Published On : Sat, Jan 3rd, 2015

मूल : धान की बोरियां भीगी

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  • कृउबा में बिक्री के लिए लायी गई थी
  • किसानों की एजेंटो के प्रती नाराजगी

Wet bags of Rice
मूल (चंद्रपुर)। धान के लिए प्रसिद्ध मूल कृषी उत्पन्न बाजार समिति में धान की बोरियां बिक्री के लिए लायी गयी थी. इस दौरान बेमौसम बारिश ने सभी धान की बोरियों को अपनी चपेट में ले लिया. जिससे बोरियां भीग गयी. किसानों को काफी नुकसान हुआ है. नए साल में आई बेमौसम बारिश से किसान चिंता में आ गए है और एजेंट के प्रति तिव्र रोष व्यक्त कर रहे है.

मूल तालुका में अधिक प्रमाण में धान की फसल होती है. इस साल व्यापारियों की मांग पर किसानों ने जय श्रीराम, जयप्रकाश, 555, क्रांति सहित विविध जाती की फसल बुआई की थी. बैंक का कर्ज और निजी कर्ज चुकाने के लिए किसानों ने धान की बोरियां एजेंट के मार्फ़त बाजार समिती में लायी थी. लेकिन अचानक बेमौसम बारिश से किसानों की हजारों बोरियां भीग गयी. कृषी उत्पन्न बाजार समिती के 40 एजेंटों के मार्फ़त व्यापारी धान की खरीदारी करते है. हर किसान एजेंटों के विश्वास पर बोरियां छोड़ जाते है. सारी जिम्मेदारी एजेंटों की होती है. लेकिन भीगी हुयी बोरियां किसानों को वापस लेने के लिए जबरदस्ती की जा रही है.

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Wet bags of Rice  (1)
कृषी उत्पन्न बाजार समिती में काफी शेड है. हजारों धान की बोरियों की बिक्री इस बाजार समिती से होती है. आज की स्थिती में 50 हजार बोरियां यहाँ लायी गयी है. लेकिन बोरियां भीगने की वजह से किसानों का काफी नुकसान हुआ है. किसानों का धान भीगने से बचाने के लिए बाजार समिति के सभापति राजेश रत्नावार, सचिव चतुर मोहुर्ले और इतर कर्मचारियों ने परिश्रम किया था. लेकिन अचानक बारिश शुरू होने पर बिजली आपूर्ति खंडित हुयी तथा अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा.

तालुका के किसान संपूर्ण प्रकृति पर निर्भर है. प्रकृति ने साथ दिया तो किसानों को उत्पन्न लेने के लिए सुविधा होती है. इस 2014 में अनियमित बारिश होने से किसानों को प्रकृति का साथ नहीं मिला. जिनके पास पानी की सुविधा थी वे किसान कुछ प्रमाण में बुआई कर पाए. लेकिन उनको भी बारिश की मार झेलनी पड़ी. जिससे कर्ज और उधारी वापस करने के की चिंता किसानों को सता रही है.

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