Published On : Mon, Apr 16th, 2018

विहिप के खिलाफ असंतुष्ट विहिप कार्यकर्ता करेँगे आंदोलन प्रवीण तोगड़िया के समर्थक ढाई हज़ार बजरंग दल कार्यकर्ताओ ने छोड़ा संगठन

Pravin Togadia

File Pic


नागपुर: विश्व हिंदू परिषद से डॉ प्रवीण तोगड़िया को जिम्मेदारी मुक्त किये जाने के विरोध में नागपुर में विहिप और बजरंग दल के लगभग ढाई हज़ार कार्यकर्ताओं से संगठन छोड़ दिया है। विष्णु सदाशिव कोकजे को अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद तोगड़िया को अपना नेता मानाने वाले उनके कट्टर समर्थक कार्यकर्ताओं ने मंगलवार से विश्व हिंदू परिषद के ख़िलाफ़ ही प्रदर्शन करने का निश्चय किया है। संविधान चौक पर तोगड़िया समर्थक आमरण अनशन पर बैठने वाले है इन असंतुष्ट कार्यकर्ताओं के मुताबिक उनका प्रदर्शन विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता पार्टी के ख़िलाफ़ होगा। कल तक विहिप की शाखा गौवंश संरक्षण अभियान के शहर प्रमुख रहे राजेश शुक्ला ने तोगड़िया के समर्थन में अपना पद छोड़ दिया है। उनकी ही तरह कई अन्य पदाधिकारियों ने अपना पद छोड़ा है। मंगलवार से अनशन पर बैठने वाले विहिप कार्यकर्ताओ में शुक्ला भी शामिल है। उनका कहना है विहिप को खड़ा करने में तोगड़िया की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनकी वर्षो की मेहनत का फल अब बीजेपी सत्ता के दौर पर चख रही है। हमें ऐसे नेतृत्व के अंतर्गत काम करने के लिए विवश किया जा रहा है जिसका संगठन से कोई लेना देना नहीं है।

संगठन का नियम कहता है की संगठन का व्यक्ति ही संगठन को नेतृत्व देगा। निचले स्तर से लेकर शीर्ष तक जो भी व्यक्ति पदाधिकारी बनता है उसे 10 दिनों का वर्ग करना होता है। विहिप के मौजूदा नेतृत्व करने वाले व्यक्ति राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते है वो बीजेपी के व्यक्ति है राज्यपाल रहे है यहाँ तक की चुनाव भी हारे है। एक तरह से यह पहली मर्तबा है जब संगठन का सामान्य कार्यकर्ता खुद को ठगा महसूस कर रहा है।देश के करोडो कार्यकर्ताओं के नेता वर्तमान में सिर्फ तोगड़िया है। कार्यकर्ताओं की माँग के विपरीत बिना चुनाव प्रक्रिया के नेतृत्व का चयन किया गया।

प्रदर्शन बीजेपी और विहिप के ख़िलाफ़
शहर के तोगड़िया समर्थक विहिप कार्यकर्ताओं को लगता है की उनके नेता के ख़िलाफ़ राजनीतिक साजिश हुई है। उन्होंने अपना सारा जीवन जनता के बीच अपने मुद्दों को प्रचारित-प्रसारित करने में बिता दिया। उनकी मेहनत के दम पर बीजेपी को सत्ता हासिल हुई। सरकार में आने के बाद भी जब उनके मुद्दों को नजरअंदाज किया आना शुरू हुआ तो उन्होंने सरकार से इसका ज़वाब माँगा लेकिन उन्हें ही सज़ा दी गई। राम मंदिर,धारा 370,गौवंश हत्या,कत्लखाने बंद कराने के वादों की जब तोगड़िया ने याद दिलानी शुरू की तो यह बात सरकार को खटकने लगी। गौरतलब हो की नागपुर में बजरंग दल के 23 हज़ार कार्यकर्ता है जिसमे बड़ी संख्या में तोगड़िया के समर्थक है। मंगलवार से गुजरात में खुद तोगड़िया आंदोलन पर बैठने वाले है और इसी के समर्थन में विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी आंदोलन करने की तैयारी में है।

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