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    Published On : Wed, Mar 18th, 2020

    क्या मनपा पर बैठा हैं प्रशासक !

    – महापौर सह सत्तापक्ष,विपक्ष सभी ‘बैकफुट’ पर

    नागपुर : ४९ दिन के सफर में मनपायुक्त तुकाराम मूंढ़े ऐसा वातावरण तैयार किया,मानो मनपा पर प्रशासन राज हैं.इस दौरान सर्वोच्च निर्णायक मंडल अर्थात आमसभा व विशेष सभा के निर्णयों को सिरे से तिलांजलि दी जा रही तो दूसरी ओर गैरकानूनी कृतों को तहरिज दिया जाना सिर्फ और सिर्फ जब किसी मनपा पर प्रशासक को बैठाया जाता हैं तब ऐसा वातावरण इख़्तियार होता हैं.

    सत्तापक्ष अस्वस्थ्य
    मूंढ़े पहले दिन से नियम की आड़ लेकर परंपरा को तोड़-मरोड़ रहे.इससे मनपा से जुड़े खाकी ( कर्मी/अधिकारी) और खादी (पदाधिकारी/नगरसेवक वर्ग) अस्वस्थ्य हो गए.पिछले ४८ दिनों के दरम्यान आयुक्त मूंढ़े ने नियम की आड़ में सत्तापक्ष के मंसूबों पर पानी फेरती जा रही,जिसका नज़ारा गत दिनों आयुक्त के संशोधित व प्रस्तावित बजट में दिखने को मिला।महापौर सह सभागृह के आदेशों को खुलेआम कचरे के टोकड़ी में डाल रहे फिर भी सत्तापक्ष सह विपक्ष की चुप्पी समझ से परे हैं.जैसे जैसे आयुक्त मनपा में रम रहे,वैसे वैसे मनपा सह शहर में अपनी पकड़ मजबूत करते जा रहे.

    विपक्ष में ३ फाड़
    मूंढ़े और उनकी कार्यशैली के मसले को लेकर विपक्ष में ३ फाड़ हैं.एक गुट मूंढ़े के खिलाफ सार्वजानिक तौर पर आग-बबूला हो रहा,इस गुट ने अपने आका से मूंढ़े की शिकायत की हैं,इनके आका ने इन्हें आश्वस्त किया हैं कि वे जल्द ही इनका पलायन का टिकट कटवा देंगे।

    दूसरा गुट मूंढ़े की खुलेआम गुणगान कर रहा.इनके विरोधियों का कहना हैं कि समर्थन करने वाले के ऊपर करोड़ों का संपत्ति कर बकाया हैं,इस पर लगी ब्याज माफ़ी के लिए वे अपना मार्ग प्रसस्त कर रहे.तीसरा गुट मूंढ़े के कारनामों से इसलिए खुश हैं कि क्यूंकि मूंढ़े सत्तापक्ष पर कहर ढा रहे,सत्तापक्ष आजतक पिछले ढाई वर्ष से सभी स्तर पर एकतरफा निर्णय ले रहा था,सभागृह भी ठीक से नहीं चला रहे थे.आज सिरे से उनकी बोलती बंद हो गई हैं.

    वहीं मनपा २-ढाई दशक से मनपा में कार्यरत कर्मियों का मूंढ़े के संशोधित व प्रस्तावित बजट को ‘फ्यूचर नागपुर’ का नाम दिए जाने पर कहना हैं कि जो किसी भी मनपा में २ साल ठीक से नहीं रहा वह नागपुर के २ दशक का भविष्य बनाने का स्वांग रच रहा.

    बाल्या तो तवज्जों तो शेष को दरकिनार
    मनपा में लगभग दर्जन भर विशेष समितियां हैँ.इनमें से मूंढ़े परिवहन समिति सह उसके सभापति बाल्या बोरकर को तहरिज दे रहा,ऐसा खुद बोरकर का मानना हैं.शेष समिति सभापति या उनके पत्र को मूंढ़े अपने अंदाज में नज़रअंदाज कर रहे.

