Published On : Sun, Aug 20th, 2017

मनसर के उत्खनन में मिली अस्थियां नागार्जुन की – भदन्त सुरेई ससाई

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Bhadant Surai Sasai
नागपुर: 
नागपुर शहर से कुछ दूर मनसर टेकड़ी पर हुए उत्खनन में बड़े प्रमाण में बौद्धकालीन अवशेष मिले थे. अब तक लगभग 2 हजार 766 बुद्धकालीन मुर्तियां उत्खनन में मिली थीं. खास बात यह है कि इसमें बड़े पत्थरों से तैयार किए गए तीन स्तूप भी मिले थे. स्तूप में बिना सिर वाली मूर्ति के साथ ही अस्थियां भी मिली थीं. यह मुर्तियां और अस्थियां नागार्जुन की ही हैं. यह जानकारी बौद्ध धम्मगुरु व धम्मसेना नायक भदन्त आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई ने शनिवार को इंदोरा स्थित बुद्ध विहार में आयोजित पत्र परिषद के दौरान दी. उन्होंने बताया कि इस टेकड़ी पर तालाब के नीचे उत्खनन करने पर बौद्धकालीन स्तूप मिल सकते हैं. अब तक हुए उत्खनन में बोधिसत्व व खड़े भिक्खू और सातवाहनकालीन चिन्ह भी मिले हैं.


उन्होंने बताया कि बोधिसत्व नागार्जुन स्मारक संस्था व अनुसन्धान केंद्र की ओर से 1992 में उत्खनन की शुरुआत की गई थी. मनसर टेकड़ी पर एक समय बौद्धकालीन विश्वविद्यालय था. यहां बौद्धकालीन अवशेष होने के कारण उत्खनन का निवेदन पुरातत्व विभाग को दिया गया था. लेकिन उन्होंने इस पत्र पर ध्यान नहीं दिया.


भंते ने बताया कि उसके बाद रामटेक के सांसद तेजसिंगराव भोसले व सांस्कृतिक मंत्री अर्जुनसिंह को भी निवेदन दिया गया था. उन्होंने यहां के उत्खनन के लिए मंजूरी दी थी. पुरातत्व विभाग द्वारा 2 साल उत्खनन करने के बाद खुद के खर्च से उत्खनन भी बाद में किया गया था. पहले उत्खनन में टेकड़ी पर तीन स्तूप मिले. स्तूप के नीचे महापुरुष की अस्थियां व उसके नीचे बौद्धकालीन मूर्ति और सातवाहन शिलालेख मिले. दूसरी बार उत्खनन में बौद्ध विश्वविद्यालय मिला था. इस विश्वविद्यालय में बौद्ध भिक्षुओं को धम्म व सदाचार का ज्ञान दिया जाता था. भंते ने बताया कि यहां और 50 फीट नीचे खुदाई करने पर भगवान बुद्ध की अस्थियां मिलने का अनुमान पुरातत्व विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी ए.के. शर्मा ने जताया था. उन्होंने बताया कि यह सम्पूर्ण उत्खनन करीब 9 साल तक चला. अंग्रेजों ने 17 नवंबर 1906 को मनसर टेकड़ी राष्ट्रीय स्वरक्षित स्मारक के नाम से घोषित की थी. लेकिन मनसर टेकड़ी पर सातवाहन काल के पहले से ही बौद्ध विश्वविद्यालय था.

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भंते आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई ने बताया कि यह जो अस्थियां उत्खनन में मिली थी यह अस्थियां नागार्जुन की हैं. जिसके बारे में सही जानकारी किसी को भी नहीं दी गई थी. बल्कि यह बताया गया था कि यह एक महापुरुष की अस्थियां हैं. साथ ही इसके उन्होंने टेकड़ी पर 50 फीट नीचे खुदाई करने की मांग की है. उन्होंने बताया कि नागार्जुन के बारे में कई लोगों को जानकारी ही नहीं है कि वह कौन थे. नागार्जुन के बारे में जानकारी देते हुए भंते ने बताया कि 500 से 600 वर्ष पहले नागार्जुन का जन्म हुआ था. वे आयुर्वेद व रसायन के जनक थे. उन्होंने ही महायान पंथ की स्थापना की थी. आयुर्वेद की जानकारी की वजह से वे 150 वर्षों तक जिये थे. लेकिन एक ऋषि ने नागार्जुन के कारण कुछ होने की बात कही थी जिसके कारण उनके माता पिता ने आठ से दस वर्ष की उम्र में उन्हें गुफा में छोड़ दिया था. जिसके बाद उनका पालन पोषण बौद्ध भिक्षुओं ने किया. नागार्जुन ने आयुर्वेद और रसायन की पढ़ाई की और रामटेक परिसर में ही स्थायी हो गए थे।

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