Published On : Thu, Jul 7th, 2022

तृतीयपंथी समुदाय सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित

नागपुर– राज्य सरकार ने दो साल पहले गठित तृतीयपंथी कल्याण मंडल के लिए 5 करोड़ रुपये आवंटित किए थे. इस निधि का कोई उपयोग नहीं किया गया. इस साल के बजट में ऋण देने सम्बन्धी योजना की घोषणा की गई थी। हालांकि इन दोनों योजनाओं का लाभ तृतीयपंथी तक नहीं पहुंचा है।

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कांग्रेस-एनसीपी के कार्यकाल के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के कार्यकाल में तृतीयपंथी कल्याण मंडल की स्थापना का आंदोलन शुरू हुआ था। बाद में यह विषय ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद 2015 में तत्कालीन सामाजिक न्याय मंत्री राजकुमार बडोले ने मंडल के लिए पहल की। सरकार का फैसला 2019 में लिया गया था।

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इसे महाविकास आघाड़ी के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सरकार ने जून 2020 में सत्ता में आने पर लागू किया था। तृतीयपंथी सुरक्षा व कल्याण मंडल की स्थापना की गई। तृतीयपंथी के अधिकारों के कल्याण और संरक्षण के लिए एक कल्याण बोर्ड की स्थापना की गई थी। हालांकि इन दो वर्षों के दौरान स्वरोजगार के लिए ‘ऋण देने’ समेत किसी भी योजना का लाभ किसी तृतीयपंथी को नहीं मिला है।

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केवल एक बैठक ऑनलाइन
तृतीयपंथी कल्याण मंडल के सदस्यों ने सामाजिक न्याय मंत्री धनंजय मुंडे की उपस्थिति में एकल ‘ऑनलाइन’ बैठक की। यह कहा गया था कि तृतीयपंथी का सर्वेक्षण करने और उनकी संख्या निर्धारित करने के साथ-साथ यह अध्ययन करने के लिए एक अध्ययन समूह का गठन किया जाएगा कि किन योजनाओं को शामिल किया जा सकता है। उन्होंने सचिव और आयुक्त को ‘ऋण देने की योजना’ में तेजी लाने के भी निर्देश दिए.लेकिन, ये निर्देश अंत तक ठंडे बस्ते में रहे।

1500 रुपये की सहायता से भी वंचित
लॉकडाउन के दौरान तृतीयपंथी से मदद मांगने के बाद प्रत्येक तृतीयपंथी के लिए 1,500 रुपये की घोषणा की गई। हालांकि,रानी ढवले ने अफसोस जताया कि नागपुर में किसी तृतीयपंथी को यह मदद नहीं मिली।

किन्नर विकास बहुउद्देशीय सामाजिक संगठन की अध्यक्ष रानी ढवले ने जानकारी दी कि सरकार के पास तृतीयपंथी के आंकड़े नहीं हैं। इस वजह से तृतीयपंथी के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक विकास में कितना भी प्रयास क्यों न किया जाए, मदद कैसे की जाए, इसकी कोई योजना नहीं है। संकट के समय इस योजना का लाभ नहीं मिला।

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