Published On : Wed, Jul 24th, 2019

महामार्गों पर स्थित शराब दुकानों पर मंडरा रहा खतरा

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– राज्य सरकार को ६ सप्ताह में पक्ष रखने का निर्देश

नागपुर : राज्य व राष्ट्रीय महामार्गों पर बंदी के बाद पुनः शराब दुकानें/बार शुरू करने के आदेश के खिलाफ एक याचिका उच्च न्यायालय में दायर की गई.न्यायाधीश प्रदीप नद्राजोग व एनएम जामदार ने उक्त याचिका को दाखिल कर राज्य सरकार को जवाब देने हेतु ६ सप्ताह का समय दिया।साथ ही याचिकाकर्ता सांगली के पूर्व नगरसेवक शेखर माने को उनका पक्ष/तर्क रखने के लिए २ सप्ताह का समय दिया।

पूर्व में तमिलनाडु के सामाजिक कार्यकर्ता बालू ने महामार्गों पर सहज शराब बिक्री/मिलने से सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी के मसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.कोर्ट ने १५ दिसंबर २०१६ को इस प्रकरण पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि ३१ मार्च २०१७ के बाद किसी भी शराब बिक्री सम्बन्धी लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाये। इस निर्णय से सम्पूर्ण देश के संबंधितों में भूचाल आ गया था.लाखों दुकानों-बारों पर ताले लग गए.संबंधितों ने इस बंदी को हटाने के लिए टुकड़ों-टुकड़ों में एकजुट होकर अगल-अलग शहरों में जनहित याचिका दायर की.

इस क्रम में पहली याचिका चंडीगढ़ में दाखिल हुई.याचिका के मार्फ़त जानकारी दी गई थी कि चंडीगढ़ मनपा ने शहर के सभी सड़कों को रिक्लासिफ़ाय व डिक्लासिफ़ाय घोषित किये जाने की जानकारी दी गई.इस हिसाब से चंडीगढ़ शहर में बड़ी की शर्त को शिथिल की जाए.चंडीगढ़ न्यायालय ने इस मांग को मान्य कर शिथिल किया तो इस को आधार बनाकर नागपुर खंडपीठ ने सम्पूर्ण महाराष्ट्र की बंदी हटाने का आदेश दिया था.

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इसके बाद जनवरी २०१९ को सरकार ने सुधारित अध्यादेश जारी कर ग्रामपंचायत के हद्द से गुजरने वाली महामार्गों में भी शराब दुकानें शुरू करने की अनुमति पूर्व की तरह बहाल किया।अब सम्पूर्ण देश के महामार्गों पर शराब की दुकानें शुरू हैं.

उक्त याचिका द्वारा याचिकाकर्ता द्वारा माने का तर्क यह हैं कि चंडीगढ़ न्यायालय के निर्णय को आधार कैसे बनाकर सम्पूर्ण महाराष्ट्र से बंदी हटाई गई.माने ने सांगली मनपा के सडको ककी जानकारी दी कि मनपा हद्द की सभी सड़कें राज्य लोककर्म विभाग की हैं.

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