नागपुर: 63 साल पहले आज ही के दिन 28 सितंबर 1953 को नागपुर करार हुआ था। संयुक्त महाराष्ट्र में शामिल होने के समय क्षेत्र को विशेष दर्जा और भागेदारी मुहैय्या कराने के लिए यह करार किया गया था। करार में शामिल 11 शर्तो को मानना, उसका पालन करना संयुक्त महाराष्ट्र की सरकार के लिए बंधनकरार था। पर इन शर्तो का कभी पालन नहीं किया गया यह आरोप विदर्भ राज्य के समर्थक लगातार लगाते रहे है। मौजूद दौर में विदर्भ राज्य के लिए होने वाले आंदोलन में नागपुर करार जलाने का रिवाज हो चला है। बुधवार को एक बार फिर इस करार की होली जलाई गई। विदर्भवादी और राज्य के पूर्व महाधिवक्ता श्रीहरी अणे द्वारा निर्मित की गई पार्टी विदर्भ राज्य आघाडी ने संगठनो के साथ मिलकर नागपुर करार की होली जलाई। इस दौरान राज्य सरकार पर इस करार का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया।
इस प्रदर्शन के दौरान विदर्भवादियों ने फिर एक बार अलग स्वतंत्र विदर्भ राज्य की आवाज को बुलंद किया। इस प्रदर्शन में शामिल वरिष्ठ समाजसेवी उमेश चौबे ने कहा कि यह करार तत्कालीन राजनेताओं की चाल थी। उसी वक्त करार का विरोध किया गया था। करार शामिल सभी शर्तो का पालन ही नहीं किया गया। विदर्भ सत्ता की राजनीति का लगातार शिकार हुआ है।
राज्य में आई नई सरकार ने भी विदर्भ जनता साथ विश्वासघात किया है। जिसे भुलाया नहीं जा सकता अलग राज्य स्थापित कोई भी दल नहीं दे सकता इसे खुद जनता को लेना पड़ेगा। अब विदर्भ की जनता को अपने हक़ के लिए घरो से बाहर निकालकर सड़क पर उतरकर अपनी आवाज को बुलंद करना होगा।
संविधान चौक पर विदर्भ के समर्थन और महाराट्र के विरोध में जमकर नारेबाजी हुई। नागपुर के साथ विदर्भ के सभी जिलो में नागपुर करार की प्रति को जलाया गया। इस प्रदर्शन में विदर्भ राज्य अघाड़ी के साथ कई संगठन के लोग उपस्थित।
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