Published On : Sat, Aug 14th, 2021
By Nagpur Today Nagpur News

इंटक एकीकरण मामले में उठापठक

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– ददई दुबे-रेड्डी गुट में समझौता तो त्रिपाठी – तिवारी गुट ने मजदूर हित में एकीकरण जल्द जरूरी है लेकिन प्रियंका गांधी के उपस्थिति में हो फैसला

नागपुर – देश में प्रमुख अग्रणी मजदूर संगठनों में INTUC की अपनी महत्ता है।यह मजदूर सह राष्ट्र हित में अक्सर सक्रिय देखी गई।इसे मोदी सरकार ने ग्रहण लगा दिया और आज आलम यह है कि INTUC न सिर्फ 3 गुट में विभक्त होकर आपसी संघर्ष कर रहा,साथ ही मोदी सरकार ने अमूमन सभी सरकारी समितियों से पिछले 7 सालों से बाहर करवा दिया।दूसरी ओर INTUC की तीनों गुट में अहम त्रिपाठी – तिवारी गुट ने कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में एकीकरण से साफ मना कर दिया,इन्होंने साफ-साफ संकेत दिया कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की उपस्थिति में INTUC के सभी गुटों में आपसी समझौता होने के बाद विलय हो।

याद रहे कि INTUC असली-नकली की लड़ाई इन दिनों न्यायालय में चल रही,इसी तर्ज पर सरकारी समितियों से INTUC को बाहर रखा गया,कहा गया कि न्यायालयीन निर्णय बाद INTUC को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।

INTUC की ओर से सरकारी समितियों में प्रतिनिधित्व पाने के लिए ललायित रेड्डी गुट ने पहले अपने से अलग हुए केके सिंह/सोहन वाल्मिक गुट में मनोमिलन का प्रयास हुआ, ऊपरी तौर पर दोनों गुटों में एकीकरण बाद रेड्डी गुट की अहम बैठक नागपुर के रेडिशन होटल में हुई।

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इसके बाद रेड्डी के करीबी कांग्रेस नेता मलिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में INTUC के सभी तीनों गुटों को गत सप्ताह मनोमिलन के लिए दिल्ली में बुलाया गया.इस बैठक में रेड्डी गुट और ददई दुबे गुट सहर्ष उपस्थित हुए,लेकिन त्रिपाठी-तिवारी गुट ने परहेज किया।बैठक में दुबे-रेड्डी गुटों को औपचारिक रूप से एकीकरण होने तक सार्वजानिक बयानबाजी से परहेज रखने की हिदायत दी गई.

वहीं दूसरी ओर त्रिपाठी-तिवारी गुट ने मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में एकीकरण मामले पर आपत्ति जताई,उनका साफ़-साफ़ कहना है कि खड़गे हमेशा से ही रेड्डी की पक्ष में वकालत करते रहे है.त्रिपाठी-तिवारी की इच्छा है कि इंटक एकीकरण मामला कांग्रेस नेत्री प्रियंका गाँधी के समक्ष हो तो बैठक मजदुर हित में स्वास्थ्यवर्धक होगी।इसलिए भी कि प्रियंका गांधी को इंटक में चल रही उठापठक की पूर्ण जानकारी है.

फ़िलहाल प्रियंका गांधी विदेश दौरे पर है,उनके आने के बाद ही नए सिरे से इंटक का एकीकरण संभव है.इसी असली-नकली इंटक का मामला न्यायालय में विचाराधीन है,जल्द ही न्यायालय का निर्णय आने की संभावना है.

उल्लेखनीय यह है कि त्रिपाठी-तिवारी इंटक का नेतृत्व पहले महाबल मिश्रा कर रहे थे,लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनका पुत्र आप से न सिर्फ उम्मीदवार बना,बल्कि जीतकर विधायक भी बन गया.इसी चक्कर में उन्हें पक्ष से निकाल दिया गया.

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