Published On : Fri, Nov 22nd, 2019

भारत में शहरी नियोजन विस्फोटक स्तिथि में : डॉ. संजीव विद्यार्थी PIADS में अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार संपन्न

strong>नागपुर : शहरी विकास के नियमो की वजह से भारत के शहरो की अपनी पहचान आज अपना अस्तित्व खोने की कगार पर है।

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भारत के सभी नगर अपनी अलग पहचान रखते थे लेकिन जो पश्च्यात शैली में हमने डेवलपमेंट के पैमाने बनाये है उनमे अपनी-अलग पहचान रखने वाले नगर कुछ वर्षो में समाप्त हो जायेंगे।
महज आज से २५-३० वर्ष पूर्व बनारस, जयपुर, उज्जैन, नाशिक आदि जैसे अनेक शहर जिनकी वास्तुकला अपनी अलग पहचान रखती थी शहरी नियोजन के केंद्रीय नियमो ने उस पहचान पर बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है।

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साथ ही शहरी विकास व् नियोजन के पैमाने भारत में पश्च्यात देशो से स्वीकार किये लेकिन हमने ये ध्यान ही नहीं दिया की वे पैमाने सिमित आबादी के लिए थे उसी का परिणाम है की आज मुंबई, कोलकाता, दिल्ली जैसे शहर शहरी नियोजन में अपनी विस्फोटक स्तिथि तक पहुँच गए है व् इनका हल जल्दी नहीं निकाला गया तो वह स्तिथि भयानक हो जाएँगी।

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आज सम्पूर्ण विश्व की निगाह भारत पर टिकी है की शहरी जनसंख्या व् शहरो के नियोजन से भारत किस तरह निपटता है।

उपरोक्त उद्बोधन अमरीका के इलिनियोस विद्यापीठ के शहरी नियोजन विभाग के विभाग प्रमुख डॉ. संजीव विद्यार्थी इन्होने प्रियदर्शिनी इंस्टीट्यूट ऑफ़ आर्किटेक्चर एंड डिजाइन स्टडीज यंहा आयोजित सेमिनार को सम्बोधित करते हुवे कहे।

इस अवसर पर इलिनियोस विद्यापीठ की प्रो. ज़ोरिका मेडोविक, काउन्सिल ऑफ़ आर्किटेक्चर न्यू दिल्ली के प्रेसिडेंट व् पियाडस के डायरेक्टर प्रो. हबीब खान, प्रो. उदय गडकरी, आई. आई. इ. के सुनील देगवेकर, प्राचार्य प्रदीप पडगिलवार, प्रो. उज्ज्वला चक्रदेव, प्रो. मिलिंद गुजरकर प्रमुखता से उपस्तिथ थे।

इस अवसर पर इलिनियोस विद्यापीठ की प्रो. ज़ोरिका मेडोविक इन्होने बताया की योरोपियन देश किस तरह से प्रक्टिकल एजुकेशन को अपने अभ्यासक्रमों में शामिल कर देश को समृद्ध विद्यार्थी देने की दिशा में काम कर रहे है।

काउन्सिल ऑफ़ आर्किटेक्चर न्यू दिल्ली के प्रेसिडेंट प्रो. हबीब खान इन्होने बताया की काउन्सिल ऑफ़ आर्किटेक्चर के माध्यम से क़्वालिटी एजुकेशन को ध्यान में रखकर उस दिशा में कामो की शुरुवात हो चुकी है शिक्षा के क्षेत्र में किस तरह से सुधार लाये जा सकते उस पर काम हो रहे है।

सेमिनार में PIADS की डीन प्रो. मनीषा येलने, डीन प्रो. निखिल वसाड़े, डीन प्रो. अनुया किल्लेदार, प्रो. नीमा गुजरकर, प्रो. किशोर रेवतकर, प्रो. संजीव राउत, प्रो. सौरभ पालीवाल आदि सहित बड़ी संख्या में आर्किटेक्ट विद्यार्थी व् शिक्षक उपस्तिथ थे।

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