Published On : Sat, Oct 20th, 2018

सीबीएसई के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, प्रलंबित 8 हजार स्कूलों को मिलेगी मान्यता- प्रकाश जावड़ेकर

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नागपुर: केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूलों को मान्यता देने संबंधी अपने नियमों में बदलाव किया है. उप नियमों में बदलाव के साथ ही सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंड्री एजुकेशन (सीबीएसई) ने मान्यता के लिए 8,000 लंबित पड़े आवेदनों को भी मंजूरी दे दी है. यह बात केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कही. उनेहोंने बताया कि ये आवेदन 2007 से लंबित पड़े थे. अब स्कूलों को मान्यता लेने के लिए सिर्फ दो दस्तावेज जमा करने होंगे और आवेदन का निपटारा उसी साल हो जाएगा, जिस साल आवेदन दिया है. सीबीएसई ने अपनी भूमिका में भी बदलाव करते हुए इसे सिर्फ शैक्षिक गुणवत्ता की निगरानी तक सीमित किया है. अब आधारभूत ढांचे के ऑडिट की जिम्मेदारी राज्यों को दे दी गई है.

जावड़ेकर ने घोषणा की कि मान्यता देने वाले सीबीएसई के उप कानूनों को पूरी तरह से बदल दिया गया है . उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि त्वरित ,पारदर्शी, परेशानी मुक्त प्रक्रियाओं और बोर्ड का आसानी से काम करना सुनिश्चित किया जा सके . उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘नए उप कानून पूर्व की बेहद जटिल प्रक्रियाओं से सरल तंत्र में आना दर्शाता है जो प्रक्रियाओं के दोहराव को रोकने पर आधारित है . उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में आरईटी कानून के तहत मान्यता तथा एनओसी देने के लिए राज्य शिक्षा प्रशासन स्थानीय निकायों,राजस्व तथा सहकारी विभागों से मिलने वाले अनेक प्रमाणपत्रों का सत्यापन करता है। आवेदन मिलने के बाद सीबीएसई उनका पुन: सत्यापन करता है और इस प्रकार से पूरी प्रक्रिया लंबी हो जाती है . ‘

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जावडेकर ने कहा कि बोर्ड अब उन पहलुओं को नहीं देखेगा जिनका निरीक्षण राज्य कर चुका है. अब सीबीएसई द्वारा स्कूलों का निरीक्षण परिणाम आधारित और शैक्षणिक तथा गुणवत्ता उन्मुख होगा. गौरतलब है कि देश भर में 20,783 स्कूल सीबीएसई से मान्यता प्राप्त हैं. इनमें कम से कम 1.9 करोड़ छात्र और 10 लाख से अधिक शिक्षक हैं. मान्यता देने से जुड़े उप कानून 1998 में बने थे और अंतिम बार 2012 में उनमें बदलाव किया गया था .

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