Published On : Tue, Apr 2nd, 2019

विहिप से पहली बार जुड़े जैन संत

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ऊर्जा गुरु जुड़े विहिप से ,इतिहास में पहली बार जैन संत को मिला विहिप में स्थान,विहिप का मुख्य उद्देश्य

नागपुर/इंदौर: विश्व हिन्दू परिषद् के केंद्रीय संत मार्गदर्शक मंडल में पहली बार किसी संत को स्थान मिला है l महामना आचार्य सम्राट कुशाग्रनंदी जी महाराज के आत्मीय शिष्य ऊर्जा गुरु अरिहंत ऋषि जी को विहिप में शामिल किया गया है | इसकी घोषणा प्रान्त संगठन मंत्री ब्रज किशोर भार्गव ने की l इस घोषणा के दौरान विश्व हिन्दू परिषद् के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चम्पत राय भी मौजूद रहे l ऊर्जा गुरु के संगठन से जुड़ने पर उन्होंने ख़ुशी व्यक्त की और कहा की उम्मीद है संगठन को एक नयी ऊर्जा मिलेगी l

विहिप के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी जैन संत को मंडल में स्थान दिया गया हो l उल्लेखनीय है मोटिवेशनल स्पीकर ऊर्जा गुरु ऐसे कार्य कर चुके है जो पहले इतिहास में दर्ज नहीं थे l ऊर्जा गुरु के नाम पर गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दो रिकार्ड्स दर्ज है l साथ ही गोल्डन बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में भी एक बार अपना नाम दर्ज करवा चुके है l

विहिप का मुख्य उद्देश्य धर्म की स्थापना, धर्म का प्रचार-प्रसार, सामजिक समरसता, धर्म की रक्षा और संस्कृति का संवर्धन है l ऊर्जा गुरु अरिहंत ऋषि का विहिप से जुड़ने से युवा वर्ग भी विहिप के प्रति आकर्षित होगी l एक मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में ऊर्जा गुरु की पहुंच लाखों युवाओ तक है l विहिप के संग अरिहंत ऋषि का जुड़ना सर्वधर्म समभाव की भावना को भी बढ़ावा देता है l

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ऊर्जा गुरु भले ही एक जैन संत हो लेकिन उनकी पहुंच जन-जन तक है l योग और ध्यान के साथ ऊर्जा गुरु ने हमेशा अच्छी शिक्षा की बात की है l उनका मानना है की धर्म भी विज्ञान से अलग नहीं होता है और उन्होंने युवाओ को हमेशा धर्म की सीख देते हुए विज्ञान से जोड़ने की अद्भुत पहल की है l जिसकी वजह से लाखों युवाओं तक उनकी पहुंच है और लगातार इसमें बढ़ोत्तरी होती जा रही है ।

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