Published On : Fri, Jan 2nd, 2015

बालापुर : बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि का कहर

 

  • बालापुर शहर मे 79 मि.मी. बारिश
  • आंधी के चलते शाला, वाहन, घरो पर गिरे पेड , छते उडी, र्इंट भट्टे ध्वस्

raining in buldhana
बालापुर (अकोला)। वर्ष 2014 के समापन के साथ ही नववर्ष 2015 का आगाज शहर तथा समूचे परिसर के लिए संकट का न्यौता लेकर आया है. बीती रात शहर तथा परिसर मे तेज आंधी के साथ भारी वर्षा हुई. कही-कही नीबू के आकार के तो कही बेर के आकार के ओले पडने से शहर समेत परिसर का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. विशेष रूप से बालापुर शहर की अनेक जगहो पर वर्षोे पुराने पेड धराशायी हो गय. बीत रात से जारी बेमौसम बारिश तथा आंधी के कारण जिला परिषद शाला के प्रांगण के पेड गिर पडे साथ ही कक्षाओ के कमरो की छत भी उड गई. मोमिनपुरा स्थित मस्जिद से सटे दो वर्ष पुराने नीम का पेड जहां हाजी गुलाम शब्बीर की मालिकाना टाटा सुमो (एमएच 19 क्यु 6312), ट्रैक्टर (एमएच 30 जे 5712), ट्रॉली (एमएच 26 एल 2693), मोटरसाइकिल (एमएच 30 एएम 4414 ) तथा (3153) पर गिर पडा, जिसके कारण सभी वाहन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए, इसके अलावा शहर के न्यानगर, राजपुतपुरा, बल्लोच पुरा, विश्राम गृह मार्ग पर स्थित कच्चे मकानो की दीवारे ढह गर्इं. बालापुर से सटे र्इंट भट्टा व्यवसायियो को लाखो रूपयो का नुकसान हुआ है. बीते चौबीस घटे मे शहर मे 79 मि.मी., वाडेगाव मे 30 मि.मी., हातरूण मे 40, बोरगाव वैराळे 40, पारस 59, निंबा 20, व्याला 252, तथा उरल मे 10 मि.मी.वर्षा दर्ज की गर्इं है. तहसीलदार समाधान सोलंके से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर के अब तर 7 घर मालिको ने शिकायत दी है.

हातरूण में फसलो का काफी नुकसान
बालापुर तहसील के हातरूण परिसर मे बुधवार की रात हुई बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि ने रबी की तुअर, कपास समेत चना, करडी आदि फसलो का काफी नुकसान हुआ. इस ओलावृष्टि कारण किसानो के मुंह का निवाला छिन गया है. बुधवार की देर रात ग्राम मांजरी मे तेज बारिश हुई साथ ही बेर के आकार के ओले गिरे जिसमे खेत की फसले जमीदोज हो गई. इस अतिवृष्टि से कपास क फसल सबसे अधीक नुकसान होने की जानकारी है. बेमौसम बारिश के कहर ने फिर एक बार किसानो को आर्थिक संकट मे खडा कर दिया है. इस दरमियान प्रशासन दवारा नुकसान का सर्वे करते हुए किसानो को तुरंत मुआवजा देने की मांग की जा रही है.

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पातुर तहसील में भी बरसे ओले
तेज हवा के साथ हुर्इं झमाझम बारिश ने 31 दिसंबर को शहर के साथ ही तहसील मे भी अपना कहर बरपाया. बुधवार को बारिश सारी रात जारी थी. गांव मे छतो के टिन उडे बिजली के तार टुटे, बिजली रात 10 से 3 बजे तक गुल रही. खेत तहस नहस हो गए, 30 हजार हेक्टेयर खेतो का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है. गांव में हुर्इं बारिश तथा ओलावृष्टि के चलते फलों के बाग एवं फूलों की खेती का नुकसान हुआ है. खरीफ की फसल के बाद अब रबी की फसल पर बेमौसम बारिश ने बुरा असर डाला, जिससे एक बार फिर किसानों पर आर्थिक संकट गहरा गया है. पातुर शहर एवं तहसील के बहुत से गावों में बुधवार की सुबह से ही बादल छाए रहें शाम में वर्षा की शुरूआत हो गई. रातभर जोरों की बारिश होती रही. तहसील के तुलंगा, चांगेफल, खेट्री, चतारी, चान्नी आदि गांवों में ओले गिरे. बेमौसम बारिश से खरीफ की तुअर, कपास की खेती की साथ रबी में गेहूं, चना, प्याज की फसलों का नुकसान हुआ है. बुधवार को लगभग 47 मि.मी. बारिश हुर्इं.पातुर सरकल 55 मि.मी. बाभुलगाव सरकल 44 मिमी, आलेगाव सरकल 48 मिमी, सस्ती सरकल 42 चान्नी सरकल 44 मिमी बारिश दर्ज की गई.

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