Published On : Fri, Dec 15th, 2017

शिक्षामंत्री विनोद तावड़े कर रहे शिक्षा का बाजारीकरण – मेस्टा

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नागपुर:
 महाराष्ट्र इंग्लिश स्कूल ट्रस्टीज एसोसिएशन ( मेस्टा ) की ओर से शुक्रवार को इंग्लिश मीडियम स्कूलों के संचालकों की ओर से विधानभवन पर मोर्चा निकाला गया. इस दौरान राज्यभर के शिक्षा संस्थाओं के संचालकों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. स्कूल संचालकों की मांग रही कि राज्य के सभी जिलों के आरटीई के अंतर्गत एडमिशन देनेवाली स्कूलों का बकाया 650 करोड़ रुपए दिया जाए, साथ ही नागपुर जिले की प्रतिपूर्ति रकम 86 करोड़ 44 लाख 56 हजार रुपए भी दिए जाएं.

इंग्लिश स्कूलों को बिजली बिल, पानी बिल व टैक्स कम लिया जाए, स्कूलों के विकास के लिए स्थानिक विधायक और सांसद निधि के उपयोग का नियम बनाया जाए, स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए विद्यार्थियों को प्रवेश लेने के लिए पहली स्कूल से स्कूल छोड़ने का दाखिला और दूसरे स्कूल की फीस भरने के एनओसी पत्र की आवश्यकता का नियम हो. कुल मिलाकर 15 मांगों को सरकार के सामने स्कूलों संचालकों ने रखा है.

इस मोर्चे का नेतृत्व मिस्टा के अध्यक्ष संजय तायड़े पाटिल ने किया. इस दौरान पाटिल ने शिक्षा मंत्री पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि शिक्षा का बाजारीकरण शिक्षामंत्री विनोद तावड़े की ओर से किया जा रहा है. 1100 दिनों में से 500 दिन भी शिक्षामंत्री अपने कार्यालय में नहीं बैठे होंगे. लेकिन अब तक करीब 576 जीआर राज्य के शिक्षकों और स्कूलों के लिए निकालने का काम विनोद तावड़े ने किया है. उन्होंने कहा कि शिक्षामंत्री ने अब तक कोई भी ठोस निर्णय नहीं लिया है.


स्कूलों के संचालकों ने आरटीई के अंतर्गत विद्यार्थियों को एडमिशन दिया, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक बकाया नहीं दिया है. केंद्र सरकार ने निधि दी थी, लेकिन राज्य सरकार ने निधि खा ली है. उन्होंने शिक्षामंत्री को लेकर कहा कि शिक्षामंत्री के हाथों शिक्षकों का शोषण हो रहा है. पाटिल ने मांग की है कि स्कूलों की सुरक्षा के लिए स्वतंत्र कानून की जरूरत है. उन्होंने शिक्षामंत्री को पद से हटाने की भी मांग की है. उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों को स्कूल चलाने देने पर भी सरकार विचार कर रही है.

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