Published On : Wed, Jul 14th, 2021

तिकड़ी सरकार में खटपट

Advertisement

– शिवसेना का जनसंपर्क अभियान कई सवाल खड़े कर रहा

नागपुर : भाजपा की हटधर्मिता से राज्य में बहुमत रहने के बावजूद युति की सरकार नहीं बनी,जिसका तब से भाजपा को और हाल-फिलहाल से सेना को अफ़सोस हो रहा हैं.क्यूंकि भाजपा केंद्र का इस्तेमाल कर रही तो तिकड़ी सरकार को एनसीपी पग-पग पर दबा रही और नज़रअंदाजगी पर कांग्रेस आपा खो रही.नतीजा या तो तिकड़ी सरकार में दरार आकर गठबंधन टूट जाएगा या फिर गठबंधन टूटने पर भाजपा नहीं नरम हुई तो उपचुनाव की नौबत आ सकती हैं.शायद इसी आभास को लेकर शिवसेना ने जनता और शिवसैनिक के मध्य ‘शिवसंपर्क अभियान’ की शुरुआत कर दी हैं.

Advertisement

इसका पहल नागपुर जिले के सावनेर तहसील से शुरू की गई.इस संदर्भ में विगत दिनों एक अहम् बैठक विधायक व खनिकर्म महामंडल के अध्यक्ष के नेतृत्व में ली गई.बैठक में जिला प्रमुख,जिला उपप्रमुख,तहसील के पदाधिकारी उपस्थित थे.

Advertisement
Advertisement

बैठक में उद्धव ठाकरे ने बतौर मुख्यमंत्री कोरोना काल में क्या-क्या किए,उसे गिनवाए गए,जिसे जन-जन तक प्रचारित करना,संगठन बढ़ाने पर जोर देना,स्थानीय सामाजिक गतिविधियां बढ़ाना आदि विषयों पर उपस्थितों का मार्गदर्शन किया गया.इसके उपरांत उपस्थितों के सवाल-समस्याओं की ‘नोटिंग’ की गई.

उल्लेखनीय यह हैं कि शिवसेना के निर्माण/गठन बाद विदर्भ को शिवसेना द्वारा तरजीह नहीं दी गई.विशेष कर नागपुर जिले में शिवसेना जो पनपी उसका प्रमुख कारण था,तब के जिला संपर्क प्रमुख संजय निरुपम।उनकी मेहनत का असर था कि जिले से सांसद और विधायक चुना कर आए,केंद्रीय मंत्री तक बने.उनके पक्ष त्यागने के बाद जिले के सांसद और विधायक भाजपा पर पूर्णतः आश्रित हो गए.

निरुपम काल में शिवसैनिकों द्वारा किये जाने वाले आंदोलनों में उनके भरोसे कई पुलिसिया मामले शिवसैनिकों ने अपने ऊपर ले लिये लेकिन शिवसेना ने उन शिवसैनिकों के लिए कुछ नहीं किया और न आज सरकार में रहने के बावजूद कुछ कर रहे.

जिला प्रमुखों में क्षेत्रीय बंटवारा से उसका अहम् घटा दिया गया,नतीजा पहले सा शिवसेना में आक्रामक नहीं रहा.

आंदोलन/कार्यक्रम/जनसम्पर्क के आयोजन पर होने वाला खर्च इतना बढ़ गया कि पदाधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लग गए.इसके लिए पदाधिकारियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के कोई ठोस उपाययोजना नहीं किये गए और न ही भविष्य में उम्मीद हैं.नतीजा शिवसैनिक पार्टी गतिविधियां में खुद को झोंकने से कतराने लगे.

आज जिले में सांसद भाजपा के भरोसे हैं,इसके अलावा विधायक से लेकर ग्राम पंचायत सदस्य खुद के बल पर अपने अपने क्षेत्र में सेना का झंडा फड़का रहे हैं.

समय रहते शिवसेना ने उक्त खामियों में सुधार नहीं की तो फिर चाहे कितने भी ‘शिवसंपर्क अभियान’ चला लो,कोई फायदा नहीं होने वाला।

कांग्रेस मंत्री लगे हैं दोहन में
तिकड़ी सरकार की अस्थिरता से भलीभांति कांग्रेस मंत्री-संत्री वाकिफ हैं.इसका आभास खुलेआम नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष कर चुके हैं,क्यूंकि वे इस अस्थिरता/असमानता से जूझ रहे हैं.हद्द से ज्यादा जिल्लत की नौबत आई तो कांग्रेस गठबंधन से अलग अलग हो सकती हैं.इसे बचाने और इन ज्वलंत समस्याओं पर समीक्षा के लिए कांग्रेस आलाकमान ने अपने प्रतिनिधि मुंबई में भेजा हैं,जो सभी से चर्चा कर संभावनाएं तलाश रहे हैं.

दूसरी ओर कांग्रेस के मंत्री विशेष कर विदर्भ के,वे सरकार की अस्थिरता को देख स्वार्थपूर्ति में लीन हो चुके हैं,फिर चाहे कितनी भी अनियमितता ही क्यों न करनी पड़े.इस फेर में किसी भी स्तर का लांछन क्यों न लगे उसे तूल देने के बजाय अपने ध्येय पूर्ति पर ध्यानकेंद्रित किये हुए हैं.

मंत्रियों के उक्त रवैय्ये से पक्ष के कार्यकर्ता संभ्रम में हैं,क्यूंकि उनके लिए उनके नेता कुछ ठोस सोच नहीं रहे.इसका नतीजा आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में देखने को मिलेगा।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
 

Advertisement