
नागपुर – उपराजधानी नागपुर में दीपावली के पर्व से पहले ही वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। शहर की हवा में घुल रहे धूलकण और सूक्ष्म प्रदूषक अब लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि दीपावली पर पटाखों की आतिशबाजी शुरू होने से पहले ही शहर के कुछ प्रमुख इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 200 के पार पहुंच गया है। महल, अंबाझरी, जीपीओ और रामनगर जैसे क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता प्रभावित होने से नागरिकों की चिंता बढ़ गई है। आशंका जताई जा रही है कि दीपावली के दौरान बड़े पैमाने पर पटाखे फोड़े जाने के बाद प्रदूषण का स्तर और अधिक बढ़ सकता है।
शहर में बुधवार तक हवा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर थी और एक्यूआई 100 के भीतर दर्ज किया जा रहा था। लेकिन गुरुवार को अचानक प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी हुई और एक्यूआई 207 तक पहुंच गया। शुक्रवार को भी स्थिति में विशेष सुधार नहीं हुआ और एक्यूआई 198 दर्ज किया गया। यानी कुछ ही दिनों में शहर की हवा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली है। यह स्थिति तब है, जब दीपावली की आतिशबाजी का प्रभाव अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है।
पर्यावरण के लिहाज से नागपुर को हरियाली और खुले वातावरण वाला शहर माना जाता है, लेकिन लगातार बढ़ते वाहनों की संख्या, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, सड़कों पर जमा मिट्टी और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों के कारण हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। अब त्योहार के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं इस समस्या को और गंभीर बना सकता है।
पटाखों से बढ़ सकता है प्रदूषण का खतरा
दीपावली के दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में बड़े पैमाने पर पटाखे फोड़े जाते हैं। पटाखों से निकलने वाला धुआं, जहरीली गैसें और अत्यंत सूक्ष्म कण वातावरण में फैल जाते हैं। इसके कारण कुछ समय के लिए हवा में प्रदूषकों की मात्रा तेजी से बढ़ सकती है। कई बार आतिशबाजी के बाद वातावरण में धुएं की मोटी परत दिखाई देने लगती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस दौरान हवा की गति कम रही और वातावरण में प्रदूषकों को फैलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला, तो धुआं और बारीक कण लंबे समय तक हवा में बने रह सकते हैं। ऐसी स्थिति में पहले से प्रदूषित इलाकों में लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
विशेष रूप से घनी आबादी वाले क्षेत्रों और यातायात की अधिक आवाजाही वाले इलाकों में प्रदूषण का प्रभाव अधिक महसूस होने की आशंका है। ऐसे में नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे दीपावली का त्योहार मनाते समय पर्यावरण और दूसरों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें।
पीएम 2.5 और पीएम 10 के कण बन रहे स्वास्थ्य के लिए खतरा
हवा में मौजूद पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक माने जाते हैं। पीएम 10 आकार में अपेक्षाकृत बड़े कण होते हैं, जबकि पीएम 2.5 के कण बेहद छोटे होते हैं और सांस के जरिए फेफड़ों के भीतर गहराई तक पहुंच सकते हैं।
इन कणों के लगातार संपर्क में रहने से खांसी, सांस लेने में परेशानी, गले में खराश और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पहले से अस्थमा या अन्य सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। वहीं, हृदय रोगियों के लिए भी प्रदूषित हवा नुकसानदायक साबित हो सकती है।
बच्चों और बुजुर्गों को प्रदूषण का खतरा अधिक रहता है। बच्चों के फेफड़े विकसित होने की प्रक्रिया में होते हैं, जबकि बुजुर्गों में पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं प्रदूषण के प्रभाव को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में दीपावली के दौरान पटाखों के धुएं से इन वर्गों को विशेष रूप से बचाने की जरूरत है।
सीपीसीबी के मानकों में 200 के पार AQI खराब श्रेणी में
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के निर्धारित मानकों के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक को छह श्रेणियों में बांटा गया है।
0 से 50: अच्छा
51 से 100: संतोषजनक
101 से 200: मध्यम
201 से 300: खराब
301 से 400: बहुत खराब
401 से 500: गंभीर
इन मानकों के अनुसार नागपुर में गुरुवार को दर्ज किया गया 207 का एक्यूआई खराब श्रेणी में आता है। शुक्रवार को दर्ज 198 का स्तर मध्यम श्रेणी में रहा, लेकिन यह खराब श्रेणी की सीमा के बेहद करीब है। लगातार इस स्तर का प्रदूषण बने रहना चिंता का विषय है।
वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य और कचरा जलाना भी जिम्मेदार
शहर में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे केवल पटाखे ही जिम्मेदार नहीं हैं। सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों के दौरान उड़ने वाली धूल, सड़कों पर जमा मिट्टी और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियां भी हवा को प्रदूषित कर रही हैं।
कई स्थानों पर निर्माण कार्यों के दौरान धूल को नियंत्रित करने के पर्याप्त उपाय नहीं किए जाते। वहीं, कुछ क्षेत्रों में कचरा जलाने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। इन सभी कारणों से वातावरण में प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ती है।
यदि समय रहते इन गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो त्योहारों के दौरान प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है। इसके लिए प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।
प्रदूषण से बचने के लिए नागरिक बरतें सावधानी
बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए नागरिकों को अपनी सेहत के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। विशेषकर सांस और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को प्रदूषित वातावरण में अधिक समय तक रहने से बचना चाहिए।
स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतना आवश्यक है।
प्रदूषण का स्तर अधिक रहने पर अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें।
बच्चों और बुजुर्गों को धुएं और धूल वाले वातावरण से दूर रखें।
अस्थमा और सांस के मरीज अपनी दवाइयां नियमित रूप से लें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
बाहर व्यायाम या मॉर्निंग वॉक पर जाने से पहले एक्यूआई की स्थिति जांचें।
पटाखे फोड़ने वाले स्थानों और धुएं से भरे इलाकों से दूरी बनाए रखें।
जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला एन95 मास्क इस्तेमाल करें।
सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या लगातार खांसी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
पर्यावरण बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
पर्यावरण कार्यकर्ता अमित देशमुख का कहना है कि शहर में वाहनों से निकलने वाला धुआं, धूल और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं। इस समस्या से निपटने के लिए नागरिकों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने अधिक से अधिक पेड़ लगाने, खुले में कचरा नहीं जलाने और निजी वाहनों का अनावश्यक इस्तेमाल कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। पर्यावरण संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है।
अमित देशमुख के अनुसार, नागपुर की हवा को स्वच्छ बनाए रखने के लिए छोटे-छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
हरित दीपावली मनाने की जरूरत
दीपावली खुशियों, रोशनी और उत्साह का पर्व है। लेकिन त्योहार की खुशियों के बीच पर्यावरण और स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। शहर में पहले से बढ़ते प्रदूषण के बीच पटाखों का अत्यधिक इस्तेमाल लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।
नागपुर की हवा को स्वच्छ बनाए रखना प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि लोग पटाखों का इस्तेमाल सीमित करें, ध्वनि और वायु प्रदूषण से बचें तथा पर्यावरण के अनुकूल तरीके से त्योहार मनाएं, तो प्रदूषण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
दीपावली की रोशनी किसी के लिए सांस लेने की परेशानी का कारण न बने, इसके लिए इस बार उपराजधानी के नागरिकों को हरित और प्रदूषणमुक्त दीपावली मनाने का संकल्प लेना होगा।



