Published On : Wed, Aug 3rd, 2016

जरुरी नहीं 5 वर्ष में पुरे कर दिए जाये वादे, विदर्भ के मुद्दे पर पार्टी को नहीं मिला बहुमत: मुरलीधर राव

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Murlidhar Rao
नागपुर:
पृथक विदर्भ राज्य को लेकर मचे घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी जनता से किया वादा निभायेगी क्या? यह सवाल पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मुरलीधर राव के वक्तव्य के बाद खड़ा हो गया है। नागपुर में पत्रकारों से रूबरू हुए मुरलीधर राव से जब स्वतंत्र विदर्भ राज्य निर्माण के वादे का सवाल उनसे पूछा गया तो उनका जवाब था कि सारे वादे 5 वर्ष में पुरे हो जाये यह संभव नहीं। पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा दिया गया यह जवाब चौंकाता है कि क्या वह उसी पार्टी के नेता है। जिसने अलग राज्य को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा और विदर्भ में ऐतिहासिक कामियाबी हासिल की। तो क्या अब ये माना जाये की पार्टी के शीर्ष नेतृव के मन में पृथक विदर्भ राज्य निर्माण का फ़िलहाल कोई इरादा नहीं है। विदर्भ में पार्टी के नेता विदर्भ में जनता से कुछ और कहते है। जबकि पार्टी की भूमिका कुछ और ही है। राव ऐसे अकेले नेता नही है। जिन्होंने ऐसा जवाब अलग राज्य के सवाल पर दिया हो इससे पहले पार्टी अध्यक्ष भी यह जाहिर कर चुके है की विदर्भ फ़िलहाल पार्टी की प्राथमिकता में नहीं है।

तो अब क्या यह मान लिया जाना चाहिए की राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी सार्वजनिक तौर पर जो भरोसा जताते है, वह महज कोरा आश्वाशन है। क्योंकि मुरलीधर राव ने तो साफ-साफ कह दिया कि चुनाव उन्होंने भले ही अकेले लड़ा हो पर अब वो गठबंधन में है। जिसका पालन करना पार्टी का धर्म है। वैसे भी जनता ने उनकी पार्टी को पूर्ण बहुमत दिया ही नहीं। पार्टी को बहुमत मिलेगा तब विचार होगा। पर तब तक विदर्भ को मजबूत करने का काम होगा।

दलित समाज लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा
देश में मोदी सरकार के आने के बाद दलितों पर अत्याचार की बढ़ रही घटनाओं की बात को मुरलीधर राव ने ख़ारिज करते हुए कहा कि ऐसा नहीं है कि ऐसी घटनाये पहली बार हो रही है। पर यह सरकार दलितों पर किसी भी तरह का अत्याचार बर्दाश नहीं करेगी। यह सामाजिक समस्या है। दलित लोकतंत्र का अभिन्न अंग है। उनका सर्वांगीण विकास सरकार की प्राथमिकता है। हालांकि अपनी ही पार्टी के विधायक राजा सिंह द्वारा दलितों पर दिए गए बयान से पल्ला झाड़ते हुए राव ने कहा कि मीडिया में दिखाई गई किसी खबर को सही नहीं माना जा सकता। हालांकि उन्होंने पार्टी नेता अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का उदहारण देते हुए ऐसे बयान देने वाले नेताओं को समझाया कि भाजपा संस्कारो की पार्टी है। शीर्ष नेताओ का अनुसरण प्रत्येक कार्यकर्त्ता और नेता को करना चाहिए।

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एक ही संस्था के दो अंगो में सोच की भिन्नता
मुरलीधर राव संघ की संस्था स्वदेशी जागरण मंच से जुड़े रहे है। यह संस्था केंद्र सरकार की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की लगातार आलोचना कराती आई है। विचारो के इस टकराव पर राव का कहना है कि पार्टी और स्वदेशी जागरण मंच में भिन्नता है। इस विषय को लेकर दोनों की सोच अलग-अलग हो सकती है। सरकार को अपनी नीतियों पर आधारित फैसले लेने पड़ते है। संस्था किसी खास सेक्टर को आधार बनाकर सोच बनाती है। जबकि सरकार को समग्रता के साथ सोचना पड़ता है।

कार्यकर्ताओ को दी जाएगी सभ्यता की सीख
पार्टी महासचिव के अनुसार इन दिनों पार्टी अपने 11 लाख कार्यकर्ताओ को प्रशिक्षण दे रही है। इस प्रशिक्षण में पार्टी के सिद्धांत, नीतिया और व्यवहार कुशलता की सीख दी जा रही है। लोकतंत्र में विरोधी पार्टी के नेता लोकतंत्र का हिस्सा है। इसलिए उनसे किस तरह का व्यवहार को इस बात की सीख भी कार्यकर्तोओ को दी जाएगी। 23 सितंबर से पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जनशताब्दी वर्ष की शुरुवात से यह उपक्रम शुरू हो जायेगा। मंडल-जिला-प्रदेश स्तर पर प्रशिक्षण दिया जायेगा। भारत छोड़ो आंदोलन को 70 वर्ष पुरे होने के उपलक्ष में राष्ट्रीयता की भावना को प्रसारित करने का अभियान भी चलाया जायेगा।

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