रही है क्योंकि महाराष्ट्र बोर्ड के इस निर्णय से किताब प्रकाशित करने वाली कंपनी को भारी भरकम प्रसिद्धि मिलेगी क्योंकि आज 12वीं एग्जाम लिखने वाला हर एक बच्चा टारगेट पब्लिकेशन द्वारा छपी हुई किताब के बारे में ही बात कर रहा है इसमें किताब छापने वाले की स्ट्रेटजी यह है की यह बात फैल जाए कि 12वीं बोर्ड में आने वाले सवाल यह सब कुछ सिर्फ टारगेट पब्लिकेशन ही प्रकाशित करता है और इसी किताब को खरीदना चाहिए और पढ़ना चाहिए ।यह भी हो सकता है कि टारगेट पब्लिकेशन आगे चलकर यह दावा करे कि उसकी किताबें पढ़ने वालों को ज्यादा अच्छे अंक मिले ।उन बच्चों की तुलना में जो टारगेट पब्लिकेशन की किताबें नहीं पड़ते हैं और इस तरह से दूसरी किताबों का मार्केट में नाम खराब किया जा सके।

देखने वाली बात यह भी है कि टारगेट पब्लिकेशन की किताबें अधिकांश नागपुर में प्राइवेट कोचिंग क्लास वाले उपयोग में लाते हैं प्रश्न है यह उठते हैं कि ऐसा क्या हुआ जिससे कि महाराष्ट्र बोर्ड को आखिरी समय में स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों को यह बताने की वजह आन पड़ी की सिलेबस में चेंज हुआ है और जो बदलाव किया गया है वह प्रत्यक्ष रूप से हुबहू टारगेट पब्लिकेशन द्वारा अपने निजी वेबसाइट पर बताए गए संभावित 12वीं में आने वाले बोर्ड क्वेश्चन है? किताब छापने वाला टारगेट पब्लिकेशन या लिख रहा है कि यह किताब महाराष्ट्र बोर्ड के द्वारा बताई गई टेक्स्ट बुक के आधार पर लिखी गई है तो फिर ऐसा क्यों है कि इस किताब से नहीं पढ़ाया गया और अब इसी किताब से क्वेश्चन आएंगे ?यह स्कूल वाले बच्चों को क्यों कह रहे हैं क्या अब एक किताब छापने वाली कंपनी यह निर्धारित करेगी कि 12वीं बोर्ड में कौन से प्रश्न आएंगे क्योंकि ऐसा कैसे हो सकता है की किताब छापने वाले कंपनी को यह पहले से ही ज्ञात होगा की 12वीं में कौन से संभावित प्रश्न हो सकते हैं और वह उन प्रश्नों को अपने वेबसाइट पर पहले ही डाल रहा है और वही प्रश्न बाद में महाराष्ट्र बोर्ड वाले स्कूलों द्वारा सभी विद्यार्थियों को तैयार करने के लिए कह रहे हैं?

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यह जानना जरूरी है कि फिजिक्स केमिस्ट्री और बायोलॉजी सब्जेक्ट की टारगेट टारगेट पब्लिकेशन की किताब की कीमत कुल Rs 2100 है इस सेट में हर विषय के दो-दो संस्करण है यानी कि हर सब्जेक्ट के दो वॉल्यूम या पार्ट है। परेशान करने वाला सवाल जो दिमाग में आता है वह यह है कि यह आखिरी समय पर बताया गया बदलाव क्या एक 12वीं कक्षा की परीक्षा लिखने वाले स्टूडेंट के कॉन्फिडेंस हो और उसकी एग्जाम की तैयारी को डिस्टर्ब नहीं करेगा? क्योंकि आने वाले 4 दिन बाद उसकी 12वीं बोर्ड की परीक्षा शुरू करने वाली है और वह बच्चा पहले ही अपनी परीक्षा की तैयारी कर चुका है और अब यह बदलाव उसको अधिक मानसिक तनाव देगा और संभावित यह भी है की उसकी परीक्षा की तैयारी भी इससे प्रभावित हो? उन पालकों को क्या जो यह Rs 2100 की किताब नहीं ले पाएंगे और आखिरी समय पर बताए गए सिलेबस के बदलाव के हिसाब से तैयारी नहीं कर पाएंगे ?क्या यह मुमकिन नहीं है कि अगर बदले गए सिलेबस के हिसाब से अगर विद्यार्थी ने तैयारी नहीं की तो उसके पेपर खराब हो सकते हैं और अगर नहीं तो फिर यह बदलाव किया ही क्यों गया? ऐसे अनेक प्रश्न दिमाग में शिक्षा विभाग, महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड और टेक्स्ट बुक प्रकाशित करने वाली कंपनी की मिलीभगत और सांठगांठ का परिचय दे रही है जिससे एक विद्यार्थी की मेहनत बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है, शरीफ़ ने कहा।

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