Published On : Thu, Nov 11th, 2021
By Nagpur Today Nagpur News

कृषि फसल के लिए लाभकारी है बिजली परियोजनाओं की राख

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-कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार विविध प्रकार की धान(चावल) के अलावा मूंग उडद, अरहर मक्का जवार,बाजरा,गेहूं चना बटाना,मूगफली,सोयाबीन अलसी, लाख-लखोडी, मसूर, करडी, सरसों,हालो, सूरजमुखी तिल्हन-दल्हन इत्यादी की फसलों की पैदावार मे बेहतासा वृद्धि हुई

नागपूर – देश के सभी ताप बिजली परियोजनाओं के आसपास के ग्रामीण किसानों के लिए फ्लाई ऐश के उपयोग तथा इससे होने वाले लाभ की जानकारी देने के उद्देश्य से राख उपयोगिता कार्यशाला कृषि विश्व विधालय की ओर से किया जा रहा हैlकृषि वैज्ञानिकों के अनुसार बिजली परियोजनाओं की राख के उपयोग से विविध प्रकार की धान(चावल) विशेषकर वासमती चावल धान की फसलों की पैदावार मे काफी इजाफा हो रहा है,उसी प्रकार मूंग उडद, अरहर मक्का जवार,बाजरा,गेहूं चना बटाना,मूगफली,सोयाबीन अलसी, लाख-लखोडी, मसूर, करडी, सरसों,हालो, सूरजमुखी तिल्हन-दल्हन इत्यादी की फसलों की पैदावार मे बेहतासा वृद्धि हुई है.उसी प्रकार विविध प्रकार के फल-फूल तथा सभी तरह की साग-भाजी की पैदावार बढ रही है.

हालही देश के विविध राष्ट्रीय ताप विधुत निगम के सभाग्रहों मे आयोजित कार्यशाला मे बतौर मुख्य अतिथि महाप्रबंधक (तकनीकी सेवाएं) राजकुमार ने बताया था कि विद्युत गृह से निकलने वाली राख का उपयोग किसानों के लिए हितकर है. राख के उपयोग से अनाज व सब्जियों की उपज को बढ़ाया जा सकता है. हमारा भारत एक कृषि प्रधान देश है. आज किसानों के मध्य तकनीकी खेती करने व खेतों की उर्बरा शक्ति बढ़ाने के तरीके बताने की जरूरत है. पौधे बलुबर मिट्टी जिसमें खनिजों की भरपूर मात्रा होती है में ज्यादा पनपते हैं.

फ्लाई ऐश में सिलिका व अन्य पोषक तत्वों की प्रचुर मात्रा होती है साथ ही इसके उपयोग से मिट्टी में भुर-भुरापन रहता है व जल रोकने की क्षमता बढ़ जाती है. फलत: उपज का बढ़ना स्वाभाविक है. महाप्रबंधक (अनुरक्षण) आर.के. सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इससे पूर्व अपर महाप्रबंधक (इएमजी) आर.वाई. पाण्डेय ने पुष्पगुच्छ प्रदान कर अतिथियों का स्वागत किया।

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कार्यशाला में मुख्य प्रवक्ता के रूप में उपस्थित कृषि वैज्ञानिक डॉ. गिरीश चंद पाण्डेय ने राख में उपलब्ध तत्वों तथा मृदा परीक्षण से लेकर राख के उपयोग से होने वाली उपज के बारे में विस्तार से बताया तथा ऊंचाहार, टांडा परियोजनाओं के पास राख के उपयोग के बाद फसल की उपज में हुई वृद्धि एवं एनटीपीसी द्वारा राख के विभिन्न उपयोगों पर आधारित फिल्म भी दिखाई गई। कार्यशाला में विधुत परियोजनाओं के आसपास के बहुत से किसानों व राख से ईट बनाने वाली एजेंसियों ने अपनी भागीदारी दर्ज की हैl इसके अलावा सडक निर्माण कार्यों मे एशफ्लाय का उपयोग किया जाने लगा हैl

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