Published On : Mon, Dec 2nd, 2019

बुलढाना पहुंचा टिपेश्वर का टी1 सी1 बाघ

नागपुर. यवतमाल जिला टिपेश्वर अभयारण्य का ‘टी१-सी१’ यह बाघ 5 महीनों में 1300 किमी का सफर करते हुए बुलढाना जिले के ज्ञानगंगा अभयारण्य जा पहुंचा. इस बाघ को 27 मार्च 2019 को रेडियो कालर लगाने के बाद जून माह में टिपेश्वर अभयारण्य छोड़ा गया था. टी१-सी१ बाघ का जन्म जून २०१६ में टिपेश्वर अभयारण्य में हुआ. टी. बाघिन के सी2 और सी3 ऐसे 2 शावक हैं. वर्ष २०१९ की शुरुआत में तीनों भी शावक अपनी मां से बिछड़ गए थे.

देहरादून के भारतीय वन्यजीव संस्था के डा. पराग निगम और डा. बिलाल हबीब के नेतृत्व में २५ मार्च को सी1 और २७ मार्च २०१९ को सी3 बाघ को पकड़कर रेडियो कालर लगाया गया. मां से अलग होने के बाद नये क्षेत्र को तलाशने और गतिविधियों का अध्ययन करने के उद्देश्य से दोनों को रेडियो कालर लगाया गया. रेडियो कालर की मदद से यह सामने आया है कि सी3 और सी१ बाघ पांढरकवड़ा विभाग के समीप और तेलंगाना की सीमा पर अधिवास कर रहे हैं.

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जुलाई २०१९ में सी3 बाघ तेलंगाना में चला गया और आदिलाबाद शहर के एकदम करीब पहुंच गया, किंतु वहां लोगों की चहलपहल होने के कारण वह वापस टिपेश्वर लौट गया. इस दौरान पेंच बाघ प्रकल्प, आदिलाबाद विभाग, नांदेड़ विभाग और वन विकास महामंडल किनवट ने मई २०१९ में एक साथ मिलकर सर्वेक्षण अभियान शुरू किया. इस सर्वे के अनुसार जून २०१९ में यह कारिडार के बाहर होने का स्पष्ट हुआ.

अगस्त और सितंबर के दौरान यह बाघ आदिलाबाद और नांदेड़ विभाग के अंतरराज्यीय जंगल में काफी समय तक घूमता रहा. इसके बाद उसने कुछ समय पैनगंगा अभयारण्य में भी बिताया. अक्टूबर माह में वहां से बाहर निकलकर बाघ पुसद और उसके बाद ईसापुर अभयारण्य में पहुंचा. माह के अंत में बाघ ने मराठवाड़ा परिसर के हिंगोली जिले में दस्तक दी.

3 वर्ष का यह बाघ गत 5 महीनों का सफर तय कर बुलढाना जिले में पहुंचा. चिखली और खामगांव आने के बाद 1 दिसंबर को बाघ ज्ञानगंगा अभयारण्य के दूसरे संरक्षित क्षेत्र में दिखाई दिया. बाघ के इस प्रकार स्थानांतरण करने से वैज्ञानिक अध्ययन करने की जरूरत निर्माण हो रही है. ऐसा पेंच व्याघ्र प्रकल्प के क्षेत्रीय संचालक व मुख्य वनसंरक्षक डा. रविकिरण गोवेकर ने बताया.

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