Published On : Sat, Sep 23rd, 2017

UN में सुषमा का संबोधन- हम गरीबी से लड़ रहे हैं, और हमारा पड़ोसी PAK हमसे

Sushma Swaraj
न्यूयॉर्क:
सुषमा ने कहा कि हम गरीबी से लड़ रहे हैं, पर पाकिस्तान हमसे लड़ रहा है. सुषमा ने पाकिस्तान को जवाब दिया कि जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने भारत पर उनके देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाया था, तब सुनने वाले बोल रहे थे कि देखो कौन बोल रहा है. जो मुल्क खुद आतंक को पनाह देता है वही हमें मानवधिकार की पाठ पढ़ा रहा था.

सुषमा ने कहा कि मोहम्मद अली जिन्नाह ने क्या कहा क्या नहीं यह तो इतिहास की बात है पर पीएम मोदी ने आज के दौर में शांति का संदेश दिया. मोदी ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया, लेकिन शांति किसने बदरंग की, यह दुनिया जानती है. कॉम्प्रे‍हेंसिव बाइलेट्रल डॉयलॉग में बाइलेट्रल शब्द जानबूझकर डाला गया. कश्मीर भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा है.किसी भी तीसरे को इसमें दखल नहीं देने दिया जाएगा.

सुषमा ने कहा कि हम गरीबी से लड़ रहे हैं, पर पाकिस्तान हमसे लड़ रहा है. भारत ने पाकिस्तान द्वारा आतंकवादी कोशि‍शों के बावजूद अपने विकास की रफ्तार कम होने नहीं दी. जहां भारत ने एम्स, आईआईटी, आईआईएम बनाए वहीं पाकिस्तान ने अपने यहां हिजबुल मुजाहिद्दीन, लश्कर ऐ तैयबा जैसे आतंकवादी संगठन. भारत ने डॉक्टर, इंजीनियर पैदा किए और पाकिस्तान ने दहशतगर्द पैदा किए, जेहादी पैदा किए. सिर्फ भारत नहीं अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश भी पाकिस्तान की वजह से आतंकवाद से जूझ रहे हैं. इसलिए वहीं यूएन में पहली बार हुआ कि पाकिस्तान के भाषण के बाद किसी देश को तीन तीन देशों को जवाब देना पड़ा. चीन पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए सुषमा ने कहा कि आतंकवाद पर कार्य करने की कसमें सिर्फ एक रश्म बन गई है, जिसे संकल्प लेने के बाद भूल जाते हैं और कई देश अपने अपने इंट्रेस्ट को देखते हुए निर्णय लेते हैं.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि एक साल में काफी बदलाव हुए हैं. नए महासचिव चुने गए हैं और उनके प्रयासों की हम सराहना करते हैं. आज का विश्व अनेक मुश्‍क‍िलों से ग्रस्त है. आतंकवाद, गरीबी, भूखमरी, समुद्री रास्तों पर खतरा से दुनिया जूझ रही है. बेरोजगारी से युवा निराश हो रहा है, साइबर सुरक्षा पर भी संकट गहरा रहा है. हमने 2015 में 2030 का मसौदा तैयार किया था. हमें यथास्थ‍िति से बाहर निकलना होगा और योजनाओं में तेजी लानी होगी.

सुषमा ने कहा कि गरीबी दूर करने के लिए दो रास्ते हैं. एक रास्ता है हम उनका सहारा बने या दूसरा रास्ता है कि हम उन्हें ही सशक्त कर दें. मोदी सरकार ने भी दूसरा रास्ता चुना है. हमने जनधन योजना, स्टार्टअप योजना, स्टैंडअप योजना जैसी योजनाएं शुरू की है. जनधन योजना के जरिए 30 करोड़ लोगों को हमने बैंक से जोड़ा है. जिनके पास पैसा नहीं था उनका भी बैंक अकाउंट खुला है. ऐसा दुनिया में कहीं नहीं हुआ होगा. हमारा लक्ष्य 100 प्रतिशत लोगों को इससे जोड़ना है.