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    Published On : Sat, Sep 15th, 2018

    वीएनआयटी में विद्यार्थियों द्वारा हैट उड़ाने की प्रथा बंद

    नागपुर: केंद्र में बीजेपी सरकार आने के बाद बड़े पैमानें पर व्यवस्थाओं में परिवर्तन हो रहा है। विपक्ष भले ही सरकार इस परिवर्तन को लेकर बदनियती का आरोप लगा रहा हो पर बदलाव बेरोक टोक जारी है। विशेष तौर पर उन व्यवस्थाओं को बदलने का प्रयास तेज़ है जिस पर पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव है।

    बदलाव शिक्षा के क्षेत्र में भी हो रहा है और इस बदलाव में संघ की सोच स्पस्ट है। वैज्ञानिक दौर में भी संघ पाश्चात्य गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को ही राष्ट्रनिर्माण के लिए बेहतर विकल्प मनाता है। संघ की सोच अन्य क्षेत्रों की ही तरह शिक्षा क्षेत्र में भी लागू होती दिख रही है।

    इंजीनियरों को जन्मने वाली देश की प्रमुख संस्थाओं में से एक नागपुर में स्थित वीएनआयटी इंजीनियर्स दिवस के अवसर पर होने वाले दीक्षांत समारोह में गाउन और हैट पहनने की परंपरा को बदल दिया है। शनिवार को आयोजित दीक्षांत सहरोह में इसकी बानगी देखने को मिली। अपनी डिग्रियाँ लेने पहुँचे विद्यार्थी रोजमर्रा के ड्रेसकोड में पहुँचे और अपनी डिग्री और सम्मान हासिल किया।

    वीएनआयटी में हुए समारोह के बाद अब शिक्षण संस्थाओं में ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू की गई परंपरा को ख़त्म करने की शुरुवात हो चुकी है ऐसा कहाँ जा सकता है। संघ के जुड़े विश्वाश जामदार इस संस्थान में निदेशकों में से एक है। लंबे वक्त तक आद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाली संघ की ईकाई लघु उद्योग भारती में रहे जामदार ने संस्थान में अपनी नियुक्ति को लेकर पूर्व मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी को ख़ुद पत्र लिखकर सिफ़ारिश।

    उस समय वो ख़ूब चर्चा में रहे ख़ुद की पैरवी को लेकर उठ रहे सवालों का ज़वाब देते हुए उन्होंने कहाँ था। वो संघ के कार्यकर्त्ता है जिस शिक्षा संस्थान के लिए उन्होंने सिफारिश की उसमे पढ़ चुके है और अपनी सेवा देना चाहते है। इसके लिए उन्होंने ख़ुद की पैरवी की है तो इसमें गलत क्या है।

    संघ की एक और संस्था जो उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए काम करती है भारतीय शिक्षण मंडल वो भी वीएनआयटी में काफ़ी सक्रीय है। मंडल द्वारा देश में नई शिक्षा को लागू करने को लेकर वर्त्तमान शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को विस्तृत रिपोर्ट के साथ सुझाव भी दिए है। इन सब बातों को देखे तो स्पस्ट हो जाता है की ये बदलाव संघ की सोच से ही हो रहे है। संघ विश्व की नई तकनीक को अपनाना चाहता है लेकिन अपनी राष्ट्र निर्माण की अवधारणा के हिसाब से जिसमें पाश्चात्य सभ्यता पर अधिक बल है। उसकी यही सोच देश में नई शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी है जिस पर तेज गति से काम शुरू हो चुका है।

    वीएनआयटी के निदेशक विश्वाश जामदार अपने संस्थान में कोट हैट की परंपरा बंद होने पर ख़ुश है। उनके अनुसार जब से उनके संस्थान में यह फ़ैसला हुआ है उनके पास देश भर से संदेश आ रहे है। इन संदेशों में बधाई के साथ इस काम के लिए हौसला अफजाई भी है। उनका कहना है की परंपरा के नाम पर विदेशी संस्कृति को धोना जायज़ नहीं है। बदलाव हुआ है जो अच्छा है इसमें हमारी संस्कृति को दर्शाने वाली रवायत पेश हो तो बेहतर होगा। हालाँकि उन्होंने यह सवाल टाल दिया की क्या वीएनआयटी द्वारा उठाये गए कदम को देश भर के शिक्षण संस्थानों द्वारा उठया जाना चाहिए या नहीं ।

    शनिवार को आयोजित दीक्षांत समारोह को लेकर संस्थान द्वारा ड्रेस कॉर्ड पहले से ही जारी कर दया गया था। जिसका पालन करते हुए पुरुष छात्र शर्ट पैंट पहनकर पहुँचे जबकि महिला छात्र सलवार कुर्ते और साड़ी में,विद्यार्थियों द्वारा अपने शिक्षा संस्थान द्वारा लिए गए इस फ़ैसले का स्वागत किया गया। एक छात्र अपूर्व कुंदलकर जिसने दीक्षांत समारोह ने पदक भी जीता उसके मुताबिक अगर ड्रेस कोड कुर्ता पायजामा होता तो ज़्यादा अच्छा होता। विद्यार्थियों ने तो संस्थान द्वारा जारी किये गए फ़ैसले का तो स्वागत किये लेकिन संस्थान ही अपने फ़ैसले को लागू करने के प्रयास में असफ़ल साबित हुआ। संस्कृति की दुहाई देते हुए विद्यार्थियों को हैट गाउन पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया लेकिन विद्यार्थियों का सम्मान करने पहुँचे अतिथि और अधिकतर कॉलेज के प्रोफ़ेसर,अधिकारी सूटबूट में नज़र आये जिसे भी शायद पारंपरिक भारतीय परिधान नहीं समझा जाता।

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