Published On : Thu, May 17th, 2018

दूषित पानी की जलापूर्ति से शहर की जनता हलकान, नलों में पानी के साथ इल्लियाँ, कीड़े आने की शिकायत

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नागपुर: आज कल जितना पानी नलों से नहीं गिर रहा उससे ज़्यादा शहरवासियों की आँखों से गिर रहा है। ये बात अगर व्यंगात्मक रूप से कहीं जाए तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा। दरअसल 24 घंटे सातों दिन जलापूर्ति का दावा करने वाले शहर में लोग पानी के लिए हलाकान है। गर्मी के दिनों में पानी की पर्याप्त आपूर्ति न हो पाने की बात समझी जा सकती है लेकिन जनता सरकारी और निजी दोनों प्रकार के नलों में आने वाला दूषित पानी पीने को मजबूर है। ये समस्या शहर की पुरानी बस्तियों में जटिल है जहाँ लोग पर्याप्त पानी हासिल भी नहीं कर पा रहे है। पीने के पानी में इल्लियॉ आने का अनुभव पहली बार शहर की जनता कर रही है। पानी काला आना, उससे दुर्गन्ध आना समझा जा सकता है लेकिन इसमें कीड़े आने की बात लोगो को चौका रही है।

शहर के प्रमुख अख़बार दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले मोमिनपुरा ईलाके में 200 से अधिक लोग पीलिया,गेस्ट्रो के साथ दूषित पानी से होने वाली अन्य बीमारियों से पीड़ित है। इसी तरह मराठी अख़बार लोकमत ने रेलवे स्टेशन के नजदीक बसें मोहन नगर ईलाके में दूषित पानी को लेकर अपनी ग्राऊंड रिपोर्ट में इस समस्या में बारे में जानकारी दी है। मोहन नगर ईलाके की महिलाओं ने पानी में इल्लियाँ,कीड़े के साथ ही दुर्गन्ध आने की शिकायत करते हुए अपर्याप्त जलापूर्ति की शिकायत की है।

बुधवार को ही केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण में नागपुर को 10 रूपए की ईनामी राशि वाला इंडियास बेस्ट सिटी इन इनोवेशन एंड बेस्ट प्रेक्टिसेस अवार्ड हासिल हुआ। इससे पहले भी शहर के विकास की ज़िम्मेदारी संभालने वाली स्थानीय स्वराज संस्था नागपुर महानगर पालिका को कई पुरस्कार हासिल हो चुके है। लेकिन इतने पुरस्कार के बावजूद शहर के बड़े हिस्से में रहने वाली जनता दूषित पानी पीने को मजबूर है। जिन इलाकों में दूषित पानी आ रहा है उनमे से अधिकतर में 24 बाय 7 प्रोजेक्ट का काम हो चुका है। ज्ञात हो की पानी की बर्बादी और दूषित जलापूर्ति को रोकने के लिए ही 24 बाय 7 प्रोजेक्ट लाया गया।


मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक नागपुर में 10 जून के आसपास मानसून आयेगा। ख़ुद प्रशासन का मानना है की जिले में पानी की कमी है ऐसे में आने वाले समय में जलसंकट गहराने के अंदेशे से इनकार नहीं किया जा सकता।

सोने से ज़्यादा क़ीमती हुआ पानी,तालों की निगरानी में क़ैद
शहर में पानी की समस्या का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि लोग पानी को ताले में बंद करके रखते है जिससे की कोई उसकी चोरी न करले। शहर के मध्य भाग में स्थित मॉडल मिल क्वार्टर में घरों के बाहर लोग ड्रामो में पानी रखते है। कड़ी मशक्क़त के बाद हासिल पानी को लेकर की गई मेहनत में कोई दूसरा पानी न फेर दे इसलिए उसे तालों नजरबंदी में रखा जाता है। दरअसल मॉडल मिल क्वार्टर परिसर में घरों में नल कनेक्शन नहीं है। आसपास के ईलाके के सरकारी नलों और टैंकर से आने वाले पानी पर यहाँ के लोग आश्रित है। मनपा ने मन से जितना पानी दिया उस पर कोई दूसरा हाँथ न साफ़ कर ले इसलिए लोगों ने तालों का सहारा लेना ज्यादा उचित समझा।

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