Published On : Sat, Jan 20th, 2018

“कॉन्वेंट” का मोह कम कर रहा है मनपा स्कूलों के विद्यार्थियों की संख्या

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नागपुर: अभिभावकों के मन में बसे कॉन्वेंट स्कूल के मोह की मानसिकता के चलते ही सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की कमी हो रही है. कोई भी अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना नहीं चाहता. इन स्कूलों में विद्यार्थियों को एडमिशन दिलाने के लिए भी शिक्षकों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है. कुछ ऐसा ही हाल रविनगर स्थित दादाजी धूनीवाले उच्च प्राथमिक हिंदी शाला का है. इस स्कूल की इमारत दूसरी मनपा स्कूलों की तुलना में काफी बेहतर है. नर्सरी से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थी यहां पढ़ते हैं. कुल मिलाकर 86 विद्यार्थी हैं. इनमें से छात्र 59 हैं तो छात्राओं की संख्या 39 है. एक मुख्याध्यापिका और इन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए 7 शिक्षक हैं. 3 महीने पहले चपरासी रिटायर्ड हुआ है. लेकिन मनपा के शिक्षा विभाग में निवेदन देने के बाद भी कोई भी अब तक किसी भी चपरासी की नियुक्ति नहीं की गई है. यहां मदतनिस है जो विद्यार्थियों को खाना देती है. उसे ही पैसे देकर साफसफाई का काम करवाया जाता है. एक शिक्षक को चुनाव से सम्बंधित पोलिओ से संबंधित कार्य दिया गया है. विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों की ओर से दो ऑटो भी चलवाए जाते हैं. जिसमें दूर से आनेवाले विद्यार्थियों को स्कूल से घर और घर से स्कूल पहुंचाया जाता है. विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों की ओर से सुबह ही विद्यार्थियों के माता पिता को एडमिशन करने के लिए समझाईश देने की बात स्कूल की सहायक शिक्षिका ने बताई है.

स्कूल की व्यवस्था और सुविधा
स्कूल में विद्यार्थियों के अनुपात में शिक्षकों की संख्या ठीक है. इमारत के साथ साथ सभी क्लास में विद्यार्थियों के बैठने के लिए व्यवस्थित बेंच, क्लास में पंखे है. स्कूल में वाटर कूलर नहीं है. लेकिन फ़िल्टर लगा हुआ है. विद्यार्थियों के लिए शौचालय की व्यवस्था ठीक है. और स्कूल में साफसफाई भी ठीक ठाक ही दिखाई दी. स्कूल में कुछ वर्ष पहले मनपा की ओर से कंप्यूटर दिए गए थे. लेकिन बाद में इन्हें वापस ले लिया गया. अभी स्कूल में एक ही कंप्यूटर है. उसका उपयोग भी विद्यार्थी नहीं के बराबर ही करते हैं.


विद्यार्थियों क्यों हो रहे है कम
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की कम होती संख्या चिंता का विषय है. लेकिन कुछ वर्षों में जिस तरह से इंग्लिश मीडियम स्कूल की संख्या बड़ी है. जिसके कारण सरकारी स्कूलों की हालत खराब हो गई और विद्यार्थियों की संख्या लगातार घटती गई. कुछ वर्षों से मनपा की स्कूलों में विद्यार्थियों की घटती संख्या का कारण निजी स्कूल ही है.


क्या कहता है स्कूल प्रशासन
स्कूल की मुख्याध्यापिका उषा शिंगडीलवार छुट्टी पर है. जिसकी वजह से स्कूल की जिम्मेदारी सहायक शिक्षिका शारदा गुजर को दी गई है. उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि रोजाना स्कूल के शिक्षकों की ओर से विद्यार्थियों के अभिभावकों के पास जाया जाता है, और उन्हें मनपा की स्कूल में बच्चों के एडमिशन करने की सलाह दी जाती है. लेकिन कान्वेंट शब्द से अभिभावकों की मानसिकता जुड़ने के कारण वे इस मानसिकता से बाहर नहीं आ पा रहे हैं. जिसके कारण विद्यार्थियों के एडमिशन के लिए दिक्कतें आती हैं. कई विद्यार्थियों को शिक्षकों द्वारा अपनी गाड़ी पर स्कूल लाया जाता है. जब शिक्षक उनके घर विद्यार्थियों को लाने जाते हैं, तो अभिभावक भी विद्यार्थियों की शिक्षा को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाते.

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—शमानंद तायडे

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