Published On : Thu, Feb 1st, 2018

सरकार बीते चार साल से झूठ बोल ही रही थी, वित्तमंत्री ने तो संसद में पेश बजट में जले पर नमक ही छिड़क दिया

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Union Budget 2018-19
नागपुर: देश के लोगों और उसकी भावना से सरकार किस तरह खिलवाड़ करती है इसकी बानगी फिर एक बार केंद्र सरकार के गुरुवार को पेश आम वित्तीय बजट से देखने को मिला। देश के वित्त मंत्री ने न सिर्फ देश की जनता बल्कि किसानों से जनता की सबसे बड़ी अदालत संसद में झूठ बोला। अपने लगभग सवा घंटे के अंग्रेजी में दिए गए भाषण में वित्त मंत्री ने चंद मिनट हिंदी में बात कहीं वह भी गुमराह करने वाली। वित्त मंत्री ने बताया की सरकार ने रबी की फसलो पर उत्पादन मूल्य से 50 फ़ीसदी ज़्यादा यानि डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य न केवल जारी किया बल्कि उसके हिसाब से ज्यादातर फसलों की ख़रीददारी भी हुई।

वित्तमंत्री ने देश के किसानों से झूठ बोला इसकी तस्दीक खुद सरकार के विभिन्न विभाग करते है उनका यह बयान किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। रबी की फसलों में गेहूँ,बाजरा,चना,तिलहन के साथ अन्य फसलों की खेती होती है देश के बड़े हिस्से में गेहूँ का उत्पादन अधिक होता है। फसलों का मूल्य निर्धारित करने का अधिकार कृषि मंत्रालय के अधीन आने वाले कृषि मूल्य आयोग एवं लागत आयोग के जिम्मे है वर्ष 2016 -17 के लिए आयोग ने गेहूँ के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2345 रूपए प्रति क्विंटल तय किये थे। सरकार की ही एजेंसी जिसके ज़िम्मे फसलों को खरीदना है फ़ूड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया ने इसी वर्ष 1525 में किसानों से गेहूँ ख़रीदा। वर्ष 2017 -18 के लिए आयोग ने 2408 रूपए निर्धारित किये लेकिन खरीदारी हुई 1625 रूपए के हिसाब से, यह आंकड़े सरकार के ही अन्य मंत्रालयों के अधीन आते है बावजूद इसके वित्तमंत्री ने देश के किसानों से मज़ाक किया।

वित्तमंत्री के इस व्यवहार से विदर्भ के किसानों के साथ ही कृषि क्षेत्र के जानकारों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। ध्यान देने वाली बात यह भी है की इसी सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर लागत मूल्य ने 50 फ़ीसदी अधिक दाम दिए जाने को अव्यवहारिक और अप्रासंगिक बताया है। पेश हुआ बजट इस सरकार का अंतिम बजट था तो क्या वित्तमंत्री का यह बयान 2014 में चुनाव प्रचार के दौरान वर्त्तमान प्रधानमंत्री द्वारा किसानों से किये गए वादे की ही तरह महज जुमला भर था। विदर्भ किसान की बदहाली के लिए बदनाम इलाका है 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का वादा किया था। लेकिन अफ़सोस न ये वादा पूरा हुआ और न ही किसानों की आत्महत्या कम हुई।

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विदर्भ के कृषि विशेषज्ञों ने वित्तमंत्री की इस हरकत को बेहूदा करार दिया है

वित्तमंत्री का बयान हास्यास्पद -चंद्रकांत वानखड़े
वरिष्ठ पत्रकर और कृषि क्षेत्र और किसानों के संबंध में लंबे समय से अध्ययन कर रहे चंद्रकांत वानखड़े ने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री द्वारा दिए गए बयान को हास्यास्पद करार दिया है। उनके अनुसार आगामी चुनाव को देखते हुए सरकार यह बयान दिया गया है। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम दाम में अपनी फसल बेचने को मजबूर है। सरकार की एजेंसिया ही फसल ख़रीदने में नाकामियाब साबित हुई है परेशान होकर किसान खुले बाज़ार में अपने उत्पादन को बेचता है जिससे कई बार उसे उत्पादन मूल्य से डेढ़ गुना काम दाम मिलता है।

अगर वित्तमंत्री की बात सही है तो किसान आत्महत्याएँ बंद हो गई होती – शरद पाटिल
जनमंच संस्था के माध्यम से किसानों के स्वावलंबन के लिए कार्य करने वाले प्रोफ़ेसर शरद पाटिल का कहना है। इस सरकार को बने हुए लगभग चार वर्ष हो गए किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए एक भी तरह का थोड़ा कदम नहीं उठाया गया। अगर वित्तमंत्री की बात सही होती तो अब तक विदर्भ में किसानों की आत्महत्याओं का सिसलिला रुक जाता। किसान आत्महत्या करने मजबूर है लेकिन वित्तमंत्री संसद में झूठ बोल रहे है।

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एमएसपी को लेकर जब तक कानून नहीं बनेगा किसानो के साथ इसी तरह खिलवाड़ होता रहेगा – शरद निंबालकर
पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के पूर्व कुलगुरु और कृषि विशेषज्ञ शरद निंबालकर के अनुसार यह बयान आगामी चुनाव को देखते हुए दिया गया है। यह हकीकत है की पहले की तुलना में न्यूनतम समर्थन मूल्य में थोडा बहुत इजाफ़ा जरूर हुआ है जिसके अन्य कारण है लेकिन ऐसा भी नहीं कि किसानों को डेढ़ गुना दाम मिलने लगा हो। यह सरकार को भी पता है वह अपना वादा पूरा नहीं कर सकती जब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर क़ानून नहीं बनाया जायेगा किसानो के साथ इस तरह का खिलवाड़ होता ही रहेगा। आवश्यकता है की एक ऐसा क़ानून बनाया जाए जिससे किसान अपने वाले को निभाने के लिए बंधनकारक हो।

वित्तमंत्री बोलने से पहले सोच तो लेते क्या बोल रहे है – राम नेवले
स्वाभिमान शेतकरी संगठन के नेता राम नेवले ने वित्तमंत्री से माँग की है की उन्होंने किस आधार यह बात कही है उसकी जानकारी जनता को दे। कम से कम उन्होंने जो कहाँ उसके बारे में एक बार सोच ही लेते।

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