नागपुर: मोदी सरकार भले ही किसानों को उत्पादन लागत के मुकाबले दोगुना दाम देने का दावा जोरों शोरों से कर रही हो, लेकिन हकीकत की जमीन में ये दावे खोखले साबित हो रहे हैं. यही वजह है कि खेतों में अच्छी कपास की फ़सल होने के बाद भी चंद्रपुर के एक किसान ने फसल के कम दामों के चलते फसल खेत में ही छोड़ने का निर्णय लिया.
अन्नदाता किसान आज संकटों से घिरा हुआ है. हर दिन उनके सामने नई मुसीबतें आती दिख रही है. कभी बारिश की कमी तो कभी ज्यादा बारिश से नुकसान हो रहा है. विभिन्न कारणों से रोगों से बर्बाद होने वाली फसल तो कभी अच्छी फसलों के बावजूद दाम में गिरावट, ऐसे हर साल की समस्याओं से परेशान चंद्रपुर जिले के वरोरा तहसील के माढेळी परिसर के किसानों ने खेतों में कपास ऐसे ही छोड़ दिया है.
कपास जमा करने वाले मजदूर 20 रुपए प्रति क्विंटल मजदूरी ले रहे हैं और व्यापारी प्रति क्विंटल 2000 रुपए से लेकर 2500 रुपए बाजार भाव दे रहे हैं. मजदूरी और कपास को बाजार तक पहुंचाने का ट्रांस्पोर्ट ख़र्च बाजार भाव से ज्यादा हो जाने पर नुकसान होने की आशंका को देखते हुए किसानों ने कपास की आखरी फसल वैसे ही खेतों में छोड़ दी है.
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