Published On : Tue, Mar 2nd, 2021

…… जब सत्तापक्ष नेता सीधा जवाब देने में लड़खड़ा गए

Advertisement

– सत्तापक्ष में समन्वय के आभाव से मतांतर दिखा


नागपुर : कल सोमवार 1 मार्च 2021 को मनपा की विभिन्न विशेष समितियों के सभापति-उपसभापतियों का निर्विरोध चयन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद नवनिर्वाचित सत्तापक्ष नेता ने पत्र-परिषद् के माध्यम से जो जवाब दिए,ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जानकारी देने के पूर्व आपसी समीक्षा नहीं की गई,नतीजा हुई घटनाक्रम और दी गई जानकारी में मतांतर नज़र आया.

मनपा में वर्त्तमान सत्ताधारियों सह अन्य नगरसेवकों का अंतिम वर्ष शुरू हो चूका हैं.अगले वर्ष इसी माह तक मनपा चुनाव प्रक्रिया शुरू रहेगी या फिर पूर्ण हो चुकी होंगी।इसलिए सत्तापक्ष ने अंतिम वर्ष सभी नाउम्मीदों को खुश करने के लिए इस आखिरी वर्ष में उपमहापौर,स्थाई समिति,जोन सभापति और विशेष समितियों में स्थान दिया,इस क्रम में सत्तापक्ष नेता पद भी शामिल हैं।चूँकि महापौर का चयन पिछले महापौर के चयन के वक़्त हो चूका था,तब वर्त्तमान महापौर ने भाजपा संसदीय मंडल में महापौर पद के लिए करारा तर्क-वितर्क किया था,जिसकी वजह से उन्हें तब ही अंतिम 11 माह का महापौर बनाने की घोषणा कर दी गई थी.इसके साथ ही परिवहन समिति सभापति और नासुप्र विश्वस्तों से भी इस्तीफा ले लिया गया इनकी जगह क्रमशः कुकड़े व बंगाले को भेजने का निर्णय लिया जा चूका हैं.

Gold Rate
17 Jan 2026
Gold 24 KT ₹ 1,42,600/-
Gold 22 KT ₹ 1,32,600 /-
Silver/Kg ₹ 2,83,500/-
Platinum ₹ 60,000/-
Recommended rate for Nagpur sarafa Making charges minimum 13% and above

नवनिर्वाचित सत्तापक्ष नेता पिछले ४ साल मनपा में निष्क्रिय रहे या फिर उन्हें सत्तापक्ष संचलन करने वालों ने मनपा से शत-प्रतिशत दूर रखा.पिछले 4 साल में सत्तापक्ष से विधानपरिषद/विधानसभा में जाने लायक 3 नगरसेवक हिचकोले खा रहे थे.जब भाजपा सत्ता में थी तो पूर्व महापौर संदीप जोशी और वर्त्तमान सत्तापक्ष नेता अविनाश ठाकरे को अंतिम माहों में नाम के लिए महामंडल का अध्यक्ष बनाया। इसके बाद पूर्व महापौर प्रवीण दटके को विधानपरिषद में भेजा,बाद में संदीप जोशी को स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधानपरिषद भेजने के लिए उम्मीदवारी दी,पक्ष अंतर्गत अमूमन सभी छोटे-बड़े नेताओं ने विरोध में काम करने से जोशी को हार का सामना करना पड़ा.

अब जबकि चुनावी वर्ष होने की आड़ में सत्तापक्ष के दोनों दिग्गज नेताओं के निर्देश पर नासुप्र विश्वस्त,महापौर,सत्तापक्ष नेता,सभी जोन सभापति और विशेष समिति सभापति को बदलने का निर्णय लिया गया.तो सत्तापक्ष नेता पद पर अविनाश ठाकरे का चयन पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सिफारिश पर किया गया,जबकि इस पद के प्रबल दावेदार वरिष्ठ नगरसेवक छोटू भोयर आदि भी थे.
कल विशेष समितियों के सभापति-उपसभापति के निर्विरोध चयन बाद नवनियुक्त सत्तापक्ष नेता अविनाश ठाकरे ने पत्रपरिषद में उपजे सवालों का ऐसा जवाब दे रहे थे मानो या तो पक्ष अंतर्गत समन्वय नहीं या फिर जवाब देने वक़्त अतिउत्साहित हो गए हो.निकट बैठे पूर्व परिवहन सभापति बाल्या बोरकर उन्हें जानकारी देकर बारंबार आगाह कर रहे थे.

याद रहे कि मनपा की विशेष समितियों की सिफारिशों को पिछले 13-14 वर्षो में कभी तरजीह नहीं दी गई,सिर्फ उन विशेष विषयों को तरजीह दी गई,जिससे सवालकर्ता का लगाव हो.पिछले 13-१४ वर्षों में सत्तापक्ष ने एक ही पद को काफी मजबूत रखा.फिर चाहे महापौर,सत्तापक्ष पद हो.

अब देखना यह हैं कि कल नए सत्तापक्ष नेता अविनाश ठाकरे द्वारा किये गए बयानबाजी कितनी खरी साबित होती हैं.

GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges
Advertisement
Advertisement