    फिर चाहे स्थाई समिति हो या फिर अन्य कोई समिति।परिवहन समिति सभापति के अनुसार उनकी सिफारिशों को मूंढ़े गंभीरता से ले रहे और मांग अनुरूप सहयोग कर रहे.वहीं स्थाई समिति सभापति को संशोधित व प्रस्तावित बजट के माध्यम से इत्तिलाह दे दिए कि २६०० करोड़ के ऊपर का बजट पेश करने की हिमाकत नहीं करना।

    नज़रअंदाजगी से क्षुब्ध विधि समिति सभापति अधिवक्ता धर्मपाल मेश्राम ने तो आयुक्त मूंढ़े पर खुलेआम आरोप लगाया कि वे न पत्रों और न ही व्यक्तिगत मुलाकात पर हुई चर्चा को महत्व दे रहे.वे अबतक ६ पत्र भेजे और एक दफे मुलाकात कर चुके हैं.पत्रों की अहमियत पर आयुक्त की लापरवाही पर खेद प्रकट किया।शेष समिति व उसके सभापति स्वयं ही निष्क्रिय हो गए.

    अधिकारी वर्ग का जी-मचल रहा
    न काम करने वाले और चुनिंदा काम करने वालों सभी को मूंढ़े एक ही तराजू में तौल रहे.२ अतिरिक्त आयुक्त,कैफो सह उपायुक्त के ५ रिक्त पद भरने के लिए मूंढ़े अपना दमखम नहीं दिखा रहे,एक उपायुक्त का तबादला और कैफो को वापिस उनके मूल विभाग भेजने के आदेश के बावजूद अपनी जिद्द पर उन्हें मनपा में रोक रखें हैं,इन दोनों का भी मन नहीं लग रहा फिर भी मनममोस के मनपा में ड्यूटी बजा रहे.मूंढ़े को इन दोनों के बदले जबतक अधिकारी नहीं मिलता तबतक इनको मनपा से छुट्टी मिलनी आसान नहीं। शेष रिक्त पदों पर मूंढ़े राज में कोई आने को तैयार नहीं।

    कर वसूली के नाम पर खानापूर्ति
    मूंढ़े के कार्यकाल में न संपत्ति और न ही जल कर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं होने वाली।पिछले आर्थिक वर्ष २०१९-२० के बजट में अंकित टार्गेट के अनुसार संपत्ति कर(५०० करोड़) आधा भी नहीं पहुंची।इसका मूल कारण हैं सभी जोन के वार्ड अधिकारी कर न भरने वालों को संरक्षण दे रहे,दूसरा बड़ा कारण हैं कि विभाग के कामकाज के हिसाब से कर्मियों का आभाव और तीसरा बड़ा कारण हैं साइबर टेक कंपनी के द्वारा किये गए घोलमाल और चौथा बड़ा कारण हैं इस संबंध में वर्षों से सुनवाई न होने के कारण या तो करदाता/डिफॉल्टर कर नहीं भर रहे या फिर न्यायालय के शरण में हैं इसको व्यवस्थित करने में विभाग की माथापच्ची हो रही. इसका आभास होता देख आयुक्त ने अपने संशोधित व प्रस्तावित बजट में वर्ष २०२०-२१ के लिए संपत्ति कर का टार्गेट २८९ करोड़ कर दिया गया.अर्थात अब हर वर्ष २५० करोड़ का बकाया ‘कैरी फॉरवर्ड” होता रहेंगा।

    ऐसा ही कुछ हाल जल कर संबंधी मामलों का हैं,उदहारण आशीनगर जोन अंतर्गत कोराडी से लगी बस्तियों में अवैध कनेक्शन भरमार होने की सूचना मिली हैं.समाचार लिखे जाने तक अबतक संकलित करों में अधिकांश चेक द्वारा भुगतान किया गया.मूंढ़े के डर से बकायेदारों ने चेक तो दे दिए लेकिन इस दफे चेक बाउंस के मामले पिछले वर्षों के बनस्पत ज्यादा होने की संभावना जताई जा रही हैं.

    केंद्रीय मंत्री के स्वप्न प्रकल्पों को लेकर आयुक्त गंभीर
    नाग नदी परियोजना,जर्जर सीवेज व्यवस्था में सुधार,गंदे पानी से बिजली निर्माण ,जलापूर्ति व्यवस्था २४ बाय ७ और परिवहन सेवा आदि नगर के रहवासी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के स्वप्न प्रकल्पों में से एक हैं,इस सभी प्रकल्पों को मूंढ़े ने अपने बजट में गंभीरता से गुणवत्तापूर्ण स्थान दिया।

    अर्थात मूंढ़े का नागपुर में आने के मसले में उन्हें नागपुर भेजने वाले ने गडकरी को विश्वास में लिया होंगा जरूर,अन्यथा सत्तापक्ष को सहयोग न करने वाले अधिकारियों की अबतक समय समय पर गडकरी द्वारा क्लास लिया जाता रहा.गडकरी की इस मामले में चुप्पी सत्तापक्ष के समक्ष कई सवाल खड़े कर रही हैं.


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