Published On : Wed, Mar 25th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

गुजरात विधानसभा में UCC बिल पास, समान नागरिक संहिता लाने वाला दूसरा राज्य बना

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गुजरात विधानसभा ने मंगलवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास कर दिया. पास होने से बिल पर 7 घंटे तक बहस भी हुई. बीजेपी ने इसे समानता सुनिश्चित करने वाला एक ऐतिहासिक सुधार बताया, जबकि कांग्रेस ने इसका जोरदार विरोध करते हुए कहा कि यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. कांग्रेस ने इसे ‘मुस्लिम विरोधी’ बताया.

यह बिल सभी धर्मों की शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक समान कानून का प्रावधान करता है. यह बिल विधानसभा में ध्वनिमत से पास हो गया. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इसका विरोध किया और इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की.

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार सुबह इस बिल को पेश किया था. 7 घंटे से भी ज्यादा लंबे समय तक चली बहस के बाद यह बिल पास हो गया. इसके साथ ही गुजरात अब उत्तराखंड के बाद दूसरा राज्य बन गया है, जहां UCC होगा. उत्तराखंड फरवरी 2024 में UCC पास करने वाला पहला राज्य बना था.

क्या है इस बिल में?

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इस बिल को ‘गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड 2026’ नाम दिया गया है. कानून बनने के बाद यह पूरे राज्य में तो लागू होगा ही, साथ ही गुजरात के उन लोगों पर भी लागू होगा जो राज्य के बाहर रह रहे हैं. हालांकि, यह प्रस्तावित कानून अनुसूचित जनजातियों (ST) और कुछ ऐसे समुदायों पर लागू नहीं होगा, जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित हैं.

बिल के ‘उद्देश्य और कारण’ में कहा गया है कि इस कोड का मकसद एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है. इसमें लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन का प्रावधान है, साथ ही एक औपचारिक घोषणा के जरिए उन्हें खत्म करने का भी प्रावधान है.

यह बिल बहुविवाह पर भी रोक लगाता है. इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति अपने जीवनसाथी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी नहीं कर सकता. इसमें कहा गया है कि इस कोड के तहत शादी तभी वैध मानी जाएगी, जब शादी के समय दोनों में से किसी भी पक्ष का कोई जीवित जीवनसाथी न हो.

सरकार का क्या है कहना?

बिल पेश करते समय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि एक एकजुट और अविभाजित राष्ट्र के लिए एक समान कानूनी ढांचा जरूरी है.

उन्होंने कहा, ‘हमारे प्राचीन श्लोक भी कहते हैं कि सत्य एक ही होता है, भले ही उसे अलग-अलग तरीकों से व्यक्त किया जाए और अगर सत्य एक है, तो भले ही धर्म अनेक हों, न्याय एक ही होना चाहिए.’

संविधान का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा, ‘संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत, देश के हर नागरिक के लिए कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित की गई है. और उसी संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को यूनिफॉर्म सिविल कोड की दिशा में आगे बढ़ने का निर्देश देता है. अब, UCC के लागू होने से नागरिकों के धर्म या जाति के आधार पर उनके बीच विभाजन या भेदभाव से जुड़ी किसी भी नीति या विवाद को खत्म कर दिया जाएगा.’

कांग्रेस ने किया विरोध?

हालांकि, कांग्रेस के विधायक शैलेश परमार ने इसका विरोध करते हुए कहा, ‘आपने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह बिल जल्दबाजी में पेश किया है. हमारी मांग है कि इसे विधानसभा की सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए.’

कांग्रेस के ही एक और विधायक अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि यह बिल संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन करता है. उन्होंने कहा, ‘संविधान का अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता और कानूनों का समान संरक्षण सुनिश्चित करता है. ऐसा प्रतीत होता है कि यह बिल इस मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है. आप सदन में बहुमत की मदद से लोगों के अधिकारों को छीनना चाहते हैं.’

कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने इस कानून को ‘मुस्लिम-विरोधी’ करार दिया.

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