Published On : Thu, Jul 11th, 2019

विश्व जनसंख्या दिन : एक सशक्त नागरिक बनने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है बढ़ती आबादी : डॉ. प्रीतम गेडाम

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नागपुर: बढ़ती हुई जनसंख्या पूरे विश्व के लिए गंभीर समस्या है, लेकीन भारत देश के लिए तो यह महामारी का रूप ले रही है. बढ़ती जनसंख्या की जरूरतें भी रोज तेजी से बढ़ रही है. जब आसानी से सुख-सुवीधाएॅ प्राप्त नहीं होती है तब मजबूरी में समझौता करना पड़ता है. आज देश में बेरोजगारी, अशिक्षा, गरीबी, अपराधवृद्धी, भुखमरी, महंगाई, प्रदूषण, भ्रष्ट्राचार, मिलावटखोरी जैसी बहुत सी गंभीर समस्याएं हैं. इतनी बड़ी जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करना एक चुनौती है. बढ़ती जनसंख्या दूसरी गंभीर समस्याओं को जन्म देती है अर्थात कई समस्याओं की मूल जड़ ही जनसंख्या है. एक सशक्त नागरिक बनने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बढ़ती आबादी है. यह बात विश्व जनसंख्या दिवस पर डॉ. प्रीतम गेडाम ने कही.

डॉ. गेडाम आबादी के बढ़ते ग्राफ़ और उससे पैदा होनेवाली चुनौतियों के रोचक तथ्यों की विस्तार से चर्चा करते हैं. वे बताते हैं आज विश्व की जनसंख्या 7 अरब 71 करोड़ 67 लाख 91 हजार 619 है जबकि भारत की जनसंख्या 1 अरब 36 करोड़ 91लाख 571 है. यानी विश्व की 17.74 प्रतिशत आबादी का हिस्सा भारत का है. लेकिन क्षेत्रफल के हिसाब से विश्व की मात्र 2.42 प्रतिशत जमीन ही हमारे देश के हिस्से में आती है.

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आज हम चीन के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्यावाले देश के रूप में जाने जाते है. लेकीन अगले छह साल बाद विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या हमारे भारत देश की होगी. क्योकी हमारे देश की जनसंख्या दर वृद्धि 1.02 प्रतिशत है जबकी चीन की जनसंख्या वृद्धी दर 0.43 प्रतिशत. हमारे देश में प्रत्येक मिनट मे 28 लोग, दिन में 40 हजार 320 और एक महिने मे 12 लाख 9 हजार 600 इतनी जनसंख्या बढ़ती है.

भारत देश की इतनी बड़ी जनसंख्या की डेंसिटी भी 460 प्रति वर्ग किलोमिटर है जबकी बड़े शहरों की स्थिती तो और भी ज्यादा बदतर है. देश के प्रसिद्ध शहर मुंबई मे प्रतिवर्ग किलोमिटर 32 हजार 400 की जनसंख्या डेंसिटी है. अन्य देशों की तुलना में हमारे देश की जनसंख्या डेंसिटी काफी अधिक मात्रा में है. चीन देश की जनसंख्या डेंसिटी 151 प्रतिवर्ग किलोमिटर है. युनाईटेड स्टेट्स की डेंसिटी 36 है, इंडोनेशिया की जनसंख्या डेंसिटी 149 है, ब्राजील की जनसंख्या डेंसिटी 25 है, पाकिस्तान की जनसंख्या डेंसिटी 265 है, नाईजेरीया की जनसंख्या डेंसिटी 221 है, रशिया की जनसंख्या डेंसिटी 9 है और मेक्सिको की जनसंख्या डेंसिटी 68 प्रतिवर्ग किलोमिटर है. आज देश की 34 प्रतिशत जनसंख्या शहरों में रहती है साल 2050 में 50 प्रतिशत जनसंख्या शहरी आबादी की होगी.

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आज खेती की उपजाऊ भूमी कांक्रीट के जंगल का रूप ले चुकी है. मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा है जिसके कारण नैसर्गीक आपदाओं में लगातार बढ़ोतरी हुई है.

बढ़ती जनसंख्या देश के लिए घातकः-
हंगर एंड मालन्यूट्रिशन रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बच्चों के बीच कुपोषण के अनिष्ट अनुपात मिले हैं. एक दशक पहले जिन जिलों की स्थिति कुछ बेहतर थी वहां आज कुपोषित बच्चों की तादाद बढ़ी है. रिपोर्ट खुलासा करती है कि 40 फीसदी बच्चे कम वजन वाले हैं और 60 फीसदी का शारीरिक विकास थम चुका है. वहीं भारत के अधिकतर भागों में स्कूली शिक्षा की हालत दयनीय है. जहां तक उच्च शिक्षा की बात है तो उसे भी बहुत बेहतर नहीं कहा जा सकता. विश्वविद्यालयों को संसाधनों की जबर्दस्त कमी से जूझना पड़ता है. इससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित हुई है. सयुंक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुपोषित लोगों की संख्या 19.07 करोड़ है.

यह आंकड़ा दुनिया में सर्वाधिक है. देश में 15 से 49 वर्ष की 51.4 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है. 2016 के वैश्विक भूख सूचकांक में 118 देशों में भारत 97वां स्थान पर था. आज दुनिया की 7.1 अरब आबादी में 80 करोड़ यानी बारह फीसदी लोग भुखमरी के शिकार हैं. बीस करोड़ भुखमरी के शिकार लोगों की संख्या के साथ भारत इसमें पहले नंबर पर है. ग्लोबल हंगर इंडेक्सए 2018 के अनुसार भारत 119 देशों की सूची में 103वें स्थान पर पहुंच गया है. आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार प्रति व्यक्ति आय दर के मामले में 200 देशों की सूची में भारत 126वें पायदान पर है. ब्रिटेन स्थित चैरिटी ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने आर्थिक असमानता को कम करने के प्रतिबद्धता सूचकांक में 157 देशों वाली सूची में भारत को 147वां स्थान दिया है.

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