जिसके खिलाफ शिकायत उसी के पास भेजा जांच करने का पत्र

नागपुर: नागपुर यूनिवर्सिटी के परीक्षा भवन में की गई शिकायत पर जांच करने का पत्र सहायक कुलसचिव ने उसी को सौंपा है जिसके खिलाफ यह शिकायत की गई है. इस हास्यपद मामले की चारों और चर्चा हो रही है. जानकारी के अनुसार सुचना अधिकार कार्यकर्ता महासंघ के जिला सचिव आरिफ पटेल ने नागपुर यूनिवर्सिटी के परीक्षा भवन में आरटीआई आवेदन कर पारशिवनी के अरविंद इंडो पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल ने समाजशास्त्र विषय में रेगुलर एम.ए की डिग्री की जानकारी प्राप्त की थी. राजेश्री देशमुख ने यह पाठ्यक्रम स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर रहते हुए प्राप्त किया था.
नियम के अनुसार मुक्त विद्यापीठ से उन्होंने अपनी डिग्री पूरी न करते हुए नागपुर यूनिवर्सिटी के अंतर्गत पारशिवनी स्थित महात्मा गांधी आर्ट कॉमर्स कॉलेज से पूरी की थी. इस दौरान प्रिंसिपल देशमुख ने स्कुल से कोई भी छुट्टी नहीं ली थी. यह भी सिद्ध हो चुका है. इस जानकारी के सबूत के तौर पर आरिफ पटेल ने अपने संगठन द्वारा यूनिवर्सिटी के कुलगुरु, कुलसचिव और परीक्षा संचालक से लिखित शिकायत देकर राजेश्री देशमुख इनकी जानकारी दी थी और इसकी जांच कर उन पर फौजदारी गुन्हा दाखिल करने की मांग की थी और एम.ए की पदवी रद्द करने की मांग की गई थी.
पटेल द्वारा इस मामले की शिकायत करने के एक महीने से ज्यादा का समय होने के बाद भी नागपुर यूनिवर्सिटी द्वारा कोई भी कार्रवाई न होते हुए देख पटेल ने कुलगुरु और परीक्षा भवन के संचालक को जानकारी देकर आरटीआई के तहत कार्रवाई करने की जानकारी मांगी थी. इस पर परीक्षा भवन के सामान्य परीक्षा विभाग का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे सहायक कुलसचिव मोतीराम तडस ने आवेदक को पत्र लिखकर यह जानकारी दी कि प्रिंसिपल राजेश्री देशमुख ने नौकरी करते हुए पढ़ाई की यह मामला स्कूल और मैनेजमेंट के अधीन आता है और यूनिवर्सिटी मार्फ़त शिकायत करना उपयुक्त नहीं होने के कारण इस मामले की जानकारी लेने के लिए उसी प्रिंसिपल और महात्मा गांधी कॉलेज को पत्र भेजा गया है.
क्या अब प्रिंसिपल खुद पर ही कार्रवाई करेंगी ?
पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि सहायक कुलसचिव मोतीराम तडस के भेजे हुए पत्र से ऐसा लगता है कि तडस ने शिकायत आवेदन और आरटीआई आवेदन पूरी तरह से नहीं पढ़ा और न ही निरिक्षण किया है. इस मामले में नागपुर यूनिवर्सिटी को अगर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं होगा तो उन्होंने शिक्षा विभाग और यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ विभाग को शिकायत आवेदन किया जाना चाहिए था. साथ ही सूचना के अधिकार के आवेदन में भी आवेदक को जानकारी देनी जरूरी थी. लेकिन सहायक कुलसचिव ने इस बारे में खुद जांच न करते हुए जिसके विरोध में शिकायत है उसी प्रिंसिपल और महात्मा गांधी कॉलेज को सीधे सीधे पत्र भेजकर अपने स्तर पर जानकारी भेजने की सूचना दी है.
स्कूल की ही संस्था का महात्मा गांधी कॉलेज होने से प्रिंसिपल पर कार्रवाई या किस प्रकार कि क्या जांच होगी यह समझ से परे है. साथ ही प्रिंसिपल खुद ही पर कौन सी कार्रवाई करेगी और नागपूर यूनिवर्सिटी को कैसी जानकारी देगी यह सवाल भी अब उठ रहा है. ऐसी गैरजिम्मेदाराना मामले की चर्चा आरटीआई कार्यकर्ताओं में जोरों से शुरू है. यूनिवर्सिटी से विद्यार्थी पदवी पूरी कर उच्च पदों पर आसीन होते है उसी यूनिवर्सिटी के सहायक कुलसचिव ने ऐसा गैरजिम्मेदाराना और हास्यपद कारनामा करना कितना सही है.
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